दुनिया के सबसे ठंडे गांव में भी सर्दी ने तोड़ा रिकॉर्ड,-62 डिग्री पहुंचा पारा,आंखों की पलकों में जमीं बर्फ

दुनिया के सबसे ठंडे शहर, पूर्वी साइबेरिया में याकुत्स्क, जहां का तापमान शून्य से 50 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है. वहां इस बार की ठंड में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी दर्ज की गई. बुधवार को यहां का तापमान 20 साल के बाद एक बार फिर से शून्य से 62.7 डिग्री सेल्सियस नीचे गिर गया है. वहां के लोग अत्यधिक ठंड का सामना कर रहे हैं क्योंकि साइबेरिया इस समय खतरनाक ठंड के मौसम से गुजर रहा है.

 

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मिली जानकारी के मुताबिक साइबेरिया में तापमान -62.7 डिग्री सेल्सियस (-80.9 डिग्री फ़ारेनहाइट) तक गिर गया है, जो दो दशकों से अधिक समय में रूस में सबसे ठंडा दिन रहा है, मौसम विज्ञानियों को बीएनओ न्यूज ने बताया कि रूस के बड़े हिस्से में इस समय रिकॉर्ड कम तापमान दर्ज किया जा रहा है.

बीएनओ न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस के याकुटिया क्षेत्र में मौसम एजेंसी ने कहा कि बुधवार सुबह 9 बजे टोंगुलख में -62.7 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जो इस महीने में तीसरी बार सबसे कम तापमान है. हालांकि यहां के अधिकांश लोग ठंड के तापमान के आदी हैं, लेकिन दूरदराज के इलाकों के निवासी खुद को गर्म रखने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं.

पत्तागोभी बन जाना है बेहतर-लोगों ने कहा

टोपी और हुड की कई परतों में पहने एक निवासी ने रायटर को बताया कि “आप इस ठंड से तो लड़ नहीं सकते,” दो स्कार्फ और दस्ताने, “आप या तो इसे बर्दास्त करें और उसके अनुसार कपड़े पहनें या आप इससे डरकर बीमार पर जाएं.”

एक स्थानीय बाजार में जमी हुई मछली बेचने वाली एक अन्य निवासी ने कहा, “बस गर्म कपड़े पहनें, इस तरह की जैसे कि आप परत-दर-परत कपड़े में लिपटे पत्तागोभी हों.”

1982 के बाद इतना कम तापमान दर्ज किया गया

यह फरवरी 2002 और जनवरी 1982 के बाद से रूस का सबसे कम तापमान दर्ज किया गया है. बीएनओ न्यूज ने एक रिपोर्ट में कहा है कि यह इस साल पृथ्वी पर अब तक का सबसे ठंडा तापमान भी है.

एक मिलियन से भी कम निवासियों के घर याकुत्स्क में, लोगों ने अत्यधिक तापमान का सामना किया और एपिफेनी के ईसाई रूढ़िवादी दिवस को मनाने के लिए कुछ लोग बर्फ के ठंडे पानी में कूद गए, जो यीशु मसीह के बपतिस्मा का स्मरण करता है.

साल 2018 में, यहां इतना ठंडा था कि कुछ निवासियों ने कहा कि उनकी पलकें जम गईं थीं. जुलाई में, याकुत्स्क उस समय खबरों में था, जब पास के जंगल की आग की धुंध ने जंगलों को छलनी कर दिया था और इस क्षेत्र को घने धुएं से ढक दिया था.

वैज्ञानिकों ने साइबेरियाई आर्कटिक में जलवायु परिवर्तन के कारण लगी आग की बढ़ती आवृत्ति के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त की है.