आंख की रौशनी कम थी, फिर भी भारत के लिए इस खिलाडी ने जीता गोल्ड

by Waqar Panjtan

 

भारत के लिए ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीतना आज भी बहुत बड़ी बात है और बात जब व्यक्तिगत स्पर्धा की हो तो गोल्ड मेडल काफी मुश्किल मालूम पड़ता है. भारत के हिस्से एकल स्पर्धा में अभी तक दो ही ओलिंपिक स्वर्ण पदक आए हैं. देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाया था अभिनव बिंद्रा ने वो भी निशानेबाजी में. आज यानी 28 सितंबर को उनका जन्मदिन है

 

बिंद्रा ने बीजिंग ओलिंपिक-2008 में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था और इतिहास रचा था. इसी के साथ वह ओलिंपिक खेलों में सिंगल इवेंट में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने थे

बिंद्रा के लिए ये सब आसान नहीं था. इसका एक कारण उनकी आंखें थीं. उनकी आंखें कमजोर थीं, बावजूद इसके वह पदक जीतने में सफल रहे थे. बिंद्रा ने खुद ये बात बताई थी

 

स्पोर्ट्सकीड़ा ने अपनी एक रिपोर्ट में बिंद्रा के हवाले से लिखा, “मैंने 2008 में खराब आंखों के बाद स्वर्ण पदक जीता था. मेरा विजन -3 और जीरो पेरीफेरल था. मैं जब चलता था तो मैं साइड में कुछ नहीं देख सकता था.मैं लोगों के पास से गुजर जाता था लेकिन उन्हें पहचान नहीं पाता था.”

 

बिंद्रा ने विश्व चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीता था. उन्होंने 2006 में ये कारनामा किया था और वह ऐसा करने वाले भारत के पहले निशानेबाज बने थे. इसके बाद हालांकि बिंद्रा इस चैंपियनशिप में दोबारा पदक नहीं जीत सके

 

बिंद्रा ने 2002 से लेकर 2014 तक हर राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे. 2010 एशियाई खेलों में वह रजत और 2014 एशियाई खेलों में दो कांस्य पदक जीतने में सफल रहे थे

 

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