बड़े धमाके की तैयारी में गौतम अडाणी, इस तरह एक झटके में कमाएंगे 20 हजार करोड़

भारतीय अरबपति गौतम अडाणी (Gautam Adani) की फ्लैगशिप फर्म अडाणी इंटरप्राइजेज लिमिटेड ने बुधवार को अपने फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) के लिए फ्लोर प्राइस को 20,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का ऐलान कर दिया है.

यह देश का अब तक सबसे बड़ा एफपीओ होगा. कंपनी ने 3,112 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के फ्लोर प्राइस पर फैसला किया है, जो 27 जनवरी को खुलेगा. सभी कैटेगरीज के निवेशकों के लिए ऑफर की कैप कीमत 3,276 रुपये प्रति शेयर तय की गई है.

अडाणी एंटरप्राइजेज ने प्रस्ताव के खुदरा हिस्से में बोली लगाने वाले रिटेल पर्सनल इंवेस्टर्स के लिए 64 रुपये प्रति एफपीओ इक्विटी शेयर की छूट को भी मंजूरी दी है. इस एफपीओ में ​मिनिमम लॉट 4 शेयरों का होगा. उसके बाद चार-चार शेयरों के लॉट में खरीदा जा सकेगा.

एक साल में 94 फीसदी का रिटर्न दे चुका है एईएल
Adani Enterprises ने नवंबर के एंड में फॉलो-ऑन शेयर सेल की घोषणा की थी. कुछ बैंकर्स ने कहा कि Adani Enterprises पार्टली पेड शेयर जारी कर एफपीओ में पैसा जुटा सकती है. मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि कंपनी एफपीओ में रिटेल इंवेस्टर्स को छूट दे सकती है. अडानी Adani Enterprises का स्टॉक पिछले एक साल में 94 फीसदी और पिछले पांच साल में 1,760 फीसदी चढ़ चुका है.

इन बैंकों को सौंपी गई है जिम्मेदारी
कंपनी को कथित तौर पर एफपीओ के लिए अपने कागजात दाखिल किए हुए सिर्फ एक दिन हुआ है, आधिकारिक तौर पर अधिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है. हालांकि, रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि Adani Enterprises ने जेफरीज, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, एसबीआई कैपिटल, बैंक ऑफ बड़ौदा कैपिटल, एलारा कैपियल और कुछ अन्य लोगों को इस इश्यू के लिए चीफ बैंकर के रूप में नियुक्त किया है.

कितनी कम हो जाएगी अडाणी की हि​स्सेदारी

एफपीओ के परिणामस्वरूप गौतम अडाणी के नेतृत्व वाले प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 3.5 फीसदी तक गिर सकती है. सितंबर 2022 तक, प्रमोटर्स के पास अडानी एंटरप्राइजेज का 72.63 फीसदी हिस्सा था, जबकि शेष 27.37 फीसदी सार्वजनिक शेयरधारकों के पास था. जीवन बीमा निगम के पास सार्वजनिक शेयरधारकों के बीच 4.03 फीसदी हिस्सेदारी थी, जबकि नोमुरा सिंगापुर, एपीएमएस इन्वेस्टमेंट फंड, एलारा इंडिया ऑपर्च्युनिटीज फंड और एलटीएस इन्वेस्टमेंट फंड के पास 1 फीसदी और 2 फीसदी के बीच हिस्सेदारी थी.