Sangameshwar Mahadev Temple: भगवान शिव का वह चमत्कारी मंदिर, जहां पूजा करने आता है नाग-नागिन का जोड़ा

Sangameshwar Mahadev Temple: भारत में भगवान शिव के वैसे तो लाखों मंदिर हैं, लेकिन इनमें से कई मंदिर ऐसे भी हैं, जहां रोज चमत्कार होता है। आज हम आपको ऐसे ही एक रहस्यमयी शिव मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जहां नाग-नागिन का एक जोड़ा शिव पूजा करने के लिए आता है। यह जोड़ा किसी को का’टता नहीं, न ही उन्हें लेकर लोगों में कोई डर है।

दरअसल, हरियाणा में कैथल जिले में पेहवा के नजदीक अरूणाय स्थित श्री संगमेश्वर महादेव मंदिर (Sangameshwar Mahadev Temple) नाग-नागिन के जोड़े के लिए मशहूर है। कहा जाता है कि यहां साल में एक बार नाग-नागिन का जोड़ा आता है और शिवलिंग की पूजा करके चला जाता है। इन्होंने आज तक किसी भी श्रद्धालु को नुकसान नहीं पहुंचाया।

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पुजारी के मुताबिक, नाग-नागिन का जोड़ा शिव प्रतिमा की परिक्रमा करता रहता है। पुराणों के अनुसार यहां भगवान शिव स्वंय लिंग रूप में प्रकट हुए थे, जो स्वंयभू लिंग के रूप में मुख्य मंदिर (Sangameshwar Mahadev Temple) में आज भी विराजमान हैं। इसलिए शिवरात्रि पर और सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं का तांता लगता है।

क्या है Sangameshwar Mahadev Temple की मान्यता

मान्यता है कि यहां शिवलिंग (Sangameshwar Mahadev Temple) पर जलाभिषेक व पूजन करवाने और यहां स्थित बेल वृक्ष पर धागा बांधने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मन्नत पूरी होने के बाद यहां पूजा करवाने व धागा खोलने के लिए श्रद्धालुओं को दोबारा आना पड़ता है। कहते हैं कि देवी सरस्वती ने श्राप मुक्ति के लिए की यहां शिव-आराधना की थी।

मंदिर की परिचय पुस्तिका के मुताबिक यहां दूध बिलोकर मक्खन नहीं निकाला जाता। यदि कोई प्रयास करता है तो दूध खराब होकर कीड़ों में बदल जाता है। मंदिर परिसर में खाट अर्थात चारपाई का प्रयोग नहीं किया जाता। यदि कोई व्यक्ति यहां अशुद्धि फैलाने का प्रयास करता है तो उसे दंड अवश्य मिलता है।

पूरा वर्ष यहां राजनीति व व्यापार से जुड़े लोगों का तांता लगा रहता है। चुनाव लड़ने से पूर्व बहुत से नेता यहां (Sangameshwar Mahadev Temple) मन्नत मांगते हैं और पूरी होने पर यहां पूजन व धागा खोलने के लिए आते हैं। मंदिर मनोविज्ञान का केंद्र भी है। मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति यहां जल चढ़ाते हैं और दिमाग को तनावमुक्त महसूस करते हैं।