Sawan 2020: सावन में भूलकर भी न करें ये गलतियां, भोलेनाथ हो जाएंगे क्रोधित

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Sawan 2020, श‍िव, भोलेनाथ
(Image Courtesy: Google)
New Delhi: सावन (Sawan Do And Dont) का महीना चातुर्मास के 4 महीनों में से एक होता है। इन दिनों भगवान विष्णु फिर शिवजी शयन के लिए चले जाते हैं। ऐसे में सृष्टि के संचालन का जिम्मा रुद्र के पास आ जाता है। रुद्र भगवान शिव का ही एक स्वरूप हैं लेकिन यह शिव का तामसिक स्वरूप हैं। यह जितनी जल्दी प्रसन्न होते हैं उतनी ही जल्दी क्रोधित भी हो जाते हैं।

ऐसे में रुद्र की प्रसन्नता के लिए सावन के महीने में खान-पान एवं जीवन शैली में कई बात (Sawan Do And Dont) का ध्यान रखना शास्त्रों के अनुसार शुभ कहा गया है।

सावन में खान-पान का ऐसे रखें ध्यान

सावन का महीना आध्यात्मिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना गया है। इस महीने को उपासना का महीना कहा गया है। इसलिए जरूरी है कि आपका खान-पान सात्विक और मानसिक बल प्रदान करने वाला हो। आपकी एकाग्रता भी बनी रहे इस बात का भी खान-पान में ध्यान रखना चाहिए। इस बात का ध्यान रखते हुए सावन के महीने में गरिष्ठ भोजन से परहेज रखना चाहिए, सावन के महीने में बरसात की वजह से कीड़े, मकोड़े भी अधिक हो जाते हैं ऐसे में साग से परहेज रखना चाहिए।

सावन में मांस मदिर का सेवन

सावन का महीना भगवान रुद्र को समर्पित है। ऐसे में रुद्र की प्रसन्नता के लिए इस महीन में मांस, मछली मदिरा का सेवन भी नहीं करना चाहिए ऐसा शास्त्रों का मत है। इन दिनो में नदियों में बाढ आने की वजह से भी मछलियों को खाना सेहते के लिए प्रतिकूल माना गया है। पद्मपुराण में कहा गया है कि भगवान विष्णु इन दिनों जल में शयन करते हैं ऐसे में जलजीवों को हानि नहीं पहुंचाना चाहिए। धार्मिक कारणों के अलावा वैज्ञानिक दृष्टि से भी इन दिनों तामसिक भोजन जैसे मांस-मदिरा का सेवन हानिकारक होता है, क्योंकि इस समय शरीर की पाचन क्षमता भी घट जाती है।

सावन में दूध का सेवन कितना सही

सावन के महीने में भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक किया जाता है। इस समय में जल तत्व की वृद्धि के कारण दूध पीना सेहत के लिए हानिकारक माना गया है। इस समय में दूध पीने से पेट में कृमि बढ़ने की बात भी बड़े बुजुर्ग कहते आए हैं। यही वजह है कि इन दिनों में दूध सेवन की बजाय दूध से शिवजी का अभिषेक करने की प्राचीन परंपरा रही है।

सावन में बैंगन खाना कितना सही

धार्मिक दृष्टि से बैंगन को अशुद्ध माना गया है। इसलिए व्रत त्योहार के अवसर पर बैंगन खाना माना किया गया है। सावन भी आध्यात्मिक माह है, इशलिए सावन में भी बैंगन खाना धार्मिक दृष्टि से अच्छा नहीं माना गया है। वैसे इन दिनों भगवान शिव को बैंगन भेंट करना अच्छा माना गया है। इससे अशुभ ग्रहों का दोष दूर होता है।

शिवभक्‍तों का ना करें अपमान

सावन का महीना शिवजी को प्रिय होता है और शिवभक्‍त पूरे महीने अपने भोले को प्रसन्‍न करने के लिए कांवड़ उठाए गंगा की ओर चल पड़ते हैं। गंगा से जल भरकर कांवड़‍िए अपने आराध्‍य देवता शिवजी का जलाभिषेक करते हैं। इतना पुण्‍य कार्य करने वाले कांवड़ियों का अपमान नहीं करना चाहिए। बल्कि जहां तक हो सके उनकी सेवा करनी चाहिए। कांवड़ियों को और शिव भक्ति में शामिल लोगों को सावन में शिव के गण के रूप में माना जाता है।

सावन में शिवजी का जलाभिषेक

केवल सावन के सोमवार ही नहीं बल्कि रोजाना शिवलिंग पर जलाभिषेक करना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से कई जन्‍मों के पाप धुल जाते हैं। प्रयास यह करना चाहिए कि आप सूर्योदय ये पहले उठकर जलाभिषेक करें। ब्रह्म मुहूर्त में भगवान शिव का जलाभिषेक करने का शास्‍त्रों में खास महत्‍व बताया गया है।

पति-पत्‍नी को नहीं करना चाहिए ऐसा

वैसे तो पति-पत्‍नी को कभी भी लड़ाई नहीं करनी चाहिए और एक-दूसरे को अपशब्‍द नहीं बोलने चाहिए। सावन के महीने में इस बात का खास ख्‍याल रखना चाहिए कि यह महीना दांपत्‍य जीवन में मधुरता बढ़ाने का होता है, न कि कलह बढ़ाने का। क्योंकि इसी महीने में देवी पार्वती ने तपस्या करके शिवजी को पति रूप में प्राप्त किया था। इसलिए जब आपको लगे कि आप लोगों के बीच बिना बात के लड़ाई हो रही है तो शिव-पार्वती का ध्‍यान करना शुरू कर दें। ऐसा करने से मन को शांति मिलने के साथ ही प्रेम में इजाफा होगा।

सावन में चंद्रमा की पूजा

सावन के महीने में चंद्रमा की पूजा का भी खास महत्‍व बताया गया है। सावन के महीने का संबंध श्रावण नक्षत्र से है, और श्रावण नक्षत्र का स्‍वामी चंद्र को माना गया है और चंद्रमा शिवजी की शीश पर शोभायमान है। जब सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करते हैं, तो सावन का आरंभ होता है। गर्म सूर्य पर चंद्रमा की शीतलता सृष्टि में नवजीवन का संचार करती है। इसलिए सूर्य के कर्क राशि में आने से वर्षा भी खूब होती है। जिससे विष को ग्रहण करने वाले महादेव को ठंडक मिलती है। यही वजह से सावन में चंद्रमा की पूजा करने से शिवजी भी प्रसन्‍न होते हैं।

द्वार पर आए नंदी

नंदी को भगवान शिव का गण माना जाता है। इस हिसाब से नंदी की पूजा की जाती है। सावन के महीने में आपके द्वार पर नंदी यानी बैल आए तो इसे भगाना नहीं चाहिए। बल्कि सम्‍मानपूर्वक उसे कुछ खाने को हरा चारा देना चाहिए। आपकी इस सच्‍चे सेवाभाव को देखकर भोलेबाबा प्रसन्‍न होते हैं। वहीं सावन के महीने में बुजुर्गों का भूलकर भी अपमान नहीं करना चाहिए।