ये किसान पानी में नहीं, खेत में उगा रहे हैं सिंघाड़ा, इस काम के लिए सरकार से मिल चुका है पद्मश्री अवॉर्ड

by Waqar Panjtan

 

आधुनिकता के दौर में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिये फसल विविधीकरण(Crop Diversification) का मंत्र दिया जाता है, जिससे कम संसाधनों में खेती करके किसानों की आमदनी को बढ़ाया जा सके. फसल विविधीकरण के साथ नई तकनीक ईजाद करके कई किसान दूसरे किसानों के लिये प्रेरणास्रोत बन चुके हैं.

 

हम बात करें उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के रहने वाले सफल किसान सेठपाल सिंह (Sethpal Singh) के बारे में, जिन्होंने अपनी डिग्री और अपनी समझ का सही इस्तेमाल करके फसल विविधीकरण पर काम किया और खेत में सिंघाड़ा(Water Chestnut Farming in Soil) उगाने की तकनीक भी ईजाद की.

आज सेठपाल सिंह अपने खेत में परंपरागत फसलों के साथ सब्जियों(Vegetable Farming) और फलों (Fruit Gardening) की सह-फसली खेती (Co-Croping) करके दूसरे किसानों के लिये मिसाल बन चुके हैं.

BSc Agriculture से शुरु हुआ सफर
आज के समय में ज्यादा लोग पढ़ाई-लिखाई के बाद डिग्रियां हासिल करके बड़े शहरों में नौकरी करने चले जाते हैं, लेकिन सेठपाल सिंह को ये मंजूर नहीं था. साल 1987 में खेती में ग्रेजुएशेन करने के बाद सेठपाल सिंह अपने गांव नंदीफिरोजपुर में 15 हेक्टेयर जमीन पर दूसरे किसानों की तरह गन्ना, गेहूं और धान की खेती करने लगे.

कुछ समय बाद उन्होंने फसल विविधीकरण पर काम करना शुरु किया और बेहतर आमदनी के लिये परंपरागत खेती के साथ सब्जियों की खेती और फलों की बागवानी भी करने लगे. इसी दौरान सेठपाल सिंह ने पशुपालन, मछली पालन और मशरूम की यूनिट लगाई. समय के साथ सेठपाल सिंह की आमदनी बढ़ने लगी, और ये खेती की नई तकनीकों पर काम करने लगे.

 

खेत में उगाते हैं सिंघाड़ा
अभी तक सिंघाड़ा तालाबों में उगता था, लेकिन सेठपाल सिंह की खेती को लेकर नई सोच और कृषि वैज्ञानिकों की सहायता से इन्होंने खेत में सिंघाड़ा की खेती शुरु की. सिंघाड़े की खेती के लिये सबसे पहले खेत की मिट्टी की जांच कराते हैं और जरूरत के हिसाब से खाद-बीज और उर्वरकों का इस्तेमाल करते हैं. सेठपाल सिंह खेतों में मेड़ बनाकर साफ पानी भरते हैं, और सिंघाड़े के साथ कमल और कमल ककड़ी की खेती करते हैं. जून के महीने में बुवाई करने के बाद सितंबर तक सिंघाड़े के फल मिल जाते हैं. इनके खेत से निकले सिंघाड़े और कमल के फूलों की अच्छी क्वालिटी के कारण बाजार में फल और फूल अधिक दाम पर बिकते हैं. इतना ही नहीं, सिंघाड़े के खेत से निकले कचरे की जैविक खाद बनाकर वापस खेतों में ही इस्तेमाल किया जाता है. 

फसल विविधिकरण
सफल किसान सेठपाल सिंह के पास 15 हेक्टेयर जमीन है, जिसमें 5 हेक्टेयर खेत में मौसम (Weather Based Crop) के हिसाब से गन्ना, गेहूं और धान की खेती करते हैं. इसके अलावा, 10 हेक्टेयर जमीन पर सब्जियों की खेती, फलों की बागवानी,(Horticulture) सिंघाड़े की खेती (Water Chestnut farming) और तालाब में मछली पालन (Fish Farming) किया जाता है.

कम संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन और नई तकनीकों(Farming Techniques) का प्रयोग करने के कौशल से आज लाखों किसान सेठपाल सिंह से प्रेरणा ले रहे हैं. उनकी इसी प्रतिभा को तलाशकर सरकार ने साल 2022 में सेठपाल सिंह को पद्मश्री पुरस्कार(Padma Shri Award in Agriculture) से नवाज़ा है.

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