Haj 2020: कड़ी सुरक्षा के बीच माउंट अराफात में हज यात्रियों ने की इबादत, इस साल गायब है लाखों की भीड़

Haj 2020: कोरोना वायरस महामारी के बीच इस बार बहुत ही कम भीड़ और ढेर सारी पाबंदियों के साथ मुस्लिमों की सलाना हज यात्रा बुधवार से शुरू हो चुकी है। पिछले कई सालों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब इतनी कम संख्या और कड़ी सुरक्षा के बीच हज यात्रा जारी है।

गुरुवार को हज यात्रा के दूसरे दिन हज यात्री मास्क पहने माउंट अराफात पहुंचे। वहीं दूसरी तरफ पूरे मक्का शहर के साथ साथ पूरी पहाड़ी में कड़ी सुरक्षा का बंदोबस्त किया गया है।

पूरी तरह बदला हुआ है नजारा

कोरोना संक्रमण की वजह से सऊदी प्रशासन ने भले ही यात्रा की इजाजत दी है, लेकिन सुरक्षा और नियम बेहद कड़े हैं। प्रशासन यहां सोशल डिस्टेंसिंग का कड़ाई से पालन करवा रहा है और साथ ही साथ लोग मास्क पहने हैं या नहीं, इसका भी खास ध्यान रखा जा रहा है।

स्थानीय टीवी में प्रसारित वीडियो में भी साफ देखा जा सकता है कि लोग किस तरह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए इबादत कर रहे हैं। पुरुष और महिलाएं सभी मास्क पहने हुए नमीरा मस्जिद में इबादत करते दिखे।

प्रशासन ने किए हैं तमाम इंतजाम

वहीं हज यात्रियों को गर्मी से बचाने के लिए भी प्रशासन की तरफ से इंतजाम किए हैं। मांउट अराफात पर यात्रियों पर जगह-जगह पानी का छिड़काव किया जा रहा है, ताकि वह उस जगह तक आराम से पहुंचे जहां पैगंबर हज़रत मोहम्मद ने विदाई उपदेश दिया था।

इस साल यात्रा में शामिल होने वाले लोग भी खुद को खुशनसीब मान रहे हैं। सऊदी के रहने वाले वेदान अल्वाह कहते हैं कि मैं बहुत ही खुशकिस्मत हूं, कि मुझे लाखों लोगों में से इस साल हज यात्रा के लिए चुना गया। यह मेरे लिए सपना पूरा होने जैसा है।

यात्रियों का रखा जा ख्याल

इससे पहले मीना से हज यात्रियों को बसों के जरिए लाया गया और नमीरा मस्जिद में एंट्री से पहले उनके शरीर का तापमान जांचा गया। इसके बाद यात्री मस्जिद में धर्मोपदेश कार्यक्रम में शामिल हुए।

माउंट अराफात पर शाम की इबाबत के बाद हज यात्री मुजदलफा के लिए रवाना हुए। मुजदलफा मुस्लिमों का एक और पवित्र स्थान है, जहां हज यात्री रात को विश्राम करते हैं और हज यात्रा के आखिरी पड़ाव की तरफ निकल पड़ते हैं। वहीं शुक्रवार को शैतान को पत्थर मारने की रस्म के साथ ईद अल अदहा की शुरुआत हुई।

सिर्फ सऊदी नागरिक ही कर सकते हैं हज

हज को इस्लाम का पांचवां स्तम्भ माना जाता है। प्रत्येक मुसलमान जो हज करने में सक्षम होता है वह अपने जीवन में एक बार हज करने जरूर जाता है। अल जजीरा के अनुसार, 10 हजार लोग जो पहले से ही सऊदी अरब में रह रहे हैं वही इस साल के पांच दिवसीय हज में भाग लेंगे। पिछले साल यहां करीब 25 लाख लोग हज करने पहुंचे थे।

काबा को छूने और चूमने पर पाबंदी

इस बार मक्का में अंतरराष्ट्रीय हजयात्रियों पर पाबंदी लगी है। पिछले सालों की हज यात्रा को देखेंगे तो पाएंगे कि हजारों लोग काबा के आसपास नजर आया करते थे। काबा मक्का की सबसे बड़ी और पवित्र मस्जिद के बिल्कुल बीच में स्थिति है। इस बार कुछ लोगों को एक बार में काबा तक जाने की अनुमति दी गई है। कोरोना से पहले हजयात्री काबा को छुआ करते थे और चूमा करते थे। लेकिन कोरोना काल में इस बार काबा को छूने व उसे चूमने पर पाबंदी लगा दी गई है।

स्वास्थ्य परीक्षण के बाद ही मिल रही एंट्री

पांच दिवसीय हज यात्रा के दौरान पवित्र मक्का शहर पहुंचने के बाद हज यात्री माउंट अराफात की तरफ रवाना हुए। इस दौरान उन्होंने मीना शहर में रात्रि विश्राम भी किया।

जिन लोगों को इस साल हत्र करने के लिए चुना गया है उनके काबा पहुंचने से पहले कुछ दिन क्वारंटाइन पर रखा गया है। उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है। इसके बाद ही बुधवार को उन्हें मक्का की मुख्य मस्जिद में हज के लिए प्रवेश दिया गया।

सऊदी सरकार ने किए खास बंदोबस्त

सऊदी अरब की मीडिया ने दिखाया है कि यहां सफाईकर्मी लगातार मस्जिद को सैनिटाइज कर रहे हैं। प्रशासन ने प्रत्येक हजयात्री पर निगाह रखने के लिए उसे इलेक्ट्रॉनिक बैंड पहनाया है और उनके समान में भी इलेट्रॉनिक बैंड लगाया है जिससे कि पता लगाया जा सके कि वह कब-कहां जा रहे हैं।

इस बार काबा को हाथ से छूने व उसे चूमने पर पाबंदी लगा दी गई है। साथ हजयात्रियों को हर हाल में 1.5 मीटर की दूरी बनाकर रहने को कहा गया है। मक्का के अधिकारियों अनुसार, इस बार हजयात्रा में भाग लेने वाले 70 फीसदी वे विदेशी हैं जो यहां पहले से ही रह रहे हैं।

सऊदी सरकार कर रही हज यात्रियों की मदद

आमतौर पर हज यात्रा में हर साल हज यात्रियों को काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। लेकिन इस बार सऊदी सरकार सभी यात्रियों की मदद कर रही है। उनके खाने, रहने, यात्रा और स्वास्थ्य का पूरा खर्च सऊदी सरकार द्वारा उठाया जा रहा है।