राम मंदिर के साथ इस मुस्लिम देश में बन रहा PM मोदी के सपनों का मंदिर,हिंदू धर्म का लहराएगा परचम

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PM Modi UAE Hindu Temple
(Image Courtesy: Google)

नई दिल्ली। 492 सालों के इंतजार के बाद आखिरकार राम मंदिर के निर्माण की शुभ घड़ी आ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अयोध्या राम मंदिर का शिलान्यास किया। भारत के इतिहास पर नजर डाली जाए तो राम मंदिर के लिए लाखों कारसेवकों ने अपना जीवन दे दिया है।

अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर पीएम मोदी के साथ देशवासियों का सपना रहा है। राम मंदिर का निर्माण शुरू होने से पूरे देश में दिवाली सा माहौल है। पीएम मोदी की मेहनत का ही नतीजा है कि राम मंदिर के साथ मुस्लिम देश में एक भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है। ये दोनों ही मंदिर पीएम मोदी का सपना रहे हैं।

सबसे खास बात ये है कि आबू धाबी में बन रहा पहला हिंदू मंदिर, अयोध्या के राम मंदिर से पहले ही शुरू हो जाएगा। तो चलिए जानते हैं उस मंदिर के बारे में जो मुस्लिम देश में पीएम मोदी का सपना रहा है।

आबू धाबी में बन रहा मंदिर

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबू धाबी में पहले हिंदू मंदिर (Abu Dhabi First Hindu Temple) का निर्माण कार्य चल रहा है। कोरोना संकट से पहले इसी साल यहां एक महत्वपूर्ण पड़ाव को पार कर लिया गया। मंदिर की नींव को पहली बार कंकरीट से भरने का काम पूरा किया जा चुका है। मंदिर निर्माण में ईको-फ्रेंडली तरीके पर जोर दिया जा रहा है।

PM मोदी ने 2018 में रखी थी आधार शिला

पीएम नरेंद्र मोदी ने 2018 में दुबई के दौरे पर वहां के ओपेरा हाउस से विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्‍तम स्वामीनारायण संस्‍था (बीएपीएस) मंदिर (Abu Dhabi First Hindu Temple) की आधारशिला रखी थी।

कोरोना संकट की वजह से मंदिर के निर्माण कार्य में देरी जरूर हुई है, लेकिन निर्माण कार्य एक बार फिर शुरू हो चुका है। वैसे तो यह मंदिर इस साल के अंत तक तैयार होना था, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि अगले साल यह मंदिर यूएई में रहने वाले हिंदुओं के लिए खोल दिया जाएगा।

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, मंदिर के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों को इसी साल के अंत तक श्रद्धालुओं के लिए खोला जाना था। जबकि मंदिर के सभी हिस्सों पर श्रद्धालुओं की एंट्री 2022 तक प्रस्तावित थी। हालांकि, इस साल कोरोना वायरस की वजह से मंदिर के निर्माण में देरी हुई।

कितना बड़ा होगा मंदिर

यूएई सरकार ने अबू धाबी में श्री स्वामी नारायण मंदिर (Abu Dhabi First Hindu Temple) बनाने के लिए 20,000 वर्ग मीटर जमीन दी थी। साल 2015 में जब प्रधानमंत्री मोदी दो दिवसीय दौरे पर UAE गए थे, तब वहां की सरकार ने इस मंदिर के निर्माण का ऐलान किया था। यह मंदिर अबू धाबी में ‘अल वाकबा’ नाम की जगह पर 20,000 वर्ग मीटर की ज़मीन में बनाया जा रहा है। हाइवे से सटा अल वाकबा अबू धाबी से तकरीबन 30 मिनट की दूरी पर है।

श्री स्वामीनाराणय मंदिर होगा नाम

अबु धाबी में बन रहे इस मंदिर (Abu Dhabi First Hindu Temple) के निर्माण का कार्य हाल ही में शुरू हुआ है। यह मंदिर पूरी तरह पत्थरों को तराश का अक्षरधाम मंदिर की तर्ज पर बनाया जा रहा है। हालांकि, आकार में यह दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर से छोटा होगा। हाल ही में मंदिर की नींव को कंकरीट से भरने का काम पूरा कर लिया गया है। मंदिर निर्माण में ईको-फ्रेंडली तरीके पर जोर दिया जा रहा है।

भारतीय कारोबारी ने छेड़ी थी मुहिम

मंदिर को बनाने की मुहिम छेड़ने वाले भारतीय कारोबारी बीआर शेट्टी हैं। वो ‘यूएई एक्सचेंज’ नाम की कंपनी के एमडी और सीईओ हैं। वैसे तो मंदिर साल 2017 के आख़िर तक बन कर तैयार हो जाना था, लेकिन कुछ वजहों से देरी हो गई।

कौन-कौन से देवी-देवता होंगे?

इस मंदिर में भगवान कृष्ण, शिव और अयप्पा (विष्णु) की मूर्तियां होंगी। अयप्पा को विष्णु का एक अवतार माना जाता है और दक्षिण भारत ख़ासकर केरल में इनकी पूजा होती है। यह मंदिर बेहद शानदार और बड़ा होगा। इसमें एक छोटा ‘वृंदावन’ यानी बगीचा और फव्वारा भी होगा।

हालांकि, दुबई में दो मंदिर (शिव और कृष्ण के) और एक गुरुद्वारा पहले से हैं। अबू धाबी में चर्च ज़रूर हैं, लेकिन कोई मंदिर नहीं हैं। भारतीय दूतावास के आंकड़ों के मुताबिक यूएई में तकरीबन 26 लाख भारतीय रहते हैं जो वहां की आबादी का लगभग 30% हिस्सा है।

भारत के लिए अहम है यूएई

यूएई कुछ साल पहले तक भारत का सब से बड़ा व्यापारिक साझेदार था। अब भी चीन और अमेरिका के बाद ये तीसरे स्थान पर है। कच्चे तेल और ऊर्जा के क्षेत्र में यूएई भारत का एक महत्वपूर्ण पार्टनर है। भारत को गैस और तेल की ज़रूरत है और यूएई इसका एक बड़ा आपूर्तिकर्ता है और इससे भी बड़ा भागीदार बनने की क्षमता रखता है।