योगी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने वालों से वसूली वाला कानून पास

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Yogi CAA protest
(Image Courtesy: Google)

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार ने पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने वालों से वसूली वाले कानून को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां संपत्ति क्षति दावा अधिकरण बनाया गया है।

योगी सरकार द्वारा गठित प्रॉपर्टी डैमेज क्लेम ट्रिब्यूनल (पीडीसीटी) में वह लोग क्लेम करेंगे, जिनकी संपत्तियों का नुकसार किसी उपद्रव के दौरान हुआ हो।

देश का पहला संपत्ति क्षति दावा अधिकरण

योगी सरकार ने संपत्ति क्षति दावा अधिकरण (Property Damage Claims Tribunal) को सिविल कोर्ट जैसी सारी शक्तियां सौंपी हैं। अधिकरण का फैसला आखिरी माना जाएगा, जिसके खिलाफ कहीं अपील नहीं हो सकेगी।

सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश पीडीसीटी अध्यक्ष होंगे, संबंधित मंडल के अपर आयुक्त इसके सदस्य रहेंगे। फिलहाल लखनऊ और मेरठ में ट्रिब्यूनल होगा। लखनऊ में 12 मंडलों और मेरठ में 6 मंडलों की वसूली होगी। भरपाई के लिए नुकसान के तीन महीने के अंदर क्लेम करना होगा। फिर मुकदमे के बाद चार्जशीट के आधार पर ट्रिब्यूनल वसूली की कार्रवाई करेगा।

सीएए विरोध के बाद लिया था फैसला

बता दें कि योगी सरकार ने सीएए (संशोधित नागरिकता कानून) के हिं;स’क विरोध के बाद उप;द्र’वियों के खिलाफ पोस्टर लगाकर नुकसान की वसूली शुरू की थी। अब यह ट्रिब्यूनल तेजी से इस काम को करेगा।

मौजूदा समय की बात करें तो सरकारी संपत्तियों को हुए नुकसान की ज्यादातर वसूली हो चुकी है, अब निजी संपत्तियों के नुकसान का भी मुआवजा दं;गा’इयों से लेने का काम किया जाएगा। दं’गा’इयों से ही नुकसान की भरपाई का यह फॉर्मूला बाकी जगहों पर भी अपनाया जा रहा है। रेलवे के बाद कर्नाटक ने भी इसे अपनाया है।