वरुण गांधी का योगी सरकार पर निशाना, बोले- यूपी की कानून व्‍यवस्‍था पहले से बेहतर नहीं

नई दिल्ली: तीन बार के भाजपा सांसद वरुण गांधी (Varun Gandhi) ने हाल के दिनों में पार्टी की विचारधाराओं से अलग कई मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात कही। उन्होंने तीन कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी को कानूनी दर्जा देने की मांग की तो उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था पर योगी आदित्यनाथ सरकार की आलोचना भी की।

वरुण गांधी (Varun Gandhi) ने कहा, जब ब्रह्मांड का रवैया न्याय की ओर झुकता है तो मैं हमेशा आभारी होता हूं। इसलिए, यहां निंदा करने की बजाया मैं आभार प्रकट करना चाहूंगा। यह एक परिपक्व फैसला था। लेकिन मुझे लगता है कि यह पहले किया जाना चाहिए था। 700 लोगों की मौत हो गई। मुझे लगता है कि भविष्य के लिए सबक यह है कि कानून पारित करने से पहले, अधिक विचार-विमर्श होना चाहिए और जिनके लिए यह है, उनसे भी परामर्श ली जानी चाहिए, ताकि ऐसी गलतियां न हों।

वरुण गांधी (Varun Gandhi) ने कहा, मुझे ऐसा लगता है क‍ि इसके पीछे ए‍क नहीं, कई कारण होंगे। किसी भी राजनेता के लिए राजनीतिक लाभ हमेशा एक कारण होता है। लेकिन मुझे लगता है कि उन्होंने एक राजनेता और एक राजनीतिज्ञ के रूप में निर्णय लिया है।

उन्होंने आगे कहा, हमें एक संस्थागत और लागू करने योग्य तंत्र की आवश्यकता है। जहां कागज पर 23 फसलों के लिए एमएसपी है जबक‍ि यह केवल 3-4 फसलों के लिए प्रभावी है। फसल बिक्री में परेशानी के साथ-साथ मूल्य में उतार-चढ़ाव होता रहता है, इसलिए हमें जो चाहिए वह एक कानूनी गारंटी। इससे फसल विविधीकरण होगा। अन्य फसलों की लागत गेहूं और धान की तुलना में कम है। ऐसा नहीं है कि किसान दूसरी फसल नहीं बोना चाहते। बात सिर्फ इतनी है कि उन्हें डर है कि कोई उन्हें सही कीमत पर नहीं खरीदेगा। यह पर्यावरण के लिए बेहतर होगा। यह पानी के स्‍तर के लिए भी बेहतर होगा।

उन्होंने आगे कहा, मैं कहूंगा कि चुनाव उम्मीद और परिवर्तनकारी बदलाव पर जीते जाते हैं। मेरा मानना है कि अगर किसानों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए फैसले लिए जाए तो देर-सवेर वे अपने वोटों के साथ प्रतिक्रिया देंगे। हालांकि आंदोलन सामाजिक-राजनीतिक का बहुत मजबूत आधार था। जब एक उन पर ध्‍यान नहीं देता, उन्हें संबोधित नहीं करता है तो क्रोध नाराजगी व्‍यक्‍त करने का दूसरा तरीका खोज लेगा।

उन्होंने आगे कहा, मेरे पास अजय मिश्रा के खिलाफ कुछ भी व्यक्तिगत नहीं है। धारा 120-बी (आईपीसी) के तहत उनका नाम एफआईआर में है और कहा गया है कि किसानों को भड़काने में उनकी भूमिका थी। ये न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध है। गृह राज्य मंत्री या वे खेल राज्य मंत्री होते, तब भी मैं शायद यही सवाल पूछता। क्‍या शीर्ष पर बैठकर निष्पक्ष जांच हो सकती है?

उन्होंने आगे कहा, मैं सरकार की भलाई की कामना करता हूं और मेरा मानना है कि मुख्यमंत्री एक नेक इरादे वाले व्यक्ति हैं। यूपी चुनाव ने ऐतिहासिक जनादेश दिया। यह जनादेश परिवर्तन के लिए था। जब कोई तुलना करता है तो … यूपी के एनसीआरबी अपराध आंकड़े 2016 से 2020 तक- 2020 में सबसे ज्यादा अपराध यूपी में हैं, सबसे ज्यादा हत्या, अपहरण और अपहरण, दहेज निषेध पर मामलों की संख्या, एससी/ राज्य में एसटी, एनडीपीएस हैं। धारा 354 के तहत सबसे ज्यादा यौन उत्पीड़न के मामले इसी प्रदेश में हैं।

जब हम इन आँकड़ों को देखते हैं तो हमें यह सोचना बंद कर देना चाहिए एक तरह का जबरदस्त सुधार हुआ है जिसकी कल्पना सरकार ने सत्ता संभालने के समय की थी।

वरुण गांधी ने कहा, खीरी, कानपुर या हाथरस की घटना को देखते हैं तो यह बचाकाना लगाता है। हां, ऐसे उदाहरण हैं जो राज्य की छवि के लिए हानिकारक रहे हैं और कुछ काम ऐसे भी हुए हैं जिनमें मैं आसानी से कह सकता हूं कि वे पहले की तुलना में सुधरे हैं।

वरुण गांधी ने कहा, मैंने जिन मुद्दों को उठाया है वे राष्ट्रीय महत्व के हैं, चाहे वह किसानों का मुद्दा हो, कानून व्यवस्था, बेरोजगारी, छोटे व्यापारी- ये सभ्यतागत मुद्दे नहीं हैं जो एक भारतीय को दूसरे के खिलाफ खड़ा करते हैं। शिक्षक पात्रता परीक्षा की परीक्षा रद्द कर दी गई है। मैंने बहुत मंथन करने के बाद महसूस किया कि पिछले दो वर्षों में ऐसी 17 परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। दो साल में 17 परीक्षा के पेपर कैसे लीक हो सकते हैं और कोई बड़ी मछली नहीं पकड़ी जा सकती? जाहिर है इसके पीछे माफिया का हाथ है। जिन मुद्दों को मैंने उठाया है, मैं कभी भी व्यक्तिगत, टकराव वाला नहीं रहा हूं। अगर मैं ऐसा नहीं करता तो क्या मैं राजनीति में सिर्फ संसद में बैठने के लिए आया, या फिर बस अपने नाम के आगे सांसद लिखने और अपनी गाड़ी पर स्टीकर लगाने के लिए।

वरुण गांधी ने कहा, अगर मैं पार्टी पर हमला करने के लिए हथियार या छड़ी का इस्तेमाल करता, या मैं व्यक्तिगत होता और अपशब्दों का इस्तेमाल करता, तब यह निश्चित ही सीमा को पार कर रहा होता। लेकिन मेरा मानना है कि एक लोक सेवक के रूप में न केवल मेरी स्थिति बल्कि एक राजनीतिक संगठन के सदस्य के रूप में मेरी स्थिति को ध्यान में रखते हुए राष्ट्र निर्माण की दिशा में सीमाओं को आगे बढ़ाते रहना चाहिए।

वरुण गांधी ने कहा, मैं और मेरी मां दोनों यूपी से सांसद हैं। 1952 के बाद से एक भी चुनाव नहीं हुआ है जिसमें मेरे परिवार के कई सदस्यों ने संसद में राज्य का प्रतिनिधित्व नहीं किया है। वर्तमान में तीन सदस्य हैं, पिछली बार चार थे। राज्य के साथ हमारे गहरे संबंध हैं और हम हमेशा राज्य की सेवा करते रहेंगे जो भी हम कर सकते हैं।