अमेरिका ने चीन को दिया एक और झटका, ‘PLA समर्थक’ 24 कंपनियों को किया बैन

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(Image Courtesy: Google)
New Delhi: चीन और अमेरिका के बीच जारी विवा’द (US China Issue) और गहराता ही जा रहा है। साउथ चाइना सी, हॉन्ग कॉन्ग और ताइवान मुद्दे पर आमने सामने खड़े दोनों देश अब फिर व्यापार यु’द्ध की तरफ बढ़ रहे हैं।

अमेरिका ने चीन की 24 कंपनियों (Us Ban Chinese Companies) उस सूची में डाल दिया है जो चीन की सेना की मदद करती हैं। जिसके बाद ये कंपनियां अमेरिका में अपना बिजनेस नहीं कर पाएंगी। इसके अलावा इन कंपनियों और इनसे जुड़े लोगों के खिलाफ कड़ी जांच भी की जाएगी।

चीनी सेना को मदद करने का आरोप

अमेरिका ने आ’रोप लगाया है कि ये कंपनियां साउथ चाइना सी (South China Sea) में ऑर्टिफिशियल द्वीप बनाकर उसके सैन्य अड्डा (Army Base) बनाने में सहायता करती हैं। अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में द्वीपों के निर्माण को लेकर चीन की कई बार आलोचना भी हो चुकी है। इसके अलावा समुद्री मामलों की ट्रिब्यूनल ने चीन के खिलाफ भी फैसला दिया था।

चीन ने कृत्रिम द्वीपों को बनाया ‘सैन्‍य किला’

बता दें कि सुबी रीफ स्‍पार्टले द्वीप समूह का हिस्‍सा है और इस पर चीन का नियंत्रण है। हालांकि वियतनाम, फ‍िल‍िपीन्‍स और ताइवान पर सूबी रीफ पर अपना दावा जताते रहे हैं। चीन ने अब साउथ चाइना सी में कई कृत्रिम द्वीप बना लिए हैं और वहां पर उसने बड़े पैमाने पर यु’द्धपोत, फाइ”टर जेट और हथियार तैनात किए हैं।

पीपल्‍स डेली की ओर से जारी वीडियो फुटेज में द‍िखाया गया है कि चीनी फा’इटर जेट अज्ञात फाइ’टर जेट का पीछा कर रहे हैं और कह रहे हैं कि इस इलाके से चले जाओ अन्‍यथा आपको मा’र गिराया जाएगा।

साउथ चाइना सी में चीन का इन देशों से विवा’द

साउथ चाइना सी के 90 फीसदी हिस्से पर चीन अपना दावा करता है। इस समुद्र को लेकर उसका फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई और वियतनाम के साथ विवा’द है। वहीं, पूर्वी चाइना सी में जापान के साथ चीन का द्वीपों को लेकर विवा’द चरम पर है। हाल में ही अमेरिका ने साउथ चाइना सी पर चीन के दावे को खारिज कर दिया था।

क्या है साउथ चाइना सी पर कलह?

दक्षिण चीन सागर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण है। यहां दुनिया का सबसे महंगा शिपिंग लेन है। हर साल इस रास्ते से 3.4 ट्रिलियन पाउंड का व्यापार होता है। ब्रिटेन का 12 प्रतिशत समुद्री व्यापार यानी 97 अरब डॉलर का निर्यात-आयात इसी क्षेत्र से होता है।

इस क्षेत्र पर विवा’द 1947 से ही है जब 1945 में जापान द्वारा सरेंडर करने के बाद चीन ने ‘नाइन-डैश’लाइन खींच दी थी। यानी कि दक्षिण चीन सागर के 90 फीसदी हिस्से पर इसने कब्जा कर उसपर अपना दावा ठोक दिया था। इससे दूसरे देशों में नाराजगी फैल गई थी और शिकायत संयुक्त राष्ट्र तक चली गई थी।