तितली योगासन: इस योग के जबरदस्त फायदे, 55 की उम्र में भी होगा ये बड़ा फायदा

योग ऐसी विद्या है जिससे गंभीर से गंभीर रोग को ठीक किया जा सकता है. लेकिन इसका अच्छा परिणाम तभी मिलता है जब आप इसे नियमित रूप से करें. योगासन करने से ब्लड शुगर, बीपा, हार्ट, ब्रेन सबकुछ दुरुस्त रहता है.

यहां तक कि इससे दिमाग में नकारात्मक विचार भी नहीं आते हैं. आप दिन भर ऊर्जावान महसूस करते हैं. आज इस लेख में हम आपको बताएंगे पुरुषों (butterfly yogasan for male) के लिए बटरफ्लाई योग करने से क्या होता है.

यह आसन पुरुषों की प्रजनन क्षमता को मजबूत बनाता है. इस पोज को करने से आपके शरीर का ब्लड सर्कुलेशन (blood circulation) अच्छा होता है, आपकी फर्टिलिटी के लिए अच्छा माना जाता है. बटरफ्लाई योगासन (butterfly yoga) महिला एवं पुरुष दोनों को करना चाहिए.

– तितली आसन (titli asan) करने से आपकी अंदरूनी मांसपेशियां मजबूत बनी रहेगी. इस आसन को करने से जांघों की मांसपेशियों में होने वाले खिंचाव से राहत मिलती है. वहीं, यह घुटनों में होने वाले दर्द से भी राहत दिलाता है.

– पुरुषों को अगर थकान (tired) और कमजोरी (weakness) जैसी समस्या बनी रहती है, तो उन्हें इस आसन को शुरू कर देना चाहिए, इससे जल्द ही लाभ मिलेगा. वहीं यह आपकी प्रतिरोधक क्षमता (Immunity power) को भी बढ़ाने में सहायक है.

– सबसे पहले अपनी योगा मैट को बिछा लें, फिर घुटनों को मोड़ते हुए पैरों को पेल्विस के नजदीक लाएं. ध्यान रहे कि आपके पैरों के तलवे एक दूसरे से जुड़े हुए रहें बिल्कुल। अपने हाथों से दोनों पैरों को कसकर पकड़े रहें. अब अपनी जांघों तितली की पंख की तरह ऊपर नीचे करते हुए हिलाना शुरू कर दें.

गैस्ट्रिक संबंधित समस्याओं के लिए योग आसन

1 पवनमुक्तासन

पवनमुक्तासन, जिसे विंड रिलीज पोज या गैस रिलीज पोज के रूप में भी जाना जाता है।

पवनमुक्तासन, जैसा कि नाम से पता चलता है, दो शब्दों “पवन” से बना है, जिसका अर्थ है हवा या गैस, और “मुक्ता“, जिसका अर्थ है राहत ।यह आसन हमारे पेट में गैस को बाहर निकालने में मदद करता है। गैस अक्सर भोजन अपच के कारण होती है। और अपच के कारण बहुत सारीसमस्याएं होती हैं, पेट की परेशानी से ज्यादा जैसे माइग्रेन, जोड़ों का दर्द आदि।

क्या लाभ हैं?

यह अपच के कारण बनने वाली गैस से छुटकारा दिलाने में मदद करता है

यह पीठ, बाइसेप्स, ट्राइसेप्स और हिप्स की मांसपेशियों पर काम करता है

2.बालासन

इस योग को गर्भासन और शशांकासन के नाम से भी जाना जाता है। बालासन का अर्थ है बच्चे की मुद्रा, जहाँ “बाला” का अर्थ है बच्चा, और“आसन” का अर्थ है मुद्रा। बालासन अक्सर अंत योग के रूप में किया जाता है; यह योग उचित श्वास तकनीक पर केंद्रित है।

इसके क्या फायदे हैं?

यह थकान, चिंता और तनाव को दूर करता है

पाचन में सुधार करता है

यह पीठ दर्द को ठीक करता है

3.हलासन

हलासन दो संस्कृत शब्दों से बना है, अर्थात, “हला“, जिसका अर्थ है हल, और “आसन“, जिसका अर्थ है मुद्रा। इसलिए, इसे हल मुद्रा भी कहाजाता है। जिस तरह हल से मिट्टी की गहरी परतें खोदी जाती हैं, उसी तरह यह योग आपको अपने मन की गहराई में जाने और शांति प्राप्त करनेदेता है। यह चुनौतीपूर्ण योग है, और आपको इसमें महारत हासिल करने में कुछ समय लग सकता है। इस आसन में महारत हासिल करने केलिए, आपको सबसे पहले अपनी सांस लेने की तकनीक में महारत हासिल करनी होगी और अच्छा लचीलापन होना चाहिए।

क्या लाभ हैं?

लचीलेपन में सुधार करता है और आपकी पीठ, हैमस्ट्रिंग, गर्दन आदि की मांसपेशियों को मजबूत करता है

यह वजन घटाने में मदद करता है

यह हमारे आंतरिक अंगों जैसे थायराइड, पिट्यूटरी, अग्न्याशय, और कई अन्य को भी लाभ पहुंचाता है

पाचन में सुधार करता है और कब्ज को ठीक करता है

योग का यदि रोज़ाना पालन किया जाए तो यह आपके स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। आयुर्वेद के अनुसार, हमारी सभी स्वास्थ्यपरेशनियाँ तीन तत्वों या दोषों के बीच असंतुलन के कारण होते हैं। जब ये तीन दोष, यानी वात, पित्त और कफ संतुलन में होते हैं, तो आप पूरीतरह से स्वस्थ होते हैं। लेकिन इनमें से किसी एक के असंतुलन या अधिकता से कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

पाचन क्रिया में गड़बड़ी के कारण गैस्ट्रिक समस्या होती है। और आयुर्वेद का मानना ​​है कि यह वात दोष (वायु तत्व) में असंतुलन के कारण है।वात दोष हमारे सभी पाचन अंगों को नियंत्रित करता है। हमारे वात को शांत करने से गैस्ट्रिक समस्याओं से छुटकारा पाने में मदद मिलती है।

सभी प्रकार के योग इन तीन दोषों को ठीक करने पर केंद्रित हैं। ऐसे योग आसन हैं जो हमारे वात दोष को शांत करते हैं जो हमारी गैस्ट्रिकसमस्याओं को ठीक करते हैं। ये योग आसन उचित श्वास तकनीकों को एकीकृत करके हमें लाभान्वित करते हैं जो आपके जठरांत्र अंगों कोप्रभावित करते हैं।

शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को रोजाना योग-व्यायाम के अभ्यास की सलाह देते हैं। योग का अभ्यास शरीर और मन दोनों के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। योग विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को दिनचर्या में सूर्य नमस्कार के कम से दो योगासनों को जरूर शामिल करना चाहिए।  सूर्य ऊर्जा, शक्ति और जीवन शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है, ऐसे में  सूर्य नमस्कार आसन आपके शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी हो सकता है।

योग विशेषज्ञों के अनुसार सूर्य नमस्कार अभ्यास के लिए सबसे अच्छा समय सूर्योदय से पहले का होता है। यह शारीरिक और मानसिक शक्ति, शरीर पर बेहतर नियंत्रण, मन की शांति, ऊर्जा के संतुलन को बनाए रखने में काफी मददगार अभ्यास माने जाते हैं।

सूर्य नमस्कार 12 योगासनों का संयोजित क्रम है, जो शरीर के सभी अंगों को लक्षित करते हुए कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को करने में आपके लिए मददगार माना जाता है। यह आसन सभी उम्र के लोगों के लिए आसान और कारगर हो सकते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि फिटनेस को बेहतर बनाए रखने के साथ शरीर को कई प्रकार की बीमारियों से बचाए रखने के लिए सूर्य नमस्कार योग का अभ्यास फायदेमंद हो सकता है। आइए सूर्य नमस्कार के ऐसे ही तीन सबसे कारगर योगासनों और उनके लाभ के बारे में जानते हैं।