चीन से परेशान हुआ श्रीलंका, बोला-भारत से दूर होकर हमने की बड़ी गलती.. इंडिया फर्स्ट सबसे अच्छा

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Modi Rajpakshe
(Image Courtesy: Google)

कोलंबो। दक्षिण एशिया में बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के नाम पर चीन लगातार पर पड़ोसी देशों को कर्ज देकर उन्हें अपने जाल में फंसाने में लगा हुआ है। भारत से पिछले कुछ समय से दूर नज़र आ रहे पुराने सहयोगी श्रीलंका को भी ये बात अब समझ आने लगी है।

श्रीलंका के विदेश सचिव जयनाथ कोलंबगे ने माना है कि चीन को हंबनटोटा का बंदरगाह 99 साल की लीज पर देना एक गलती थी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि श्रीलंका ‘इंडिया फर्स्ट’ नीति पर ही कायम रहेगा।

चीन की बढ़ती मौजूदगी को बताया चिंता

कोलंबेज ने कहा, ‘श्रीलंका में चीन की बढ़ती मौजूदगी हमारे लिए चिंता का विषय है। श्रीलंकाई अखबार डेली मिरर को दिए इंटरव्यू में कोलंबेज ने कहा कि उनकी सरकार चीन के दबाव में नहीं आएगी। कोलंबेज ने कहा, श्रीलंका अपने क्षेत्रीय विदेश संबंधों को लेकर इंडिया फर्स्ट की नीति अपनाएगा। ्र

इसका मतलब यह हुआ कि श्रीलंका ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा, जो भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ हो। राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे का भी यही मानना है। कोलंबेज 2014-16 के बीच श्रीलंका नेवी के चीफ रहे। इसके बाद विदेश नीति समीक्षक बने और वे देश के पहले ऐसे विदेश सचिव हैं, जिनका सेना से सीधा संबंध रहा है।

भारत को ही मिलने वाला था हंबनटोटा

कोलंबेज के मुताबिक, चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और भारत को छठवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माना जाता है। 2018 में भारत दुनिया की सबसे तेज उभरती हुई अर्थव्यवस्था था। इसका मतलब है कि हम दो इकोनॉमिक जाइंट्स (आर्थिक महाशक्तियां) के बीच हैं।

श्रीलंका ये कभी भी बर्दाश्त नहीं करेगा कि कोई देश अपने फायदे के लिए भारत जैसे किसी दूसरे देश के खिलाफ हमारा इस्तेमाल करे। हंबनटोटा के दक्षिणी पोर्ट में चीनी निवेश पर टिप्पणी करते हुए कोलंबेज ने कहा- हमने पहला ऑफर भारत को ही दिया था। हालात के चलते भारत तब इसे नहीं ले पाया था, बाद में यह चीनी कंपनी के पास चला गया।

क्या है हंबनटोटा का मामला?

दरअसल, साल 2017 में 99 साल की लीज पर श्रीलंका ने ये पोर्ट चीन को सौंपा था। कोलंबेज ने कहा- हम्बनटोटा की 85% हिस्सेदारी चीनी मर्चेंट होल्डिंग कंपनी के पास है। लेकिन, इसका इस्तेमाल सिर्फ कमर्शियल एक्टिविटीज के लिए ही किया जा सकता है, सैन्य उपयोग नहीं होगा।

भारत ने चिंता जाहिर की है कि चीन यहां एक सैन्य अड्डा बना रहा है। चीन की इंडो पैसिफिक एक्सपेंशन और बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) में चीन ने श्रीलंका को भी शामिल किया है। श्रीलंका ने चीन का कर्ज न चुका पाने के कारण हंबनटोटा बंदरगाह चीन की मर्चेंट पोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड कंपनी को 1.12 अरब डॉलर में साल 2017 में 99 साल के लिए लीज पर दे दिया था। हालांकि अब श्रीलंका इस पोर्ट को वापस चाहता है।