सतयुग दर्शन ट्रस्ट द्वारा विश्व समभाव दिवस पर विशेष ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित

नई दिल्ली। विश्व समभाव दिवस के मौके पर सोमवार शाम सतयुग दर्शन ट्रस्ट द्वारा समभाव-समदृष्टि की महत्ता को दर्शाते आनॅलाइन विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का प्रसारण यू-ट्यूब, फेसबुक पर किया गया।

इस दौरान हजारों की संख्या में प्रधानाचार्यों, अध्यापकों, बच्चों एवं जनसामान्य ने आनलाइन आयोजित इस रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनन्द उठाया और अपने जीवन को सही मार्गदर्शन दिया।

राजनीति, शिक्षा, खेल व मेडिकल क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने इस अवसर पर विद्यालय जाने वाले छात्रों में मानवीय गुणों की मजबूत नींव स्थापित करने हेतु, ट्रस्ट के प्रयासों की सराहना की है। पूर्व आई, ए. एस, एक प्रसिद्ध लेखक एवं सार्वजनिक वक्ता श्री विवेक अत्रे, कॉमन वेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक विजेता, निशानेबाज श्री ओमकार सिंह, पदम्‌ श्री प्रोफेसर एच.सी.वर्मा, शिक्षा, वन और पर्यटक मंत्री, हरियाणा, श्री कॅवर पाल गुर्जर ने भी बाल्यावस्था से ही छात्रों को चारित्रिक रूप से संस्कारी बनाने हेतु ट्रस्ट के इस मानवता ई-आलम्पियाड की बहुत प्रशंसा की व आयोजित आनलाईन कार्यक्रम के विषय में अपने विचार प्रस्तुत किए। साथ ही इस शुभावसर पर छठे मानवता ई-आलम्पियाड की परीक्षा के परिणाम भी घोषित किए गए। विजेताओं को पुरस्कार के रूप में सवा दो लाख रूपये तक की धनराशि के ईनाम देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के अंतर्गत ट्रस्ट के मार्गदर्शक श्री सजन जी ने सबको समभाव-समदृष्टि की युक्ति की जीवन उपयोगिता के बारे में बताते हुए कहा कि हर मानव के लिए अपने यथार्थ स्वरूप में सदा एकरस बने रह, मानवता के सिद्धान्त पर सुदृढ़ बने रहने हेतु, समभाव-समदृष्टि का सबक़ पढ़ना व उसका व्यवहारिक रूप गहनता से समझना आवश्यक है। अत: बाल-अवस्था के मनगढ़ंत स्वार्थपर भक्ति-भावों को छोड़, सब इस कुदरत प्रदत्त युवावस्था के भक्ति भाव को एकरस अपनाओ व शारीरिक, मानसिक व आत्मिक रूप से ताकतवर हो, कुदरत के वाली से जो चाहो वह प्राप्त कर धन्य-धन्य हो जाओ।

इस संदर्भ में शत्‌-प्रतिशत्‌ कामयाब होने हेतु अविलम्ब भौतिक व्यवस्था से नैतिक व्यवस्था को उच्चतर मानते हुए, उसी के अनुसार आचार-व्यवहार अपनाना सुनिश्चित कर, अपने मूल स्वाभाविक गुण/धर्म पर स्थिरता से खड़े हो जाओ। जानो इस सनातन तत्त्व को धारण करने व इस मायावी जगत में विचरते समय उस पर सुदृढ़ता से स्थिर बने रहने पर ही, आत्मा और परमात्मा की शाश्वतता का अनुभव हो सकेगा और आप शाश्वत मूल्यों में विश्वास रखते हुए एक सदाचारी इंसान की तरह पुण्य कर्म करते हुए परोपकारी नाम कहा सकोगे। यही नहीं ऐसा सुनिश्चित करने पर ही आप मानव जीवन के नियम, विधि, लोक नीति आदि का भली-भांति पालन करते हुए न्यायसंगत जीवन जीने के योग्य बन अपने जीवन के साथ सही मायने में न्याय कर सकोगे।

श्री सजन जी ने सबसे कहा कि मानो कि यह अपने आप में एक मानव के लिए कुदरती वेद-शास्त्रों में विदित शब्द ब्रह्म विचारों अनुसार जीवन शैली अपना कर, आत्मस्वरूप में स्थित रहते हुए, नित्यता के भाव से निर्भयतापूर्ण निष्पाप जीवन जीने की यानि जीवन के वास्तविक आनन्द का अनुभव करने की महत्त्वपूर्ण बात है। तभी आप सत्‌-वादी बन अहिंसा के पुजारी बन पाओगे और क्षमाशीलता के भाव को अपने स्वभाव के अंतर्गत कर हृदय में सजन भाव उजागर कर पाओगे। इस तरह स्वत: ही समभाव आपकी नजरों में हो जाएगा और आप समदर्शिता अनुरूप परस्पर सजन-भाव का व्यवहार करते हुए, जीवन के उन्नति पथ पर निष्कंटक आगे बढ़ पाओगे और अंत अपने जीवन लक्ष्य को प्राप्त कर अपना अनमोल मानव जीवन सफल बना लोगे।

इसी के साथ उन्होंने सजनों से यह भी कहा कि समय के आवाहन को समझो क्योंकि युग परिवर्तन की कगार पर खड़ा है यानि कुदरत के नियमानुसार अब कलुकाल हटने को तैयार खड़ा है व शीघ्र ही सतयुग के सुनहरे काल का आगमन होने जा रहा है। अत: अविलम्ब जाग्रति में आ व सब अन्य मनगढंत भाव-स्वभाव छोड़, समभाव अपना सत्‌-वादी बन जाओ। इस हेतु असत्य को छोड़ सत्य को धार लो यानि सच बोलचाल, खान-पीन व सच का ही सौदा करो यानि सच ज़बान, सच हृदय व दोनों नयनों से सच्चाई विशाल झलकें। तभी हृदय सचखंड हो पाएगा और आप एक निगाह एक दृष्टि हो, समभाव से सर्वव्याप्त भगवान का दर्शन कर समदृष्टि हो जाओगे और अपने जीवन को अखंड यश-कीर्ति की प्राप्ति का भागी बना पाओगे।

कार्यक्रम के अंत में सजन जी ने आज के शासकों-प्रशासकों व समस्त बुद्धिजीवियों से अनुरोध किया कि वे वैश्विक स्तर पर हर मानव को इस नैतिक पतनता की परिस्थिति से उबारने के लिए बाल्यावस्था से ही कुदरती वेद-शास्त्र विहित आत्मिक ज्ञान प्रदान करने की समुचित व्यवस्था कायम करें ताकि मानव स्वार्थ से परमार्थ बन, भ्रष्टाचार, दुराचार व व्यभिचार जैसे बुरे स्वभावों से मुक्ति पा सदाचारी इंसान बन सके व ए विध्‌ भारत माता का सुपुत्र बन उसको हर्षा सके। उन्होंने कहा कि आज के दौर में यह शुभ कार्य भौतिक विकास के लिए किए जाने वाले समस्त अन्य प्रयत्नों से अधिक प्राथमिकता की अपेक्षा रखता है और ऐसा सुनिश्चित करने पर ही भौतिक विकास भी अर्थपूर्ण सिद्ध हो सकता है।

अंत में चतुर्थ मानवता ई-आलम्पियाड के टॉप पाँच सौ विजेताओं के नाम घोषित किए गए। यह पुरस्कार स्कूली बच्चों के स्तर पर, कॉलेज के बच्चों के स्तर पर, व्यक्तिगत स्तर पर व ओवर आल स्कूल ट्राफी के स्तर पर घोषित किए गए। स्कूली स्तर पर पाँचवी से आठवी तक की श्रेणी में ऊना के डी.ए.वी. स्कूल के तनीश राणा, नई दिल्ली से लवली रोस पब्लिक स्कूल, के बृजेश कुमार वर्मा व झांसी के सी.के.सी एकेडमी के अवनि जैन ने प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया। नौवी से बारवीं तक की श्रेणी में नई दिल्ली से लवली रोस पब्लिक स्कूल, के अवदेश कुमार वर्मा ने प्रथम, बल्लभगढ़ के आदर्श शिक्षा निकेतन हाई स्कूल के शुभम पांडे ने द्वितीय व न्यू लोहरिया विद्या मन्दिर सीनियर सैकेनडरी स्कूल के अंकुर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया है।

कालेज एवं व्यक्तिगत स्तर पर क्रमश: कुरुक्षेत्र यूनिवर्सटी की नेहा शर्मा व नई दिल्ली की महिमा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह बेस्ट परफोरमिंग स्कूलों में सात स्कूल क्रमश: गवरमेंट सीनियर सैकेन्ड़री स्कूल, एन. आई. टी – 5 फरीदाबाद, लड़कियों का गवरमेंट माडल सीनियर सैकेन्डरी स्कूल, चंडीगढ़, बाल भारती पब्लिक स्कूल, सेक्टर-14 रोहणी, नई दिल्ली, अवदेश कॉलीजिएट, रामगढ कालोनी, कानपुर रोड, लखनऊ, डी.ए.वी. सीनियर सैकेन्डरी पब्लिक स्कूल, अम्बोटा/ऊना, डी. सी. माडल स्कूल, सेक्टर-7 पंचकूला व होली चाइल्ड सीनियर सैकेन्डरी स्कूल, सोनीपत ने उत्तम स्थान प्राप्त किया है।

अधिकतर स्कूलों के प्रधानाचार्यों और सहयोगी अध्यापकों ने तहे दिल से समभाव दिवस की संध्या पर ओयोजित इस कार्यक्रम व ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस छठे मानवता ई-आलम्पियाड की सराहना की है व इस श्रृंखला में इस तरह के आलम्पियाड व मानवता आधारित कार्यक्रमों को जारी रखने का अनुरोध भी किया है।