सरदार पटेल की 145वीं जयंती, PM मोदी ने की पदपूजा.. स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास भव्य कार्यक्रम

New Delhi: देश के पहले गृह मंत्री, ‘भारत रत्‍न’ सरदार वल्‍लभभाई पटेल की आज 145वीं जयंती (Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti 2020) है। ‘लौहपुरुष’ के नाम से विख्‍यात पटेल को श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने उन्‍हें ‘राष्ट्रीय एकता और अखंडता का अग्रदूत’ बताया।

मोदी (PM Narendra Modi) गुजरात के दौरे पर हैं और पटेल जयंती (Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti 2020) पर उन्‍होंने केवड़‍िया में ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’ जाकर सरदार को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

पीएम मोदी (PM Narendra Modi) ने सरदार की सबसे ऊंची प्रतिमा (Statue of Unity) के पास पदपूजा भी की। सरदार पटेल की जयंती (Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti 2020) को ‘राष्‍ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर केवड़‍िया में एक परेड का आयोजन भी किया गया है।

‘राष्‍ट्रीय एकता दिवस’ पर परेड

केवड़‍िया में ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’ (Statue of Unity) के पास ‘राष्‍ट्रीय एकता दिवस’ पर परेड का प्रधानमंत्री (PM Narendra Modi) ने निरीक्षण किया। उन्‍होंने जनता को ‘एकता शपथ’ भी दिलाई। परेड से पहले राष्‍ट्रगान हुआ और उसके बाद केंद्रीय सशस्‍त्र पुलिस बलों के जवानों ने अपने कौशल का प्रदर्शन किया।

2018 बैच के आईपीएस ओमप्रकाश ने परेड का नेतृत्‍व किया। परेड में राज्‍यों के पुलिस बल भी शामिल हुए। सीआरपीएफ की महिला अधिकारियों ने राइफल ड्रिल का प्रदर्शन भी किया। केवडिया की आदिवासी विरासत को भी एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के जरिए लोगों के सामने प्रदर्शित किया गया।

‘राष्‍ट्रीय एकता के अग्रदूत’ सरदार पटेल

मोदी ने ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’ पहुंचने से पहले, शनिवार सुबह एक ट्वीट में सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी थी। उन्‍होंने लिखा, “राष्ट्रीय एकता और अखंडता के अग्रदूत लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को उनकी जन्म-जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि।”

सरदार पटेल को आजादी के बाद 500 से ज्‍यादा रियासतों का एकीकरण कर अखंड भारत के निर्माण का श्रेय दिया जाता है। गुजरात में नर्मदा जिले में सरदार सरोवर बांध के सामने सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची लौह प्रतिमा का निर्माण किया गया है। इस प्रतिमा का नाम ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ रखा गया है। यह प्रधानमंत्री मोदी की ही परिकल्पना थी। सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के खेड़ा जिले में हुआ था।