रामभक्तों के लिए सुनहरा मौका! भव्य राम मंदिर की दीवारों पर लिखवाएं नाम.. जानें कैसे

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Ram Mandir Bhumi Pujan Muhurt
(Image Courtesy: Google)
New Delhi: अयोध्या में राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) का निर्माण शिलान्यास के बाद शुरू हो गया है। मंदिर के निर्माण (Ram Mandir Nirman) में लोहा या सरिया का प्रयोग नहीं किया जाएगा। लोहे की जगह मंदिर निर्माण में तांबे की छडें प्रयोग होंगी।

बताया जा रहा है कि स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी (न्यूयॉर्क) की तर्ज पर तांबे की पर्त बनाकर मंदिर का निर्माण (Ram Mandir Nirman) होगा। मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) सालों साल तक ऐसे ही खड़ा रहे इसके लिए खास तरह से मंदिर निर्माण हो रहा है। ट्रस्ट (Ram Mandir Trust) ने लोगों से तांबा दान करने को कहा है। उन्होंने कहा है तांबे की पत्तियों में लोग अपने या अपने परिवार के लोगों का नाम भी लिखवा सकते हैं।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Ram Mandir Trust) के सदस्यों ने बताया कि राम जन्मभूमि मन्दिर के निर्माण (Ram Mandir Nirman) हेतु कार्य प्रारंभ हो गया है। CBRI रुड़की और IIT मद्रास के साथ मिलकर निर्माणकर्ता कम्पनी L&T के इंजिनियरों ने भूमि की मृदा के परीक्षण का काम शुरू कर दिया। जमीन की मिट्टी की जांच के बाद आगे का काम शुरू होगा। मन्दिर निर्माण के कार्य में लगभग 36-40 महीने का समय लगने का अनुमान है।

भूकंप रोधी होगा मंदिर

मन्दिर का निर्माण (Ram Mandir Nirman) भारत की प्राचीन निर्माण पद्धति से किया जा रहा है ताकि वह सहस्त्रों वर्षों तक न केवल खड़ा रहे, अपितु भूकम्प, झंझावात अथवा अन्य किसी प्रकार की आपदा में भी उसे किसी प्रकार की क्षति न हो। मन्दिर के निर्माण में लोहे का प्रयोग नहीं किया जाएगा।

इस तरह की पत्तियां बनवाकर दें दान

मन्दिर निर्माण (Ram Mandir Nirman) में लगने वाले पत्थरों को जोड़ने के लिए तांबे की पत्तियों का उपयोग किया जाएगा। निर्माण कार्य हेतु 18 इंच लम्बी, 3 mm गहरी और 30 mm चौड़ी 10,000 पत्तियों की आवश्यकता होगी। रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने रामभक्तों से कहा है कि वह इस तरह की तांबे की पत्तियां दान करें।

तांबे की पत्तियों में लिखवा सकते हैं नाम

ट्रस्ट ने कहा है कि इन तांबे की पत्तियों पर दानकर्ता अपने परिवार, क्षेत्र या मंदिरों का नाम गुदवा सकते हैं। इस प्रकार से ये तांबे की पत्तियां न केवल देश की एकात्मता का अभूतपूर्व उदाहरण बनेंगी, अपितु मन्दिर निर्माण में सम्पूर्ण राष्ट्र के योगदान का प्रमाण भी देंगी।