राम मंदिर भूमि पूजन के दिन 250 लोगों ने फिर से अपनाया हिंदू धर्म, मुगलकाल में बने थे मुस्लिम

0
575
Badmair Muslim
(Image Courtesy: Google)

नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन के दिन करीब 50 मुस्लिम परिवारों ने वापस हिंदू धर्म अपना लिया है। इन परिवारों का कहना हैं कि उन्होंने बिना किसी दबाव के अपनी इच्छा से हिंदू धर्म अपनाया है। दरअसल, इनके पूर्वज पहले हिंदू ही थे, लेकिन मुगलकाल में उन्होंने इस्लाम अपनाया था।

यह घटना राजस्थान के बाड़मेर जिले के मोतीसरा गांव की है। इस गांव में करीब 50 मुस्लिम परिवार थे, जिन्होंने राम मंदिर भूमि पूजन के दिन हिंदू धर्म अपनाया।

‘डरा धमकाकर हमारे पूर्वजों पर थोपा गया था इस्लाम’

धर्म वापसी करने वाले ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कई सालों से वह हिंदू धर्म अपना रहे हैं और हिंदू रीति रिवाज के हिसाब से ही अपनी जिंदगी को जी रहे हैं। उन्होंने बताया कि राम मंदिर के भूमिपूजन से अच्छा दिन कोई नहीं था, इसलिए 8 अगस्त को विधिवत रूप से 50 लोगों के पूरे परिवारों ने हिंदू धर्म में वापसी की इच्छा जताई। उनके घर पर हवन यज्ञ करके जनेऊ पहन कर परिवार के ढाई सौ लोगों ने फिर से हिंदू धर्म में वापसी कर ली है।

क्या कहते हैं ग्रामीण बुजुर्ग

हिंदू धर्म अपनाने वाले बुजुर्ग सुभनराम ने बताया कि मुगल काल में मुस्लिमों ने हमारे पूर्वजों को डरा धमकाकर मुस्लिम बनाया था, लेकिन हम हिंदू धर्म से ताल्लुक रखते थे। मुस्लिम हमसे दूरी रखते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि इतिहास की जानकारी होने के बाद हमने इस चीज के ऊपर गौर किया कि हम हिंदू हैं और हमें वापस हिंदू धर्म में जाना चाहिए। हमारे रीति रिवाज पूरे हिंदू धर्म से संबंध रखते हैं। इसी के बाद पूरे परिवार ने हिंदू धर्म में वापसी की इच्छा जताई और फिर घर पर हवन यज्ञ कराकर जनेऊ पहनकर परिवार के सभी 250 सदस्यों ने फिर से हिंदू धर्म में वापसी कर ली।

कई सालों से कर रहे हिंदू रीति रिवाजों का पालन

हरजीराम के मुताबिक, कंचन ढाढ़ी जाति से ताल्लुक रखने वाला परिवार पिछले कई सालों से हिंदू रीति रिवाजों का पालन कर रहा था। वह हर वर्ष अपने घरों में हिंदू त्योहारों को ही मनाते हैं। बुधवार को राम जन्मभूमि पर राम मंदिर के शिलान्यास के समारोह पर सभी ने हवन पूजा पाठ का प्रोग्राम रखा एवं हिंदू संस्कृति का पालन करते हुए हमने अपनी स्वेच्छा से वापस घर वापसी की है। हमारे ऊपर कोई दबाव वगैरह नहीं है।

गांव के पूर्व सरपंच प्रभुराम कलबी ने बताया कि ढाढ़ी जाति के परिवार के सदस्यों ने बिना किसी दबाव और अपनी इच्छा से हिंदू धर्म में वापसी की है। संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को अपना सकता है। इसमें किसी को कोई आपत्ति भी नहीं, बल्कि पूरे गांव ने इनके इस फैसले का सम्मान किया है।

इस मौके पर बाड़मेर जिले सहित आसपास के अन्य दर्जनों हिंदू संतों को खासतौर से बुलाया गया था और उनके सानिध्य में ही इन लोगों की हिंदू धर्म में घर वापसी हुई है।