Ram Mandir: जिस शुभ मुहूर्त में जन्मे प्रभु राम.. उसी मुहूर्त में आरंभ होगा भव्य मंदिर का निर्माण

New Delhi: Ram Mandir Bhumi Pujan Muhurt: भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या में राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) के निर्माण का इंतजार वर्षों से श्रद्धालु कर रहे हैं। 5 अगस्त को भूमि पूजन के साथ ही मंदिर निर्माण का कार्य आरंभ होने वाला है।

मंदिर निर्माण (Ram Mandir Bhumi Pujan) की योजन को लेकर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शनिवार 18 जुलाई को बैठक हुई। इसके बाद ट्रस्ट ने पीएमओ को भूमि पूजन के लिए 3 और 5 अगस्‍त की तारीखें भेजी थीं। अब यह सूचना आ रही है कि 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन में शामिल होंगे और मंदिर निर्माण की आधारशिला रखेंगे।

भूमि पूजन के लिए 12 बजकर 15 मिनट का समय निश्चित किया गया है। आइए जानते हैं किन शुभ संयोग (Ram Mandir Bhumi Pujan Muhurt) में बन रहा है राम मंदिर….

5 अगस्त को राममंदिर का भूमि पूजन मुहूर्त

राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए 5 अगस्त का दिन चुना जाना बहुत ही शुभ है। दरअसल इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। भूमि पूजन अभिजीत मुहूर्त में होगा। भूमि पूजन कार्यक्रम का आरंभ धनिष्ठा नक्षत्र में और समापन शतभिषा नक्षत्र में होगा। इन नक्षत्रों में भूमि पूजन के लिए काशी से भी पंडितों को बुलाया जा रहा है।

अभिजीत मुहूर्त में भगवान राम का जन्म हुआ था और इसी मुहूर्त में उन्ही के मंदिर के निर्माण की पूजा होगी। रामचरित मानस में उनके जन्म और मुहुर्त के बारे में लिखा है- नवमी तिथि मधुमास पुनीता, शुक्ल पक्ष अभिजित हरिप्रीता…

वैभवकारी है अभिजित मुहूर्त

ज्योतिषियों का मानना है कि, अभिजित मुहूर्त में भूमि पूजन होना वैभवकारी साबित होगा। इस मुहूर्त में जो भी कार्य शुरू किया जाता है, उसमें सफलता अवश्य मिलती है। 15 मुहूर्तों में से अभिजित मुहूर्त आठवें नंबर पर आता है और बहुत ही फलदायी होता है।

ज्योतिषशास्त्र में कहा गया है कि 28 वां नक्षत्र अभिजीत होता है, जो सभी कार्यों के लिए शुभ है। अगर कोई शुभ मुहूर्त ना हो तो अभिजीत के समय बिना पंचांग देखे भी शुभ कार्य संपन्न किया जा सकता है। साथ ही 5 अगस्त को भाद्रपद महीने में सिंह राशि में सूर्य रहेंगे। जिससे यह मुहूर्त और भी फलदायी हो जाएगा।

धनिष्ठा नक्षत्र का भूमि से है संबंध

धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं जो भूमि के कारक ग्रह हैं। इस नक्षत्र में भूमि पूजन कार्यक्रम का आरंभ होगा। वसु इस नक्षत्र के देवता हैं जो विष्णु और इंद्र के रक्षक हैं। इसलिए यह समय को भूमि पूजन के लिए शुभ संयोग माना जा रहा है। 27 नक्षत्रों में से धनिष्ठा को 23वां नक्षत्र माना जाता है। कुछ ज्योतिष इस नक्षत्र का संबंध भगवान शिव और कृष्ण से भी संबंध मानते हैं।

100 अभिलाषाएं पूरी करता है यह नक्षत्र

भूमि पूजन के कार्यक्रम का अंत शतभिषा नक्षत्र में होगा। इस नक्षत्र के बारे में ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि शतभिषा नक्षत्र ऐसा नक्षत्र है, जो 100 अभिलाषाओं को पूर्ण करता है। शतभिषा नक्षत्र भूमि पूजन का समापन होना इसकी शुभता को दर्शाता है और मंदिर निर्माण के सफल होने की गवाही देता है।

रखी जाएगी 40 किलो की चांदी की ईंट

प्रधानमंत्री मोदी 40 किलो की चांदी की ईंट को गर्भगृह में रखेंगे। साथ ही पांच चांदी की ईंट और रखी जाएंगी, जो पांच नक्षत्रों के प्रतीक होंगी। करीब साढ़े तीन फीट का गड्ढा खोदा जाएगा, जिसमें पाताल लोक के देवता की पूजा की जाएगी और प्रार्थना की जाएगी की लाखों सालों तक इस मंदिर को कोई नुकसान ना पहुंचे।

देखने लायक होगी मंदिर की भव्यता

ग्रह-नक्षत्र बताते हैं कि मंदिर निर्माण में तय समय से थोड़ी देरी हो सकती है लेकिन जब मंदिर बनकर तैयार होगा तब उसकी भव्यता देखने लायक होगी। राम मंदिर निर्माण को लेकर जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया था तब भी कई शुभ मुहूर्त बने थे। जिसमें कार्तिक मास के संयोग में हर्षण योग था, साथ ही शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि, जिसके स्वामी भगवान विष्णु हैं।