राहुल गांधी ने बिना नाम लिए कसा PM मोदी पर तंज- ‘तीन चीजें देर तक छिप नहीं सकतीं…’

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Rahul Gandhi
(Image Courtesy: Google)
New Delhi: वायनाड से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) पर अपने बधाई संदेश के जरिए केंद्र सरकार पर तंज कसा है। उन्‍होंने गौतम बुद्ध का एक कथन साझा किया जिसमें एक बात ऐसी थी जिसे लेकर राहुल सवाल करते रहे हैं।

राहुल (Rahul Gandhi) ने लिखा, ‘तीन चीज़ें जो देर तक छिप नहीं सकतीं- सूर्य, चंद्रमा और सत्य।’ इसमें से ‘सत्‍य’ वह चीज है जिसकी मांग राहुल गांधी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से करते आए हैं। उन्‍होंने ट्विटर और मीडिया के जरिए बार-बार चीनी घुसपैठ को लेकर जानकारी छिपाने का आरोप केंद्र पर लगाया है।

चीन के मुद्दे पर बेहद सक्रिय हैं राहुल गांधी

वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस हो या ट्विटर, राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का फोकस चीन मुद्दे पर रहा है। वह मई में घुसपैठ की रिपोर्ट्स आने के बाद से ही केंद्र पर हमला करते रहे हैं। उन्‍होंने बार-बार आरोप लगाए कि चीन ने भारत की जमीन हथियार ली है।

सरकार से उन्‍होंने कई बार पूछा कि ‘क्या भारतीय ज़मीन पर चीन ने कब्ज़ा किया है?’ एक दिन पहले, राहुल (Rahul Gandhi) ने लद्दाख के कुछ लोगों का वीडियो भी शेयर किया था जिसमें वो चीनी घुसपैठ का दावा कर रहे हैं। राहुल का कहना था कि इनकी ‘चेतावनी को अनसुना करना भारत को बहुत महंगा पड़ेगा।’

पीएम मोदी के नेतृत्‍व पर उठा चुके सवाल

पिछले महीने जब पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का विस्‍तार करने का ऐलान किया तो राहुल ने शायराना अंदाज में तीर चलाए थे। तब राहुल ने ट्वीट किया था, “तू इधर उधर की न बात कर, ये बता कि काफिला कैसे लुटा, मुझे रहजनों से गिला तो है, पर तेरी रहबरी का सवाल है।”

उन्‍होंने एक वीडियो जारी किया था जिसमें वह कह रहे थे कि “पूरा देश जानता है कि चीन की फौज ने हमारी पवित्र जमीन छीनी है। चीन लद्दाख के अंदर चार जगहों पर बैठा हुआ है। नरेंद्र मोदी जी आप यह बताइए कि चीन की फौज को आप कब निकालेंगे और कैसे निकालेंगे।”

शरद पवार ने राहुल को की थी ताकीद

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष शरद पवार ने 28 जून को राहुल गांधी से आग्रह किया था कि वे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करें।’ पवार की पार्टी महाराष्‍ट्र में कांग्रेस की सहयोगी है।

राहुल को 1962 का युद्ध याद दिलाते हुए पवार ने कहा था, “हमें नहीं भूलना चाहिए कि 1962 में क्या हुआ था, जब चीन ने भारत की 45,000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया था। इस तरह के आरोप लगाने से पहले किसी को भी सोचना चाहिए कि अतीत में क्या हुआ था।”

गलवान की घटना पर पवार ने कहा था कि “यदि हमारी सेना सतर्क नहीं होती तो हमें चीनी कार्रवाई के बारे में पता नहीं चल पाता… संघर्ष का मतलब हम सतर्क थे या हम अनजान रहे होते। इसे रक्षामंत्री या किसी और की विफलता करार देना सही नहीं है, और इस तरह के आरोप लगाना गलत है।”