भारत और मोदी के खिलाफ अकेला पाकिस्तानियों से भिड़ गया ये ‘हिन्दुस्तानी’, कहा बाप-बाप होता है

नई दिल्‍ली। स्वतंत्रता दिवस के दिन जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में पाकिस्तान और खालिस्तान समर्थक कुछ उप;द्र’वियों ने जमकर भारत के खिलाफ नारे लगाए। सैकड़ों की भीड़ के बीच वहां एक हिन्दुस्तानी भी मौजूद था, जिससे यह सबकुछ सहन नहीं हुआ और वह उनसे भिड़ गया।

प्रशांत वेंगर्लेकर नामक यह युवक भारत और पीएम मोदी के विरोध में की जा रही आपत्तिजनकर नारेबाजी सुनकर अकेले ही सैकड़ों लोगों की भीड़ से जा भिड़ा।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है, जो जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर का है। 15 अगस्त के दिन पाकिस्तानी और खालिस्तान समर्थक भारत के विरोध में यहा प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान वह पीएम मोदी और भारत के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगा रहे थे।

प्रशांत ने समाचार चैनल टाइम्स नाऊ से बातचीत में बताया, उस दिन मैं स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए फ्रैंकफर्ट की सड़कों पर निकला था। इस दौरान वहां कुछ लोग भारत के खिलाफ प्रदर्शन करते दिखे। प्रशांत बताते हैं, मैंने कुछ देर तक तो वीडियो रिकॉर्ड किया, लेकिन तभी कुछ लोगों ने भारत और पीएम मोदी को आपत्तिजनक बातें कहनी शुरू कर दी।

बाप-बाप होता है

प्रशांत ने बताया, पाकिस्‍तानी लोग लगातार भारत और पीएम मोदी के लिए काफी बुरे शब्‍दों का प्रयोग कर रहे थे। एक समय तो उन्‍होंने प्रशांत के साथ हाथापाई तक करने की कोशिश की। अकेले होने के बावजूद प्रशांत डटे रहे और कहा कि ‘बाप बाप होता है।’ उन्‍होंने दावा किया कि एक प्रदर्शनकारी ने उनके हाथ से तिरंगा छीनकर फाड़ दिया।

कौन हैं प्रशांत वेंगुर्लेकर?

पेशे से सिविल इंजीनियर प्रशांत जर्मनी की सरकार के लिए काम करते हैं। प्रशांत पिछले 10 साल से जर्मनी में रह रहे हैं। ट्विटर पर उन्‍होंने अपनी लोकेशन माइन्‍ज शहर डाल रखी है जो फ्रैंकफर्ट का हिस्‍सा है। वह स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर फैंकफर्ट गए हुए थे, जब उनका सामना इन उप;द्र’वियों से हुआ। खुद को ‘भारत माता का भक्‍त’ बताने वाले प्रशांत का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

किस वजह से बौखलाए थे पाकिस्‍तानी?

चैनल से बातचीत में प्रशांत ने कहा कि ‘2019 के बाद से, खासतौर से आर्टिकल 370 खत्‍म होने के बाद से उन्‍हें नहीं पता कि कश्‍मीर मुद्दे को कैसे हैंडल करें। उन्‍होंने और प्रदर्शन करने शुरू किए लेकिन इंटरनैशनल कम्‍युनिटी में उनकी कोई पूछ नहीं। उनकी प्रासंगिकता खत्‍म हो गई है।’ प्रशांत ने कहा कि वह उन प्रदर्शनकारियों को यही समझा रहे थे कि ‘शांति से चले जाओ क्‍योंकि पूरी दुनिया यही चाहती है। न’फ;रत फैलाने का कोई मतलब नहीं।’