Pranab Mukharjee: भारत रत्न प्रणब मुखर्जी के अंतिम दर्शन, जानें कब और कहां होगा अंतिम संस्कार

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प्रणब मुखर्जी, Pranab Mukharjee
(Image Courtesy: Google)
प्रणब मुखर्जी : भारत के सर्वाधिक सम्मानित राजनेताओं में एक पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) का सोमवार की शाम नि’धन हो गया। वह 84 वर्ष के थे।

मुखर्जी (Pranab Mukherjee) को गत 10 अगस्त को सेना के ‘रिसर्च ऐंड रेफ्रल हास्पिटल’ में भर्ती कराया गया था।उसी दिन उनके मस्तिष्क की सर्जरी की गई थी। उनके परिवार में दो पुत्र और एक पुत्री हैं।

लंबे समय तक कांग्रेस के नेता रहे प्रणब मुखर्जी सात बार सांसद रहे। अस्पताल में भर्ती कराये जाने के समय वह कोविड-19 से संक्रमित पाये गए थे। साथ ही उनके फेफड़ों के संक्रमण का भी इलाज किया जा रहा था। उन्हें इसके चलते रविवार को ‘सेप्टिक शॉक’ आया था।

परिवार ने बताया कि पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन प्रणब मुखर्जी के (Pranab Mukherjee) निवास स्थान (10, राजाजी मार्ग, नई दिल्ली) पर आज (01/09/2020) सुबह 11.00 से 12.00 बजे तक किया जा सकेगा। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार दोपहर 2 बजे लोधी रोड श्मशान घाट में होगा। सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन पर दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है।

गृह मंत्रालय ने कहा कि दिवंगत सम्मानीय नेता प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) के सम्मान में भारत में 31 अगस्त से लेकर छह सितंबर तक राजकीय शोक रहेगा। इस दौरान देश भर में उन सभी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा जहां ध्वज लगा रहता है। प्रणब मुखर्जी 2012 से 2017 तक देश के 13वें राष्ट्रपति थे। उनके नि’धन पर तमाम खास-ओ-आम ने शोक जताया।

सबसे युवा वित्त मंत्री

साल 1982 में वे भारत के सबसे युवा वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) बने। तब वह 47 साल के थे। आगे चलकर उन्होंने विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और वित्त व वाणिज्य मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। वे भारत के पहले ऐसे राष्ट्रपति थे जो इतने पदों को सुशोभित करते हुए इस शीर्ष संवैधानिक पद पर पहुंचे। प्रणब मुखर्जी भारत के एकमात्र ऐसे नेता थे जो देश के प्रधानमंत्री पद पर न रहते हुए भी आठ वर्षों तक लोकसभा के नेता रहे। वे 1980 से 1985 के बीच राज्यसभा में भी कांग्रेस पार्टी के नेता रहे।

सबसे ज्यादा दया याचिकाएं खारिज कीं

प्रणब मुखर्जी पांच साल राष्ट्रपति भवन में रहे और इस दौरान उन्होंने कई बदलाव किए। वह ऐसे राष्ट्रपति थे, जिन्होंने सबसे ज्यादा दया याचिकाएं खारिज कीं। उनके समय में कुल पांच दया याचिकाएं मंजूर हुईं, जबकि 30 खारिज की गईं। उन्होंने राष्ट्रपति और राष्ट्रपति भवन, दोनों को वीआईपी दायरे से निकाला। राष्ट्रपति के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले महामहिम शब्द को बंद कराया। राष्ट्रपति भवन को आम लोगों के लिए खोलने की पहल की।

पीएम से कम नहीं था प्रणब मुखर्जी का कद

यूपीए में प्रणब मुखर्जी का कद पीएम से कम नहीं था। पार्टी और सरकार के बीच पुल का काम वही करते थे। चाहे यूपीए 1 के दौरान विश्वास मत लेने का मसला हो या 2011 में अन्ना मूवमेंट से निपटना रहा हो, प्रणब मुखर्जी ही सरकार-पार्टी को गाइड करते रहे।

मोदी ने साझा की पैरे छूते की तस्वीर

प्रणब मुखर्जी के नि’धन पर शोक जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वह तस्वीर ट्वीट की जिसमें वह प्रणब मुखर्जी के पैर छूते नजर आ रहे हैं। उन्होंने लिखा कि प्रमुख नीतिगत मुद्दों पर उनका परामर्श मैं कभी भी नहीं भूल पाऊंगा।

ऐसा रहा सफर
  • देश के 13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर 1935 को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में हुआ था।
  • एमए, एलएलबी के बाद प्रणब दा ने टीचर और पत्रकार के रूप में काम किया। बाद में उन्हें राजनीति भा गई।
  • इंदिरा गांधी प्रणब मुखर्जी से इतनी प्रभावित हुईं कि कई दिग्गजों का पत्ता काट 1969 में राज्यसभा का सांसद बना दिया।
  • 1982 से 1984 तक प्रणब मुखर्जी वित्त मंत्री रहे। उन्होंने रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, लोकसभा नेता, राज्यसभा नेता जैसे पद संभाले।
  • लोकसभा सांसद बनना उनके लिए सपने जैसा रहा। यह सपना 2004 में पूरा हुआ जब वह पहली बार चुनाव जीते।