संसद में पास हुआ जजों के पेंशन का बिल, जानें सुप्रीम और हाई कोर्ट के न्यायाधीश कितनी है सैलरी

नई दिल्ली: संसद ने हाई कोर्ट (High Court) और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के जजों के वेतन एवं सेवा शर्तों से जुड़े एक विधेयक (Judges Pension Bill) को सोमवार को मंजूरी दे दी। राज्यसभा ने उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय (वेतन एवं सेवा शर्त) संशोधन विधेयक 2021 को चर्चा के बाद लोकसभा को लौटा दिया क्योंकि यह एक धन विधेयक है।

लोकसभा में यह विधेयक (Judges Pension Bill) आठ दिसंबर को ही पारित हो चुका है। उच्च सदन में केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की पेंशन संबंधी विसंगति दूर करने के लिए यह विधेयक लाया गया है। कानून मंत्री ने साफ कहा कि इस बिल से जजों की सैलरी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह केवल सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के रिटायर्ड जजों की पेंशन में बढ़ोतरी को लेकर है।

जजों से संबंधित इस विधेयक में क्या है

इस विधेयक (Judges Pension Bill) के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि प्रत्येक सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उनकी मृत्यु के बाद उनका परिवार मानकों के अनुरूप पेंशन या कुटुम्ब पेंशन की अतिरिक्त मात्रा का हकदार होगा। इसी के अनुसार, उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की पेंशन की अतिरिक्त मात्रा को यथास्थिति 80 वर्ष, 85 वर्ष 90 वर्ष और 100 वर्ष की आयु पूरी कर लेने पर मंजूर किया जा रहा है।

इसमें कहा गया है कि उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश देवेन्द्र दत्त ज्ञानी की रिट याचिका में गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने 15 मार्च 2018 के अपने आदेश में कहा था कि पूर्वोत्तर उच्च न्यायालय न्यायाधीश अधिनियम की धारा 17(ख) के अनुसार पहली श्रेणी में अतिरिक्त पेंशन की मात्रा का फायदा किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को उनकी 80 वर्ष की आयु पूरी होने के पहले दिन से उपलब्ध होगा। इसके बाद, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी भारत के उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय सेवानिवृत्त न्यायाधीश संघ द्वारा दायर रिट याचिका में 3 दिसंबर 2020 को दिए आदेश में इस संबंध में उल्लेख किया।

कितनी सैलरी पाते हैं सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज

30 जनवरी 2018 की इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के चीफ जस्टिस की अपडेटेड सैलरी 2.80 लाख रुपये प्रति महीने हो गई, जो पहले एक लाख रुपये थी। उस समय केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की सैलरी में करीब 200 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी।

इसी तरह से, सुप्रीम कोर्ट के जजों और हाई कोर्ट के चीफ जस्टिसों को हर महीने 2.50 लाख रुपये की सैलरी तय की गई, जो पहले 90,000 रुपये थे। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट के जज को एक लाख रुपये महीने मिलते थे जबकि हाई कोर्ट के जजों की सैलरी 80,000 रुपये प्रति महीने थी। जजों को रिटायर होने तक रहने के लिए आवास मिलता है।

तुलनात्मक रूप से देखें तो राज्यपाल का मूल वेतन भी 2018 में 1.10 लाख रुपये से बढ़ाकर 3.50 लाख रुपये कर दिया गया था। उपराष्ट्रपति का वेतन 1.25 लाख से बढ़ाकर 4 लाख रुपये और राष्ट्रपति का वेतन 1.50 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया था। इसके अलाव उन्हें भवन, गाड़ी, यात्रा, सुरक्षा, चिकित्सा, बीमा आदि सुविधाएं भी मिलती हैं।