स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ जारी हुई अरेस्ट वॉरंट, BJP और योगी कैबिनेट से दिया था इस्तीफा

डेस्क: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Election 2022) से पहले योगी सरकार (Yogi govt) में कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट (swami prasad maurya warrant) जारी हो गया है। दरअसल यह एक पुराना मामला है, जिसमें सुल्तानपुर के एमपी-एमलए कोर्ट ने 24 जनवरी को उन्हें पेश होने का आदेश देते हुए वारंट जारी किया है।

बता दें कि साल 2014 में स्वामी प्रसाद मौर्य बसपा (Bsp) महासचिव और नेता प्रतिपक्ष थे, उस दौरान मौर्य ने देवी-देवताओं को लेकर विवादित बयान दिया था। इसको लेकर मौर्य के खिलाफ पर सात साल पहले धार्मिक भावना भड़काने (hate speech) का मुकदमा दर्ज किया गया था। इसी मामले में पेश न होने पर बुधवार को एमपी-एमएलए कोर्ट उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया।

गिरफ्तारी पर ले रखा था स्टे

बता दें कि यह कोई नया मामला नहीं है। दरअसल यह वारंट पहले जारी किया गया था, लेकिन तब स्वामी प्रसाद मौर्य ने हाईकोर्ट से इस पर स्टे करा लिया था। बीती 6 जनवरी को इसी मामले में कोर्ट ने उन्हें 12 जनवरी को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया था। लेकिन वह जब बुधवार को हाजिर नहीं हुए तो गिरफ्तारी वारंट को पहले की तरह जारी रखा गया है।

कभी बीएसपी में थे नंबर 2 के नेता

कभी बसपा प्रमुख मायावती के करीबी और पार्टी के मुखर चेहरे मौर्य को 1997, 2002 और 2007 में न केवल हर बसपा सरकार में मंत्री बनाया गया था, बल्कि हर बार बसपा के सत्ता से बाहर होने पर विपक्ष के नेता भी थे। यहां तक कि उन्हें बसपा का राष्ट्रीय महासचिव भी बना दिया गया, जिससे वे प्रभावी रूप से पार्टी पदानुक्रम में मायावती के लिए नंबर 2 बन गए।

टिकटों की नीलामी का लगाया था आरोप

2016 में, जब वह विपक्ष के नेता थे, मौर्य ने पार्टी के टिकटों की नीलामी का आरोप लगाते हुए, बसपा छोड़ दिया, मायावती ने एक आरोप का खंडन किया, जिसने आरोप लगाया कि मौर्य ने इसलिए छोड़ दिया क्योंकि उनके बेटे उत्क्रिस्त और बेटी संघमित्रा को टिकट नहीं मिला। जिन सीटों के लिए उन्होंने कथित तौर पर पैरवी की थी।

यूपी चुनाव की पूरी जानकारी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Election 2022) का ऐलान चुनाव आयोग ने 8 जनवरी को किया। 403 सीटों वाली 18वीं विधानसभा के लिए 10 फरवरी से 7 मार्च तक सात चरणों में वोट पड़ेंगे। 10 मार्च को चुनाव के नतीजे (UP Election results) आएंगे। यूपी में सात चरणों (Seven Phase) के तहत 10 फरवरी, 14 फरवरी, 20 फरवरी, 23 फरवरी, 27 फरवरी, 3 मार्च और 7 मार्च को मतदान (Voting) होगा।

10 फरवरी को पहले चरण (First Phase) में पश्चिम यूपी के 11 जिलों की 58 सीटों पर, दूसरा चरण (Second Phase) 14 फरवरी को 9 जिलों की 55 सीटों पर, 20 फरवरी को तीसरे चरण (Third Phase) में 16 जिलों की 59 सीटों पर मतदान होगा। चौथे चरण (Fourth Phase) में मतदान 23 फरवरी को लखनऊ सहित 9 जिलों की 60 सीटों पर होगा। पांचवे चरण (Fifth Phase) में 27 फरवरी को 11 जिलों की 60 सीटों पर, छठे चरण में 3 मार्च को 10 जिलों की 57 सीटों पर और सातवें (Seventh Phase) और अंतिम चरण (Last Phase) का मतदान 7 मार्च को 9 जिलों की 54 सीटों पर किया जाएगा।

17वीं विधानसभा का कार्यकाल (UP Assembly ) 15 मई तक है. 17वीं विधानसभा के लिए 403 सीटों पर चुनाव 11 फरवरी से 8 मार्च 2017 तक 7 चरणों में हुए थे। उस चुनाव में बीजेपी ने 312 सीटें जीतकर पहली बार यूपी विधानसभा (Uttar Pradesh Vidhansabha) में तीन चौथाई बहुमत हासिल किया। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की अगुवाई में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) और कांग्रेस (Congress) गठबंधन 54 सीटें जीत सका। इसके अलावा प्रदेश में कई बार मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती (Mayawati) की बीएसपी (Bahujan Samaj Party) 19 सीटों पर सिमट गई।

इस बार सीधा मुकाबला समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) और भाजपा (Bharatiya Janata Party) के बीच माना जा रहा है। भाजपा योगी आदित्यनाथ ( Yogi Adityanath) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के चेहरे को आगे कर चुनाव लड़ रही है।

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