साइकिल पर बोरा और उसी बोरे से झांकती बेटी, पत्थर दिलों को भी पिघला देगी मजदूर की ये मजबूरी

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अपनी दिव्यांग बेटी को बोरे में रखकर गांव लौटने को मजबूर ये पिता (साभार - गूगल)

नई दिल्ली. कोरोना वायरस संक्रमण से कब दुनिया को मुक्ति मिलेगी, इसका अभी तक किसी को पता नहीं. लेकिन, इसका सबसे बुरा असर, गरीब और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ रहा है. खासकर मजदूरों के लिए दिन काटने मुश्किल हो चुके हैं. इन सब हालातों के बीच मजदूर अपने गांव की ओर पलायन कर रहे हैं.

लॉकडाउन के दौरान ऐसे ही एक मजबूर मजदूर के परिवार की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई है. यह परिवार दिल्ली से उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हुआ है. परिवार में छोटे बच्चे भी हैं. मजदूर की एक बेटी भी है, जो दिव्यांग है. इस बच्ची को सही सलामत घर तक ले जाने के लिए मजदूर को देसी जुगाड़ करना पड़ा.

पिता ने निकाला देसी जुगाड़

मजदूर ने साइकिल के बीच में सफेद बोरा लगाकर अपनी दिव्यांग बेटी को बिठाने का जुगाड़ बनाया है. सफेद प्लास्टिक के बोरे से झांकतीं मासूम बच्ची की आंखें कोरोना के खौफ, भूख, तपती गर्मी, दर्द और मजबूरियों की गवाही दे रही हैं.

इस बच्ची को यह भी नहीं पता कि आखिर उसे इस तरह लटका कर क्यों ले जाया जा रहा है. दुनिया में तबाही मचाने वाला कोरोना आखिर क्या बला है? इस मजदूर के साथ गर्म तपती सड़क पर कुछ बच्चे नंगे पैर भी चल रहे हैं. उनमें से एक बच्ची अपने पिता की साइकिल पर धक्का लगा रही है. शायद पिता की मदद करना चाहती हो या खेल रही हो.