भारतीय सेना ताकत होगी डबल, जल्द मिलेगी स्वदेशी Bharat 52 गन, कुछ सेकंडों में ही गोलियों की बौछार

New Delhi: करगिल (Kargil) में फतह दिलाने में अहम भूमिका निभानी वाली बोफोर्स (Boforce) से भी पावरफुल तोप (Artillery Gun Bharat 52) का निर्माण अब भारत में ही कर लिया गया है।

रक्षा मंत्रालय ने ने बोफोर्स 155 एमएम होवित्जर्स तोप ((Boforce 155 MM Howitzer) (artillery gun (155mm x 52 Calibre) बनाने का काम बाबा कल्याणी की कंपनी भारत फोर्ज (Bharat Forge) को दिया। इस गन को भारत 52 (Bharat 52) का नाम दिया गया है।

भारत फोर्ज (Bharat Forge) ने बताया कि चार गन (Bharat 52) में से तीन गन का ट्रायल अलग-अलग फेज में है और चौथे का ट्रायल अंतिम फेज में है। जल्द ही ये सेना का हिस्सा होंगी। यह कल्याणी समूह द्वारा निर्मित पहली बं’दूक है।

भारत फोर्ज कंपनी ने बनाई

भारत फोर्ज (Bharat Forge) के उप प्रबंध निदेशक अमित कल्याणी ने कहा, ‘हम पहली बंदूक के लिए तीन परीक्षणों और दूसरी बंदूक के तीन परीक्षणों के दौर से गुजरे हैं। एक बार परीक्षण का अंतिम चरण समाप्त होने के बाद हम बिक्री प्रक्रिया शुरू करने के लिए तैयार हैं।’

भारत फोर्ज (Bharat Forge) रक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू की गई सुधार पहल का हिस्सा है। कुछ दिनों पहले ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 101 हथियारों और सैन्य प्लेटफार्मों के आयात पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। इन 101 उत्पादों में आर्टिलरी गन भी शामिल है।

आर्टिलरी गन (155 मिमी x 52 कैलिबर)

आर्टिलरी गन (155 मिमी x 52 कैलिबर) जिसको हम लोग भारत 52 (Bharat 52) कहते हैं इसका वजन 15 टन है और 48 किमी से अधिक की फायरिंग रेंज है। इस गन की ताकत का अंदाजा आप यहीं से लगा लीजिए कि यह 30 सेकंड में छह राउंड फायर कर सकता है।

ATAGS को दुनिया में सबसे उन्नत फील्ड आर्टिलरी सिस्टम में से एक माना जाता है, लेकिन भारत अभी तक उन्हें शामिल नहीं कर पाया है। 2016 में भारत ने अमेरिका से 145 होवित्जर (एक तोपखाने की बंदूक) 750 मिलियन डॉलर में मंगवाई। 155 मिमी x 39 कैलिबर के अल्ट्रा-लाइट हॉवित्ज़र की सीमा 24-39 किमी है, जो कि भारत 52 एएजीएस से काफी कम है।

तीन आर्टिलरी गन परीक्षण के उन्नत चरणों में

Bharat 52 के भारत उप निदेशक कल्याणी ने बताया, ‘हम जो भी उत्पाद बना रहे हैं वो 100 प्रतिशत स्वदेशी हैं। वे 100 प्रतिशत यहीं डिज़ाइन किए गए। तीन आर्टिलरी गन परीक्षण के उन्नत चरणों में हैं। एक परीक्षण के अंतिम चरण में है। यह सभी तरह के परीक्षणों से गुजरी हैं। अब जो परीक्षण किया जा रहा है वो आखिरी परीक्षण है।

भारतीय सेना खरीदना चाहती है

भारतीय सेना कथित तौर पर लगभग 150 ATAGS की खरीद करना चाहती है। कल्याणी ने कहा कि ऐड-ऑन और प्रौद्योगिकी के स्तर के आधार पर प्रत्येक एटीएजीएस की कीमत 15 करोड़ रुपये तक हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘जिन उत्पादों पर हमने ध्यान केंद्रित किया है, वे सभी घरेलू विनिर्माण के लिए हैं।

आर्टिलरी गन जैसे कुछ उत्पादों में यह बहुत स्पष्ट है कि तकनीकि में या समग्र रूप से हमारे जैसा प्रतिस्पर्धी कोई नहीं है, इसलिए हम अपने अंतिम परीक्षणों के समापन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

भारत नहीं रहा आक्रामक

कल्याणी ने कहा, ‘भारत फोर्ज अपने सैन्य हथियारों के लिए भारत के बाहर के बाजारों की भी तलाश कर रहा है। लेकिन, सवारियों के साथ, ‘भारत जैसे जिम्मेदार राष्ट्र के लिए रक्षा आइटम बेचना आसान है। अब, ऐसे कई देश हैं जो हथियार खरीदते हैं जहां हमें नहीं पता कि वे इसके साथ क्या करते हैं। भारत कभी भी कहीं भी आक्रामक नहीं रहा है, इसलिए मैं उन जगहों पर बेचना चाहता हूं जहां इसे बेचना सुरक्षित है और जहां इसे बेचना उचित है।’