दैवीय चमत्कार: इस मंदिर में खुद लगती है आग, अग्नि स्नान करती है माता.. पूरी होती है मनोकामना

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Idana Mata Mandir, दैवीय चमत्कार
दैवीय चमत्कारों से भरा है राजस्थान में स्थित माता रानी का ये मंदिर (साभार-गूगल)

नई दिल्ली। दैवीय चमत्कार की जब भी बात होती है तो भारत का नाम सबसे पहले लिया जाता है. हमारे देश में कई ऐसे मंदिर हैं, जो रहस्यों से भरे हैं. कहीं हजारों लीटर पानी डालने पर भी घड़ा नहीं भरता तो, कहीं मंदिर के खंभे हवा में सालों से झूल रहे हैं. ऐसा ही एक चमत्कारिक मंदिर है ईडाणा माता का मंदिर, जहां माता रानी खुद अग्नि स्नान करती हैं.

बहुत निराली है मां की महिमा

राजस्थान के उदयपुर शहर से 60 किमी दूर अरावली की पहाड़ियों पर यह मंदिर स्थित है. इस मंदिर को ईडाणा माता मंदिर के नाम से जाना जाता है. एकदम खुलै चौक पर बने इस मंदिर के ऊपर कोई छत नहीं है. ईडाणा उदयपुर मेवल की महारानी के नाम से इस मंदिर का नाम प्रसिद्ध है.

अग्नि स्नान करती हैं मां

ईडाणा माता के मंदिर में हर महीने दैवीय चमत्कार देखने को मिल जाता है. दरअसल, इस मंदिर में अपने आप ही हर महीने कम से कम 2-3 बार स्वत: अग्नि प्रज्जवलित हो जाती है. इस आग में माता की मूर्ति को छोड़कर पूरा मंदिर स्वाहा हो जाता है. माता की चुनरी, श्रृंगार का सामान सबकुछ जलकर राख हो जाता है. अंत में बचती है तो सिर्फ मां की मूरत.

माता रानी के अग्नि स्नान को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं. कई बार कुछ लोग यहां दावों की पड़ताल करने आ चुके हैं, लेकिन यह आज भी रहस्य ही है कि इस मंदिर में अग्नि स्वयं कैसे प्रज्जवलित हो जाती है.

भक्तों की है अटूट आस्था

ईडाणा माता के मंदिर में भक्तों की खास आस्था है. मान्यता है कि जिस किसी को भी लकवा हुआ हो, वह माता रानी के दरबार में आकर ठीक हो जाता है. माता रानी के मंदिर में जैसे ही अग्नि प्रज्जवलित होने की खबर मिलती है, आसपास के गावों से श्रद्धालु मंदिर इस चमत्कार को देखने पहुंच जाते हैं.

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मंदिर के पुजारी बताते हैं कि महीने में 2-3 बार माता स्वयं ज्वालादेवी का रूप धारण कर लेती है. देखते ही देखते यह अग्नि विकराल रूप धारण कर सबकुछ स्वाहा कर देती है. कई बार तो आग की लपटे 10 से 20 फुट तक पहुंच जाती हैं.

आज तक नहीं पहुंचा किसी को भी नुकसान

इसे चमत्कार ही कहा जा सकता है कि माता रानी के इस मंदिर में आग की इतनी भीषण लपटे उठने के बावजूद किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ. जिस चबूतरे में माता रानी की मूर्ति रखी है, वहीं पर अग्नि सबसे ज्यादा प्रचंड होती है. माता रानी की चुनरी, वस्त्र और श्रृंगार पूरी तरह राख हो जाता है. इसी वजह से स्थानीय लोग इस चमत्कार को देवी का स्नान मानते हैं.

माता रानी के अग्नि स्नान की वजह से ही यहां आज तक मंदिर का निर्माण नहीं हो पाया. यहां एक और मान्यता है कि जो भक्त माता रानी के अग्नि स्नान के दर्शन करते हैं, उनके जीवन में दुखों का नाश होता है और उनकी हर मनोकामना पूर्ण होती है।

त्रिशूल चढ़ाते हैं भक्त

मनोकामनाएं पूर्ण होने के बाद ईडाणा माता के मंदिर में त्रिशूल चढ़ाने की मान्यता है. वहीं निसंतान दंपत्ति संतान प्राप्ति के लिए यहां झूला चढ़ाने आते हैं. इस मंदिर के प्रति भक्तों का अटूट विश्वास है कि लकवा ग्रसित रोगी मां के दरबार में आकर स्वस्थ्य हो जाता है.