IAS श्रीधन्या सुरेश: टूटी-फूटी झोपड़ी में गुजारे थे गरीबी के दिन, IAS अधिकारी बनी मनरेगा मजदूर की बेटी

नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर IAS और IPS बनने के लिए लाखों युवा हर साल तैयारी करते हैं। हालांकि, यहां तक पहुंचना आसान नहीं है और कुछ चुनिंदा मेहनती युवा ही यह मुकाम हासिल कर पाते हैं। हमारे देश में तमाम ऐसे अफसर हैं, जिन्होंने अपनी लगन और मेहनत के दम पर ना सिर्फ अपने माता-पिता बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है।

आज हम महिला IAS अफसर श्रीधन्या सुरेश की कहानी आपको बता रहे हैं, जिन्होंने पूरी जिंदगी गरीबी में काटी, लेकिन मेहनत करना कभी नहीं छोड़ा। वह यूपीएससी की परीक्षा पास करने वाली पहली आदिवासी महिला भी हैं।

हासिल की थी 410वीं रैंक

साल 2019 में केरल के वयनाड जिले की रहने वाली श्रीधन्या सुरेश ने 2018 में हुई यूपीएससी परीक्षा में 410वीं रैंक हासिल की थी। एक आदिवासी परिवार से ताल्लुक रखने वाली श्रीधन्या की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी। कुछ समय पहले उनके परिवार को घर बनाने के लिए सरकार की ओर से जमीन मिली थी। लेकिन जमीन मिलने के बाद भी उनके पास पैसों की कमी थी। जिसके बाद उनका परिवार घर नहीं बनवा पाया था।

जब श्रीधन्या पढ़ाई कर रही थी तो टूटी-फूटी झोपड़ी में अपने माता-पिता, और दो भाई-बहनों के साथ रहती आ रही थीं। उनके माता- पिता गरीब थे, लेकिन पैसों की कमी कभी भी श्रीधन्या की पढ़ाई के बीच में नहीं आने दी। उन्होंने कोझीकोड के सेंट जोसफ कॉलेज से ग्रेजुएशन की और उसके बाद ही उसी कॉलेज से जूलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली।

दोस्तों ने की मदद

यूपीएससी परीक्षा में तीसरे प्रयास में उन्हें सेलेक्शन इंटरव्यू के लिए हुआ था. उस समय श्रीधन्या के पास दिल्ली आने के लिए पैसे भी नहीं थे, लेकिन दोस्तों से मिलकर उन्होंने पैसे जमा किए और दिल्ली आकर इंटरव्यू दिया।

श्रीधन्या ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मैं राज्य के सबसे पिछड़े जिले से हूं। यहां से कोई आदिवासी आईएएस अधिकारी नहीं हैं, जबकि यहां पर बहुत बड़ी जनजातीय आबादी है। मुझे आशा है कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए सभी बाधाओं को दूर करने में एक प्रेरणा का काम करेगी।’