IAS प्रदीप सिंह: पेट्रोल पंप पर काम करने वाले का बेटा बना IAS अफसर, कभी पिता ने फीस भरने के लिए बेच दिया था घर

नई दिल्ली। हर माता-पिता अपने बच्चों का सपना पूरा करने के लिए दिन रात मेहनत करते हैं, ताकि वह पढ़-लिखकर अफसर बने और उनका नाम रोशन करे। लेकिन, गरीबी ऐसे माता-पिता के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है। वह चाहकर भी अपने बच्चे के सपने पूरे नहीं कर पाते। इन सबके बावजूद हमारे देश में कई ऐसे होनहार बच्चे हैं जो बिना किसी सुख-सुविधा के आज भी अपने माता-पिता का नाम रोशन कर रहे हैं।

कुछ ऐसी ही कहानी है भारत का दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश में पले बढ़े आईएएस प्रदीप सिंह की। उनके संघर्ष की कहानी आज मिसाल बन चुकी है और लाखों करोड़ों युवाओं को हौसला दे रही है।

कौन हैं आईएएस प्रदीप सिंह

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में जन्मे आईएएस प्रदीप सिंह का जन्म एक निर्धन परिवार में हुआ था। एक समय ऐसा भी था जब उनके पिता को बच्चों की पढ़ाई के लिए अपना घर बेचना पड़ा था। प्रदीप के पिता एक पेट्रोल पंप में नौकरी किया करते थे। इन सबके बावजूद मात्र 21 साल की उम्र में प्रदीप सिंह ने यूपीएससी का एक्जाम क्रैक कर अपने माता पिता का नाम रोशन किया।

बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहता था

एक इंटरव्यू में प्रदीप के पिता मनोज सिंह ने कहा- मैं शुरू से चाहता था कि अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दूं। इससे वे अपनी जिंदगी में बेहतर कर सकें। प्रदीप ने एक दिन मुझसे कहा कि वह यूपीएससी की परीक्षा देना चाहता है, लेकिन मेरे पास पैसे की कमी थी।

प्रदीप के पिता ने अपने बुरे दिनों के बारे में बताते हुए कहा, बेटे की पढ़ाई के लिए मैंने अपना घर बेच दिया। पिता के अलावा प्रदीप के भाई संदीप एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं। प्रदीप कहते हैं कि उनके भाई ने ही उन्हें सिविल सेवा की परीक्षा के लिए गाइड किया था।

बीकॉम के बाद दी सिविल सेवा परीक्षा

प्रदीप ने 10वीं और 12वीं दोनों की परीक्षा 81 फीसदी नंबरों के साथ पास की। इसके बाद उन्होंने इंदौर स्थित देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय से बीकॉम किया था। बीकॉम करने के बाद वह सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली आ गए थे।

यूपीएससी में प्रदीप का ऑप्शनल सब्जेक्ट सोशियॉलजी था। प्रदीप ने लगभग एक साल तैयारी की और पहले प्रयास में परीक्षा पास कर ली।

आसान नहीं थी तैयारी

प्रदीप के मुताबिक वह रोजाना सुबह 6 बजे उठते थे। इसके बाद वह दोपहर में कुछ देर आराम करने के बाद फिर से पढ़ाई करते थे। इस तरह प्रदीप ने गरीबी और मुश्किलों से लड़ते हुए साल 2018 में यूपीएससी की परीक्षा में 93वीं रैंक हासिल करके पिता का नाम रोशन कर दिया।

अपने माता-पिता को दिया श्रेय

प्रदीप ने इस सफलता का क्रेडिट अपने माता-पिता को दिया है। प्रदीप के मुताबिक- एग्जाम में सफल होने की खबर सुनकर मुझे यकीन नहीं हो रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे मैं सपना देख रहा हूं।

प्रदीप के मुताबिक, विमिन एम्पारवेंट के लिए लोगों में बिहेवियरल चेंज लाने की कोशिश करूंगा। मैं छोटे से अंश में भी अगर कॉन्ट्रिब्यूशन दे पाऊंगा तो भी बदलाव आएगा। प्रदीप के मुताबिक, हेल्थ, एजुकेशन, लॉ ऐंड ऑर्डर और विमिन एम्पावरमेंट। ये चार चीजें सोसायटी का पिलर हैं। प्रदीप के न सिर्फ सपने बड़े हैं बल्कि इरादे भी बहुत ऊंचे और सेवाभाव के हैं।