सेना को पता है धोखेबाज चीन की फितरत, IAF चौकस.. रातभर की अपाचे हेलीकॉप्टर से निगरानी

IAF Active China Border Apache Chopper: लद्दाख की गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच दो महीने से जारी तनातनी के बीच अपाचे हेलीकॉप्टर की मदद से निगरानी जारी है। चीनी सैनिक पेट्रोल पॉइंट 14 से 1.5-2 किलोमीटर पीछे हट गए हैं। हालांकि चीन की फितरत को भारतीय सेना बखूबी समझती है। इसलिए अभी कोई जोखिम नहीं लिया जा सकता। उत्तराखंड बॉर्डर पर चौकस भारतीय वायुसेना ने चीन और नेपाल सीमा के पास चॉपर से तीन बार उड़ान भरकर जायजा लिया।

उत्तराखंड से सटी चीन सीमा पर भी वायुसेना की सक्रियता बढ़ने लगी है। उत्तरकाशी के पास चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी का वायुसेना परीक्षण कर रही है। सोमवार को वायुसेना के हेलिकॉप्टर (IAF Active China Border Apache Chopper) ने सीमा तक उड़ान भरी और हवाई पट्टी पर तीन बार टेक ऑफ और लैंडिंग की। पिछले महीने दस जून को भी वायुसेना के मालवाहक विमान एएन-32 ने यहां लैंडिंग और टेकऑफ किया था।

चिन्यालीसौड़ में निर्माणाधीन हवाई पट्टी का काम अंतिम चरण में है। यह उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। यहां से चीन सीमा की हवाई दूरी लगभग 125 किलोमीटर है। यहां पर वायुसेना ने ऑपरेशन गगनशक्ति के तहत भी अभ्यास किया था। पिछले शनिवार को भी भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट ने एक महीने के अंदर दूसरी बार उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से सटी चीन और नेपाल सीमा पर उड़ान भरकर दोनों सीमाओं का जायजा लिया था।

भारत-चीन-नेपाल सीमा पर फाइटर जेट से जायजा

सुरक्षा बलों को मदद पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना ने एक महीने में दूसरी बार फाइटर जेट से सीमा का जायजा लिया। शनिवार को लगभग दस मिनट तक यह फाइटर जेट भारत चीन-नेपाल सीमा के आसमान में नजर आया।

भारतीय सुरक्षा बलों की चौकसी के बाद से चीन सीमा पर चीन के सुरक्षा बलों की कोई हरकत नजर नहीं आई है। शुक्रवार को चार लड़ाकू विमानों ने देहरादून में जौलीग्रांट एयरपोर्ट से आवाजाही की थी। लड़ाकू विमानों की तेज आवाजों से लोग घरों से निकलकर छतों पर देखने के लिए आ गए। बता दें कि भारतीय वायुसेना के विमानों ने करीब तीन साल पहले भी कई बार उड़ान भरी थी।

एक महीने पहले चीन सीमा में लिपुलेख पर बने भारतीय टिनशेड हटाने पर विवादित झंडे और बैनर फहराए गए थे। नेपाल ने काला पानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख को अपने नए नक्शे में दिखाकर विवाद पैदा किया था। तब से नेपाल सेना भारतीय सीमा के पास बॉर्डर आउट पोस्ट (बीओपी) बनाने में लगी है। नेपाल, भारतीय सीमा पर अपना सुरक्षा तंत्र मजबूत करने में जुटा है।

चीन की मदद से नेपाल का 4-जी प्लान

चीन की संचार कंपनियों की मदद से नेपाल भारतीय सीमा पर फोर जी सेवा की सुविधा शुरू करने जा रहा है। नेपाल, चीन और भारत के ट्राई जंक्शन पर नेपाल की तरफ चीनी कंपनियां फोर जी सर्विस शुरू करने जा रही हैं।

ब्यास के पास नेपाल टेलीकॉम के टावर को फोर जी सेवा से जोड़ने जा रहा है। इससे छंगरू के लोगों को जल्द हाईस्पीड सेवा मिलेगी। साथ ही चीन सीमा के पास तिंकर में भी स्काई कंपनी के टावर को लगाने की योजना नेपाल बना रहा है। चीन की Huawei कंपनी नेपाली सीमा पर संचार नेटवर्क को और अधिक स्मार्ट बनाएगी।

चीन सीमा पर गुंजी गांव का थाना हुआ सक्रिय

पिथौरागढ़ जिले में लिपुलेख के भारत, नेपाल और चीन सीमा के ट्राई जंक्शन के नजदीकी गांव गूंजी में पुलिस के अधीन एक ग्रीष्मकालीन थाने को सक्रिय कर दिया गया है। व्यापार और मानसरोवर यात्रा को देखते हुए थाने को 4 महीने के लिए पहले भी चालू रखा जाता था। इस बार न तो भारत-चीन व्यापार चल रहा है, न ही कैलाश मानसरोवर यात्रा लेकिन सीमा पर जारी विवाद को देखते हुए बॉर्डर इलाके में पुलिस को भी एक्टिव मोड में रखा गया है।

पिथौरागढ़ की एसपी प्रीति प्रियदर्शनी ने चीन बॉर्डर लिपुलेख तक का दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने थाने का भी निरीक्षण किया। इस दौरान एसपी प्रीति प्रियदर्शिनी ने गुंजी थाने में पुलिसकर्मियों की ब्रीफिंग की.साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्र में पुलिसकर्मियों को होने वाली समस्याओं पर भी चर्चा की । एसपी ने आपदा संबंधी उपकरणों को सुव्यवस्थित रखने की हिदायत देते हुए संचार व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए।

पिथौरागढ़-चंपावत के दुर्गम इलाकों में मोबाइल टावर

पिथौरागढ़ और चंपावत के दुर्गम इलाकों में नेटवर्क की समस्या को देखते हुए 16 मोबाइल टावर लगाए जाएंगे। ये टावर सरकारी कंपनी बीएसएनएल नहीं बल्कि निजी कंपनी जिओ लगाएगी। ये काम भारत सरकार के उपक्रम सार्वभौम सेवा दायित्व कोष (USOF) ने जिओ को दे दिया है। यूएसओएफ ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर संचार सेवा उपलब्ध कराने के लिए फंड मुहैया कराता है। यूएसओएफ ने इस कार्य के लिए जो टेंडर जारी किया उसमें 4 जी स्पेक्ट्रम अनिवार्य कर दिया।

चूंकि अब तक बीएसएनएल के पास 4 जी स्पेक्ट्रम नहीं है, इस बहाने उसे टेंडर से बाहर करना आसान हो गया। जबकि अब तक ये काम बीएसएनएल को ही मिलता था। लेकिन इस बार पूरे देशभर के दुर्गम क्षेत्रों 300 से ज्यादा टावर लगाने का काम जिओ को मिला है।