पाक में हिंदू युवक का अपहरण, लोग बोले-मरना पसंद पर इस्लाम मंजूर नहीं; बताया तब्लीगियों की साजिश

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Pakistan Sindh Viral Video
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में प्रदर्शन करती हिंदू महिलाएं (साभार- ट्विटर)

नई दिल्ली. अल्पसंख्यकों पर धार्मिक उत्पीड़न के मामले में पाकिस्तान दुनियाभर में बदनाम रहा है. इन दिनों पूरी दुनिया कोरोना संकट से जूझ रही है, लेकिन पाकिस्तान में हिंदुओं का उत्पीड़न जारी है. पाकिस्तान के सिंध प्रांत में धर्म के नाम पर उत्पीड़न का नया मामला सामने आया है.

दरअसल, पाकिस्तान में इस्लामिक संगठन तब्लीगी जमात अल्पसंख्यकों को धर्म परिवर्तन करने के लिए मजबूर कर रही है. हाल ही में एक हिंदू युवक ने जब इस्लाम अपनाने से इंकार किया तो उसका अपहरण कर लिया गया. इसके बाद से सिंध में यह मुद्दा भड़क उठा है.

तब्लीगी जमात पर सीधे आरोप

सिंध में रहने वाले हिंदुओं ने सीधे सीधे तब्लीगी जमात पर प्रताडित करने और उनके घरों को उजाड़ने के आरोप लगाए हैं. इसके साथ ही जमात पर ही हिंदू लड़कों के अपहरण का आरोप भी लगाया जा रहा है.

सोशल मीडिया पर इससे जुड़े दो वीडियो साझा किए गए है. इसमें से एक वीडियो में पाकिस्तान के अल्पसंख्यक भेल हिंदू जबरन धर्म परवर्तन का विरोध करते हुए दिख रहे हैं. इस वीडियो में कुछ महिलाएं हैं जिन्होंने तब्लीगी जमात के खिलाफ पोस्टर पकड़े हुए हैं. यह वीडियो नासूरपुर, मटियार का बताया जा रहा है. प्रदर्शन में कुछ बच्चे और महिलाएं देखे जा सकते हैं.

मर जाएंगे पर इस्लाम नहीं अपनाएंगे

वीडियो में महिलाएं कहती दिख रही हैं, ‘हम मरना पसंद करेंगे, लेकिन कभी इस्लाम नहीं अपनाएंगे।’ एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा कि उनकी संपत्तियों को हड़प ली गई, घरों में तोड़फोड़ की गई और उन्हें पीटा गया है। महिला ने कहा कि उन्हें कहा जा रहा है कि अगर घर वापस चाहिए तो इस्लाम अपनाना होगा।

दूसरे वीडियो में एक महिला जमीन पर लेटी हुई दिख रही है. वह बता रही है कि उसके बेटे का कैसे तब्लीगी जमात के सदस्यों ने अपहरण कर लिया. वीडियो में महिला अपने बेटे को रिहा कराने के लिए तब्लीगी जमात से रहम की भीख मांगती दिख रही है।

इमरान राज में बढ़े हमले

यहां गौर करने वाली बात है कि पाकिस्तान पर लंबे समय से हिंदू और ईसाईयों के जबरन धर्मांतरण के आरोप लगते रहे हैं. यह आवाज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठने के बावजूद भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाती. खुद पाकिस्तान का मानवाधिकार आयोग मान रहा है कि इमरान खान के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों पर धार्मिक रूप से प्रेरित हमले बढ़े हैं.