चीन ने 94 दिन बाद माना Galwan Valley में Indian Army के शौर्य का सच, अब तक करता रहा इंकार

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चीन ने 94 दिन बाद माना Galwan Valley में Indian Army के शौर्य का सच, अब तक करता रहा इंकार
(Image Courtesy: Google)

नई दिल्ली. भारत-चीन तनाव (Indo China Tension) के बीच गलवान घाटी (Galwan Valley) में हुई घटना के 94 दिन बाद चीन ने आखिरकार मान लिया है कि उसके सैनिकों की भी इस झ;ड़प में जान गंवानी पड़ी थी. चीन अब तक यह मानने को तैयार ही नहीं था कि गलवान में उसकी सेना को कोई नुकसान पहुंचा. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम (Global Times) के एडिटर ने अपने बड़बोलेपन के चलते अपनी ही सेना और सरकार की पोल खोल दी.

चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स (Global Times) के एडिटर ने माना है कि गलवान घाटी में चीन की सेना को भी नुकसान पहुंचा था और वहां कुछ जवानों की जान गई थी.

राजनाथ के बयान पर Global Times Editor ने किया ट्वीट

ग्लोबल टाइम्स (Global Times) के एडिटर इन चीफ हू झिजिन ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के एक बयान को ट्वीट कर लिखा कि जहां तक मुझे पता है कि गलवान घाटी (Galwan Valley) की झड़प में चीनी सेना में मरने वालों की संख्या भारत के 20 के आंकड़े से कम थी.

Global Times के एडिटर ने आगे लिखा, इतना ही नहीं कोई भी चीनी सैनिक भारत ने बंदी नहीं बनाया था, बल्कि चीन ने भारत के सैनिकों को बंदी बनाया था. आपको बता दें कि ग्लोबल टाइम्स चीन के पीपुल्स डेली का अंग्रेजी अखबार है, जो चीन की सत्ताधारी पार्टी चाइनीज़ कम्युनिस्ट पार्टी का ही पब्लिकेशन है.

राजनाथ के बयान ने खोल दी चीन की पोल

चीन ने इस बात को तब कबूला है, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने गुरुवार को राज्यसभा में चीन सीमा पर जारी तनाव की जानकारी देश को दी. राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत सभी नियमों और समझौतों का पालन कर रहा है, लेकिन चीन की ओर से बार-बार इनका उल्लंघन किया जा रहा है.

कुछ हफ्तों पहले चीन की सरकार ने गलवान घाटी (Galwan Valley) में मारे गए चीनी जवानों के परिवारों को कहा कि वे इनका अंतिम संस्कार न करें न ही कोई निजी समारोह आयोजित करें. चीन की सरकार ऐसा करके Galwan Valley में हुई घटना को छिपाना चाहती थी. चीन में मौजूद अमेरिकी खुफिया सूत्रों ने यह जानकारी दी है.

गुपचुप तरीके से कराया अपने सैनिकों का अंतिम संस्कार

खुफिया सूत्रों के मुताबिक चीन की सिविल अफेयर्स मिनिस्ट्री ने गलवान घाटी में मारे गए चीनी सैनिकों के परिवारों को कहा है कि वो अंतिम संस्कार के पारंपरिक तरीके भूल जाएं.

चीन के मंत्रालय ने कहा कि अगर अंतिम संस्कार करना है तो किसी सुनसान इलाके में जाकर करें. अंतिम संस्कार पूरा करने के बाद किसी तरह का समारोह आयोजित न करें. हालांकि, सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण फैलने का डर दिखाकर अंतिम संस्कार करने से मना किया है. बीजिंग में मौजूद सरकार चाहती है कि चीन के लोगों को गलवान घाटी (Galwan Valley) की घटना और उसमें मारे गए चीनी सैनिकों के बारे में कम से कम लोगों को पता चले.

सता रहा था पीएलए की बदनामी की डर

चीन को डर है कि अगर यह गलवान घाटी (Galwan Valley) में मारे गए चीनी सैनिकों की सूचना चीन के या अंतरराष्ट्रीय सोशल मीडिया में फैली तो पूरे देश में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की थू-थू हो जाएगी. इसलिए वो अपने जवानों के अंतिम संस्कार को भी छिपाकर रखना चाहते हैं. हालांकि, चीन के लोगों के बीच Galwan Valley की खबर तेजी से फैल चुकी है. द गार्जियन ने जून के अंत में एक रिपोर्ट लिखी थी जिसमें बताया था कि भारतीय जवानों की श हा;दत और उनके अंतिम संस्कार के वीडियो चीन के लोगों के पास सोशल मीडिया से पहुंच रहे हैं.

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चीन के लोग भारतीय जवानों का ससम्मान अंतिम संस्कार देखकर आपस में ये बातें कर रहे हैं कि चीन के सैनिकों का क्या हुआ. चीन के मारे गए सैनिकों को इस तरह का सम्मान क्यों नहीं दिया गया. इस पर चीन की सरकार का जवाब ये है कि महामारी के समय में सरकार ने अंतिम संस्कार के पारंपरिक तरीकों को रोक रखा है. दुनिया भर के एक्सपर्ट मानते हैं कि चीन की यह चुप्पी और शांति से अंतिम संस्कार करने को कहना ये बताता है कि जल्द ही चीन अंतिम संस्कार के नए कानून ला देगा. बीजिंग में बैठी सरकार नहीं चाहती कि चीन के लोगों को गलवान घाटी में उसकी हरकतों का पता चले.