दूसरे विश्व युद्ध से जल रही इस शिव मंदिर में अखंड ज्योति, सैनिक पहली सैलरी करते हैं यहां दान

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Gadoli Shiv Mandir
(Image Courtesy: Google)
New Delhi: शिव मंदिर: देश सीमाओं पर वतन के रखवाली में तैनात रण बांकुरों का एक ऐसा गांव (Gadoli Shiv Mandir) है जिनकी सरहद पर रक्षा खुद भगवान शंकर करते हैं। यही मान्यता है कि यहां गांव के नीलकंठ महादेव मंदिर में द्वितीय विश्व युद्ध के समय से अखंड ज्योति जल रही है।

जी, हां हम बात कर रहे है भीलवाड़ा जिले के सैनिकों के गांव गाडौली की। यहां भगवान शिव (Gadoli Shiv Mandir) के मन्दिर में द्वितीय विश्‍वयुद्ध के समय सैनिकों की रक्षा के लिए शुरू की गयी अखण्‍ड जोत आज भी अनवरत जल रही है।

800 से ज्यादा रिटायर्ड सैनिक

जनजाति बाहुल्‍य क्षेत्र जहाजपुर में स्थित इस गांव की आबादी करीब 5 हजार है। भले ही आबादी में छोड़ा हो लेकिन गाडौली गांव में ऐसा कोई घर नहीं जहां से भारतीय रक्षा सेनाओं में सैनिक के रूप में भर्ती होकर देश की सीमाओं पर तैनात न हो। अभी भी इस गांव में 8 सौ से ज्‍यादा तो रिटायर्ड सैनिक ही है जो आज भी अपनी बहादुरी के किस्‍से सुनाते नहीं थकते हैं।

ये है भगवान शिव को लेकर मान्यता

गाडौली के नीलकण्‍ठ महादेव को लेकर ग्रामीणों में यह मान्‍यता है कि भगवान शिव इस गांव के सैनिक की स्‍वंय रक्षा करते हैं। इसलिए जब सैनिक सेना में भर्ती होता है तो अपनी पहली तनख्‍वाह मन्दिर में चढ़ाता है। यहां तक की मकान बनाने पर एक पट्टी और 5 ईंट भी मन्दिर पर चढ़ायी जाती हैं। दो शिवलिंग वाले इस मन्दिर की एक ओर खासीयत है कि केवल श्रावण और बैशाख माह में ही भगवान शिव को पोशाक नहीं पहनाते हैं, बाकि 10 माह भगवान शिव पोशाक में ही दर्शन देते हैं।

80 साल के ‘जवान’ की फड़कती भुजाएं

एक दो नहीं तीन और चार पीढ़ियों से भारतीय सेना में भर्ती होकर सरहद पर देश की रक्षा करने वाले रिटायर्ड सैनिक रामचन्‍द्र की भुजाएं 80 साल की उम्र में फड़कती हैं तो ऑपरेशन कारगील में इस गांव से एकलौते शहीद ओमप्रकाश परिहार राजकीय सिनीयर सैकेण्‍ड्री स्‍कूल के प्रिसिंपल धर्मराज सिंह मीणा कहते है कि आज भी इस गांव के बच्‍चों मे सेना में भर्ती होने का जज्‍बा बरकरार है।

सैन्य जज्बा यहां परिवार की परंपरा और खून में शामिल

हर साल इस छोटे से गांव से 20 से अधिक सैनिक सीमाओं पर तैनात होने जाते है। गांव के रणजीत सिंह मीणा बताते हैं कि द्वितीय विश्‍व युद्ध में लड़ाई लड़ने वाले मेरे दादा लेफ्टिनेंट लाडू राम मीणा की ब्रिटीश शासन में शुरू हुई जंगी ईनाम पेंशन तीसरी पीढ़ी में मुझे मिल रही है।

भगवान शिव की रक्षा से रणबांकुरों के गांव गाडौली से पिछले 72 से अधिक वर्षों में बस ऑपरेशन कारगील विजय के समय अन्‍नतनाग में सीआपीएफ के सुबेदार ओमप्रकाश आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए थे। बाकी आज भी देश की सरहदों पर इस गांव के रणबांकुर सीना तान देश रक्षा में जुटे हुए हैं।