चीन-पाकिस्तान की दोगुनी बढ़ी टेंशन, अक्टूबर में भारत आ रहे 5 और Rafale Jets

नई दिल्ली. भारत-चीन से तनाव के बीच भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) की ताकत और बढ़ने जा रही है. अगले महीने यानी अक्टूबर में 5 और राफेल विमान (Rafale Jets) भारत पहुंच रहे हैं. इन विमानों (Rafale Jets) को पश्चिम बंगाल में स्थित कलईकुंडा एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात किया जाएगा.

अंबाला में तैनात किए गए पांच राफेल जेट्स के बाद, इन पांचों Rafale Jets को चीन से लगती पूर्वी सीमा पर तैनात करने की तैयारी जारी है.

भारत ने Rafale Jets में कराए मोडिफिकेशन

चीन से लगती सीमा में गहमागहमी को देखते हुए राफेल (Rafale Jets) में भारत ने अपने हिसाब से कुछ मोडिफिकेशन भी करवाएं हैं. जिससे कम तापमान में भी यह विमान आसानी से स्टॉर्ट हो सकता है. पहले बैच में भारत पहुंचे 5 राफेल विमानों के 250 घंटे से भी ज्यादा की उड़ान और फील्ड फा;य;रिंग टेस्ट किए जा चुके हैं. इन विमानों को अंबाला में 17 गोल्डन एरो स्क्वाड्रन में शामिल किया गया है.

चीन के जे-20 पर भारी पड़ेगा राफेल

भारतीय राफेल (Rafale Jets) के मुकाबले में चीन का चेंगदू J-20 और पाकिस्‍तान का JF-17 विमान हैं. मगर ये दोनों ही राफेल के मुकाबले थोड़ा कमतर हैं. चीनी J-20 का मेन रोल स्‍टील्‍थ फाइ’टर का है, वहीं राफेल को कई कामों में लगाया जा सकता है. J-20 की बेसिक रेंज 1,200 किलोमीटर है जिसे 2,700 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है.

J-20 की लंबाई 20.3 मीटर से 20.5 मीटर के बीच होती है. इसकी ऊंचाई 4.45 मीटर और विंगस्‍पैन 12.88-13.50 मीटर के बीच है यानी यह राफेल (Rafale Jets) से खासा बड़ा है. पाकिस्‍तान के पास मौजूद JF-17 में चीन ने PF-15 मिसा’इलें जोड़ी हैं मगर फिर भी यह राफेल के मुकाबले में कमजोर है.

अगले साल के अंत तक भारत आ जाएंगे सभी राफेल

भारत ने फ्रांस के साथ 36 राफेल विमानों (Rafale Jets) की खरीद के लिए सौदा किया था. 36 राफेल विमानों में से 30 विमान होंगे और छह प्रशिक्षण विमान. प्रशिक्षण विमानों में दो सीट होंगी और उनमें ल’ड़ा’कू विमान वाली लगभग सभी विशेषताएं होंगी. राफेल विमान, रूस से सुखोई विमानों की खरीद के बाद 23 वर्षों में ल’ड़ा’कू विमानों की भारत की पहली बड़ी खरीद है.

घा’तक ह’थि यारों से लैस हैं ये राफेल

भारत में जो राफेल (Rafale Jets) आए हैं, उनके साथ Meteor बियांड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल, MICA मल्‍टी मिशन एयर-टू-एयर मिसाइल और SCALP डीप-स्‍ट्राइक क्रूज मिसा’इल्‍स लगी हैं. इससे भारतीय वायुसेना के जांबाजों को हवा और जमीन पर टारगेट्स को उड़ाने की जबर्दस्‍त क्षमता हासिल हो चुकी है.

Meteor मिसाइलें नो-एस्‍केप जोन के साथ आती हैं यानी इनसे बचा नहीं जा सकता. यह फिलहाल मौजूद मीडियम रेंज की एयर-टू-एयर मिसा’इलों से तीन गुना ज्‍यादा ताकतवर हैं. इस मिसाइल सिस्‍टम के साथ एक खास रॉकेट मोटर लगा है जो इसे 120 किलोमीटर की रेंज देता है.

चीन की किलेबंदी को ध्व’स्त करेगा राफेल

चीन ने लद्दाख से सटे अपने रुटोग काउंटी, नागरी कुंशा एयरपोर्ट, उत्‍तराखंड सीमा पर मानसरोवर झील, सिक्किम से सटे श‍िगेज एयरपोर्ट और गोरग्‍गर हवाई ठिकाने, अरुणाचल प्रदेश से सटे मैनलिंग और लहूंजे में सतह से हवा में मा’र करने वाली म‍िसा’इलें तैनात की हैं. इन ठिकानों पर चार से पांच म‍िसा’इल लॉन्‍चर तैनात हैं.

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इसके अलावा उनकी मदद के लिए रेडॉर और जेनेटर भी दिखाई दे रहे हैं. कुछ तस्‍वीरों में नजर आ रहा है कि चीनी मिसाइलें भारत से होने वाले किसी हवाई हमले के खतरे को देखते हुए पूरे अ’लर्ट मोड में है.