कोरोना: इंडिया में फंसे बच्चों को वापस लाने के लिए तड़प रहे NRI माता-पिता

0
377
parents seek visit visas for children
(Image Courtesy: Google)
New Delhi: कोरोना संकट की वजह से भारतीय मूल UAE नागरिकों के बच्चे भारत में बिना वीजा के फंसे हुए हैं। अपने बच्चों को वापस लाने के लिए अभिभावकों ने भारतीय और यूएई अधिकारियों से अपील की है कि वे उनके बच्चों को यूएई वापस आने की अनुमति दें।

नाबालिग बच्चों के माता-पिता ने अधिकारीयों से विनती करते हुए कहा है कि उनके बच्चों विजिट वीजा पर यात्रा करने की अनुमति दें ताकि बच्चे अपने माता-पिता के पास वापस जा सकें। कुछ मामलों में अभिभावकों ने बताया कि 21 साल की उम्र पार कर चुके बच्चे यात्रा नहीं कर सकते क्योंकि यूएई भारत के लोगों के लिए विजिट वीजा जारी नहीं करता।

ऐसे कई लोग डर रहे हैं कि उनके जनरल डायरेक्टरेट ऑफ़ रेजिडेंसी एंड फॉरेन अफेयर्स (GDRFA) और फेडरल अथॉरिटी फॉर आइडेंटिटी एंड सिटिजनशिप (ICA) की मंजूरी उनके कोविद-नकारात्मक परीक्षा परिणामों के साथ समाप्त हो जाएगी।

खलीजटाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में फंसे बच्चों की 200 माओं के एक ग्रुप ने #takemetomom की शुरुआत की है। इस ग्रुप की ऐडमिनिस्ट्रेटर डॉ नीता सलाम ने कहा, ‘अपने बच्चों से मिलने के लिए परेशान कई माता-पिता ने अनुरोध आ रहे हैं। तो कई ने रेजीडेंसी वीजा के लिए आवेदन किया है, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली है। इसके अलावा कोरोना की वजह से कई वीजा एप्लीकेशन रद्द कर दिए गए हैं, तो वहीं कुछेक के वीजा एक्सपायर हो गए हैं।’

भारतीय प्रवासी और प्रसिद्ध टैरो रीडर श्रद्धा सल्ला मार्च से अपनी बेटियों आरना (15) और सुनेहरा (13) के साथ मुंबई में फंसी हुई हैं, जबकि उनके पति दुबई में हैं। महामारी के विकराल रूप लेने से पहले सल्ला परिवार दुबई को अपना दूसरा घर बनाने की तैयारी में था। हालांकि शारदा के पास यूएई का वैध वीजा है, लेकिन उनकी बेटियां नहीं हैं।

श्रद्धा सल्ला ने बताया, ‘मुझे अपनी बेटियों के जन्म प्रमाण पत्र लेने हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश दिल्ली में यूएई दूतावास बंद है और ऐसे में मैं अधूरी कागजी कार्रवाई के साथ आगे की प्रक्रिया नहीं कर सकती हूं। श्रद्धा ने कहा, ‘मैं पिछले 4-5 सालों से कुछ हफ्तों के लिए दुबई की यात्रा की कर रही थी। इस साल फरवरी में हमने संयुक्त अरब अमीरात में शिफ्ट होने के लिए प्रोसेस शुरू किया था। हमें उम्मीद थी कि बेटियों के स्कूल शुरू होने से पहले उनकी रेजिडेंसी प्रक्रियाओं को भी पूरा कर लेंगे।’

जब से भारत ने फंसे हुए प्रवासियों के लिए उड़ानों की अनुमति देना शुरू किया है, श्रद्धा ने अपनी बेटियों के साथ संयुक्त अरब अमीरात वापस जाने के लिए हर संभव दरवाजा खटखटाया है। श्रद्धा ने आगे कहा, ‘इससे पहले जब मेरी बेटियों के पास अमेरिकी वीजा था, उन्हें अलग यूएई टूरिस्ट वीजा की जरूरत नहीं थी। मैंने 28 मई को एक विजिट वीजा के लिए आवेदन किया और 2 जुलाई को मंजूरी मिल गई। मंजूरी मिलने के बाद मैंने तुरंत अपना कोरोना टेस्ट कराया और संबंधी जरुरी अनुमति प्राप्त करने के बाद दुबई के लिए अपने टिकट बुक कर लिए।’

एमिरेट्स से बोर्डिंग पास प्राप्त करने और हवाई अड्डे पर अपना सामान चेक-इन करने के बाद भी श्रद्धा और उनकी बेटियों को आखिरी समय में यात्रा नहीं करने दी गई। श्रद्धा ने आगे कहा, हवाईअड्डे पर घंटों इंतजार करने के बाद हमें घर से वापस लौटना पड़ा। मेरा GDRFA अनुमोदन 27 जुलाई तक समाप्त हो जाएगा। मैंने अपना पैसा, अपनी एनर्जी और अपने बच्चों से मिलने की उम्मीद तक खो दी।’

बेटों के मामले में परिस्थितियां और भी गंभीर

दुबई में शिक्षिका मोनोनिता चटर्जी का 21 वर्षीय बेटा अधिराज महाराष्ट्र के औरंगाबाद में भारतीय होटल प्रबंधन संस्थान (IIHM) का छात्र है। मोनोनिटा ने कहा, ‘मेरे बेटे का कॉलेज मार्च के अंत में बंद हो गया और उन्होंने किसी भी छात्र को कैंपस या हॉस्टल में रखने से मना कर दिया। मेरे बेटे को तुरंत कैंपस से निकलना पड़ा।’

मोनोनिता के मुताबिक, भारत में लॉकडाउन से पहले आदिराज इस उम्मीद के साथ दिल्ली गया कि अगर भारत में हवाई यात्रा फिर से शुरू हुई है, तो यह पहले देश की राजधानी से शुरू होगी। तबसे आदिराज गुड़गांव के एक सरकारी गेस्टहाउस में अकेले फंसा हुआ है। उसने बाहर कदम नहीं रखा, सिर्फ खाने के लिए ही रसोई तक जाता है।