चीन से बातचीत फेल हुई तो लद्दाख में हम सैन्य कार्रवाई को तैयार: CDS जनरल बिपिन रावत

0
1002
General Bipin Rawat
(Image Courtesy: Google)

नई दिल्‍ली। भारत-चीन के बीच जारी सीमा विवाद पर चीफ आफ डिफेंस स्‍टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि लद्दाख में चीनी अतिक्रमण से निपटने के लिए सैन्‍य विकल्‍पों पर भी विचार हो रहा है। एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में जनरल बिपिन रावत ने ये बात कही।

इसके साथ ही जनरल रावत ने कहा कि भारत हमेशा शांति से मसले को सुलझाना चाहता है। लेकिन, अगर एलएसी की यथास्थिति बहाल नहीं होती तो सेना एक्शन ले सकती है।

क्या बोले जनरल रावत

हिंदुस्‍तान टाइम्‍स को दिए इंटरव्यू में जनरल रावत ने कहा कि अगर चीन के साथ बातचीत फेल होती है तो सैन्‍य विकल्‍पों पर विचार किया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और राष्‍ट्रीय सुरक्षा के जिम्‍मेदार लोग इस कोशिश के साथ सभी विकल्‍पों पर विचार कर रहे हैं कि पीएलए लद्दाख में पहले जैसी स्थिति में लौट जाए।

‘शांति से सुलझाना चाहते हैं विवाद’

जनरल रावत ने कहा कि भारत शांतिपूर्ण ढंग से मामला सुलझाना चाहता है। उन्‍होंने कहा, ‘LAC पर अतिक्रमण अलग-अलग नजरिये की वजह से होता है। रक्षा सेवाओं का काम निगरानी रखना और ऐसे अतिक्रमण को घुसपैठ में तब्‍दील होने से रोकने का है। सरकार चाहती है कि शांतिपूर्ण तरीके से मसले सुलझाए जाएं। अगर LAC पर पूर्वस्थिति बहाल करने की कोशिशें सफल नहीं होती हैं तो सैन्‍य कार्रवाई के लिए रक्षा सेवाएं हमेशा तैयार रहती हैं।’

रोज मिल रही हैं खुफिया एजेंसियां

बता दें कि तीन साल पहले जब चीन ने डोकलाम में दादागिरी दिखाई थी, उस वक्त जनरल रावत ही सेना प्रमुख थे। उन्‍होंने खुफिया एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी की बात को सिरे से खारिज किया है।

जनरल रावत ने कहा कि भारत की इतनी लंबी सीमा है कि उसकी लगातार निगरानी करने की जरूरत पड़ती है। उन्‍होंने कहा कि मल्‍टी-एजेंसी सेंटर की रोज मीटिंग हो रही है। एक-दूसरे को लद्दाख व अन्‍य जगहों की जानकारी दी जा रही है।

बातचीत जारी, तनाव नहीं हो रहा कम

कई दौर की बातचीत के बावजूद, पूर्वी लद्दाख में तनाव कम नहीं हो रहा है। भारतीय सेना का साफ स्‍टैंड है कि चीन को अप्रैल से पहले वाली स्थिति बहाल करनी चाहिए। सैन्‍य स्‍तर पर बातचीत के अलावा विदेश मंत्रालय और दोनों देशों के वर्किंग मकैनिज्म फॉर कंसल्टेशन ऐंड को-ऑर्डिनेशन ने भी चर्चा की है। दोनों पक्ष कंपलीट डिसइंगेजमेंट की दिशा में आगे बढ़ने पर बार-बार सहमत हुए हैं लेकिन धरातल पर असर नहीं हुआ।