कोरोनिल दवा को लेकर बढ़ी बाबा रामदेव की मुश्किलें, राजस्थान में दर्ज हुआ मुकदमा

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Coronil-Baba-Ramdev
(Image Courtesy: Google)

नई दिल्ली. कोरोना के इलाज में 100% रिकवरी रेट के दावे के साथ लांच की गई पतंजलि आयुर्वेद की कोरोनिल किट ने बाबा रामदेव को मुश्किल में डाल दिया है. आयुष मंत्रालय पहले ही इस दवा से पल्ला झाड़ चुका है. दूसरी ओर आज जयपुर में बाबा रामदेव समेत 4 अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है.

इस एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि बाबा रामदेव द्वारा लांच कोरोनिल को कोरोना दवा के रूप में प्रचारित कर लोगों को गुम;राह किया जा रहा है.

पहले आयुष मंत्रालय ने जारी किया नोटिस

कोरोना वायरस ड्रग ‘कोरोनिल’ के लॉन्च के बाद से योग गुरु स्वामी रामदेव मुश्किल में हैं. इससे पहले, आयुष मंत्रालय ने अपने दवा के दावों के बारे में एक नोटिस जारी किया और विज्ञापनों पर प्रति’बंध लगा दिया, जबकि महाराष्ट्र और राजस्थान सरकारों ने पतंजलि की कोरोनिल दवा की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया.

राजस्थान में दर्ज हुआ मामला

एनआईएमएस के अध्यक्ष, जिन्होंने कोरोनिल का दैनिक ​​परीक्षण किया. उन्होंने भी मामले से पल्ला झाड लिया. वहीं, रामदेव और उनके चार सहयोगियों के खिलाफ मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजस्थान की राजधानी जयपुर में राम देव और चार अन्य के खिलाफ एक कोरोना वायरस दवा के रूप में भ्रामक रूप से गुमराह करने के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई है.

बाबा रामदेव समेत चार नाम

रामदेव के अलावा, बालकृष्ण भी उन चार लोगों में शामिल हैं जिन पर मामले दर्ज हैं. इसके अलावा, वैज्ञानिक अनुराग वार्ष्णेय, एनआईएमएस के अध्यक्ष डॉ. बलबीर सिंह तोमर और निदेशक डॉ. अनुराग तोमर को आरोपी बनाया गया है. यह शिकायत वकील बलराम जाखड़ ने की है. आईपीसी की धारा 420 सहित विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.

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जयपुर के ज्योतिनगर पुलिस स्टेशन (SHO) के प्रभारी सुधीर कुमार उपाध्याय ने पुष्टि की है कि पतंजलि के वैज्ञानिक रामदेव, बालकृष्ण, डॉ. बलबीर सिंह तोमर, डॉ. अनुराग तोमर और अनुराग वार्ष्णेय के खिलाफ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई है.

जयपुर में हुआ था ट्रायल

बता दें कि निम्स जयपुर में पतंजलि की कोरोनिल दवा का क्लिनिकल ट्रायल किया गया था. हालांकि, NIMS के चेयरमैन डॉ. बीएस तोमर ने कोरोना के लिए ट्रीटमेंट का ट्रायल खत्म कर दिया था और कहा था कि केवल रामदेव ही बता सकते हैं कि यह दवा कैसे बनी. मुकदमे पर, उन्होंने कहा कि हमने परीक्षण के दौरान अश्वगंधा, गिलोय और तुलसी को एक प्रतिरक्षा बूस्टर के रूप में दिया था. परीक्षण के लिए सीटीआरआई से अनुमति ली गई थी.