Ayodhya Land Deals: कमिश्नर, DM, लेखपाल.. अयोध्या में मंदिर पर फैसला आते ही मची जमीन की लूट

नई दिल्ली: Ayodhya Land Deals: नवंबर 2019 में राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अयोध्या की कई लैंड डील सवालों के घेरे में है। आरोप है कि राम मंदिर का रास्ता साफ होने के बाद यूपी के कई अफसरों के रिश्तेदारों ने वहां जमीनें खरीदी हैं।

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उस वक्त अयोध्या के जिलाधिकारी अनुज झा के पिता ने भी राम मंदिर के पास जमीन खरीदी थी।

15 अफसरों के रिश्तेदारों ने खरीदी जमीन

इस साल अगस्त में तत्कालीन डीएम अनुज झा ने राजस्व कोर्ट के पास एक मामला भेजा। इसमें एक दलित शख्स ने शिकायत की थी कि उसकी जमीन 21 बीघे की अवैध जमीन खरीद में शामिल है, जिसे महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट ने खरीदा था।

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अनुज झा भी कम से कम उन 15 अफसरों में शामिल हैं, जिनके रिश्तेदारों ने अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद प्रस्तावित मंदिर परिसर के आसपास जमीनें खरीदीं।

अनुज झा के पिता ने 28 मई 2020 को खरीदी जमीन

रेकॉर्ड्स के मुताबिक 28 मई 2020 को 320.631 वर्गमीटर का एक प्लॉट अयोध्या के मुगलपुरा में खरीदा गया। यह जगह राम मंदिर से मुश्किल से एक किलोमीटर दूर है। जमीन की रजिस्ट्री यूपी के आईएएस अफसर अनुज झा के पिता बद्री झा के नाम पर है। इस जमीन को 23 लाख 40 हजार रुपये में खरीदा गया। बताते चलें कि अनुज झा 21 फरवरी 2019 से 23 अक्टूबर 2021 तक अयोध्या के डीएम थे। इस वक्त वह पंचायती राज विभाग के डायरेक्टर हैं और लखनऊ में तैनात हैं।

अनुज झा बोले- जमीन खरीदी, कुछ गलत नहीं

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक जब अनुज झा से इस मामले में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘अयोध्या एक धार्मिक स्थल है और मेरे पिता बुजुर्ग हैं। अगर वह अपने अंतिम दिनों में यहां रहना चाहते हैं तो इसमें गलत क्या है? क्या वह यहां कोई जमीन नहीं खरीद सकते? इसमें कुछ भी गलत नहीं है।’ रेकॉर्ड्स के मुताबिक बद्री झा ने आवासीय (गैर कृषि) जमीन अयोध्या के तुलसीनगर के रहने वाले मंशाराम सिंह से खरीदी। जमीन की रजिस्ट्री में बद्री झा का पता बिहार के मधुबनी जिले में स्थित उनके गांव का है।

अयोध्या में श्रीराम मंदिर का रास्ता साफ होने के बाद सरकार ने जिन तमाम विकास योजनाओं का खाका खींचा, उनकी जानकारी कुछ चुनिंदा अधिकारियों को थी। आरोप है कि विकास योजनाओं के दायरे या फिर उनके आसपास आने वाली जमीनों के बारे में अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों को बताया और उन्होंने भविष्य के लिहाज से उचित जमीन की खरीद की। नीचे उन अफसरों की लिस्ट जिनके रिश्तेदारों ने अयोध्या में जमीनें खरीदी हैं।

एमपी अग्रवाल, कमिश्नर अयोध्या

एमपी अग्रवाल के ससुर केशव प्रसाद अग्रवाल ने 10 दिसंबर, 2020 को बरहटा मांझा में महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट से ‌‌~31 लाख रुपये में 2,530 वर्गमीटर जमीन खरीदी। उनके बहनोई आनंद वर्धन ने उसी दिन उसी गांव में ट्रस्ट से 15.50 लाख रुपये में 1,260 वर्ग मीटर जमीन खरीदी। जानकारी के मुताबिक कमिश्नर की पत्नी अपने पिता की फर्म हेलमंड कॉन्ट्रैक्टर्स ऐंड बिल्डर्स एलएलपी में पार्टनर हैं।

दीपक कुमार, पूर्व डीआईजी अयोध्या

26 जुलाई 2020 से 30 मार्च 2021 तक डीआईजी अयोध्या थे। इनकी पत्नी की बहन महिमा ठाकुर ने 1 सितंबर, 2021 को बरहटा मांझा में 1,020 वर्गमीटर महर्षि रामायण ट्रस्ट से 19.75 लाख रुपये में खरीदा था।

ऋषिकेश उपाध्याय, मेयर अयोध्या

अयोध्या के मेयर हैं। फैसले से दो महीने पहले 18 सितंबर 2019 को इन्होंने हरीश कुमार से 30 लाख रुपये में 1,480 वर्ग मीटर जमीन खरीदी। 9 जुलाई, 2018 को परमहंस शिक्षण प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्रबंधक पद पर रहने के दौरान ऋषिकेश ने रमेश से दान के रूप में अयोध्या के काजीपुर चितवन में 2,530 वर्ग मीटर जमीन ली। सरकारी रेकॉर्ड में जमीन की कीमत “1.01 करोड़ है।

पुरुषोत्तम दास गुप्ता, पूर्व मुख्य राजस्व अधिकारी अयोध्या

20 जुलाई 2018 से 10 सितंबर 2021 के बीच अयोध्या के मुख्य राजस्व अधिकारी पुरुषोत्तम दास गुप्ता रहे हैं। अब गोरखपुर में एडीएम हैं। उनके साले अतुल गुप्ता की पत्नी तृप्ति गुप्ता ने अमरजीत यादव नाम के एक व्यक्ति के साथ साझेदारी में 12 अक्टूबर 2021 को बरहटा मांझा में 1,130 वर्ग मीटर जमीन ट्रस्ट से “21.88 लाख में खरीदी।

उमाधर द्विवेदी, रिटायर्ड आईएएस

रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने बरहटा मांझा में 23 अक्टूबर 2021 को ट्रस्ट से “39.04 लाख में 1,680 वर्ग मीटर जमीन खरीदी।

आयुष चौधरी, पूर्व एसडीएम अयोध्या

अयोध्या में एसडीएम थे। आयुष की चचेरी बहन शोभिता रानी ने अयोध्या के बिरौली में 5,350 वर्ग मीटर जमीन 17.66 लाख रुपये में आशाराम से खरीदी। यह डील 28 मई, 2020 को हुई। 28 नवंबर, 2019 को शोभिता रानी की संचालित आरव दिशा कमला फाउंडेशन ने दिनेश कुमार से “7.24 लाख रुपये में अयोध्या के मलिकपुर में 1,130 वर्ग मीटर जमीन और खरीदी।

अरविंद चौरसिया, पीपीएस अफसर

पीपीएस अधिकारी अब मेरठ में तैनात। 21 जून 2021 को उनके ससुर संतोष कुमार चौरसिया ने भूपेश कुमार से अयोध्या के रामपुर हलवारा उपरहार गांव में 126.48 वर्ग मीटर 4 लाख रुपये में खरीदी। 21 सितंबर 2021 को उनकी सास रंजना चौरसिया ने कारखाना में 279.73 वर्ग मीटर जमीन भागीरथी से 20 लाख रुपये में खरीदी।

बद्री उपाध्याय, लेखपाल

गांजा गांव के लेखपाल हैं। 8 मार्च, 2021 को उनके पिता वशिष्ठ नारायण उपाध्याय ने श्याम सुंदर से गांजा में 116 वर्ग मीटर 3.50 लाख रुपये में खरीदा।

सुधांशु रंजन, कानूनगो

गांजा गांव के कानूनगो हैं। 8 मार्च 2021 को रंजन की पत्नी अदिति श्रीवास्तव ने गांजा में 270 वर्ग मीटर जमीन 7.50 लाख रुपये में खरीदी।

दिनेश ओझा, पेशकार

पेशकार हैं। 15 मार्च, 2021 को इनकी बेटी श्वेता ओझा ने तिहुरा मांझा में 2542 वर्ग मीटर जमीन खरीदी। यह गांव भी भान सिंह के दायरे में आता है। महराजदीन से 5 लाख रुपये में उन्होंने यह जमीन खरीदी।

योगी सरकार ने दिए जांच के आदेश

योगी सरकार ने इस बीच पूरे मामले में एक्शन लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। विशेष सचिव राजस्व मामले की जांच कर एक हफ्ते में सरकार को रिपोर्ट देंगे।

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) मनोज कुमार सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, ‘मुख्यमंत्री ने अगले 5-7 दिनों में संबंधित दस्तावेजों के साथ रिपोर्ट मांगी है।

सीएम योगी ने रिपोर्ट का संज्ञान लिया है। उनके निर्देश पर जांच के आदेश दे दिए गए हैं। विशेष सचिव के रैंक के एक अधिकारी को जांच करने के लिए कहा गया है। विशेष सचिव राधेश्याम मिश्रा को जांच करने के लिए कहा गया है।’