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भारत के शेर डोभाल से बात किए बिना पीछे हटने को राजी नहीं था चीन, ‘जेम्स बांड’ ने ऐसे पलटा पासा

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Ajit-Doval
(Image Courtesy: Google)

नई दिल्ली. भारत और चीन सीमा विवाद के बीच आखिरकार भारत और चीन की सेनाएं रविवार को विवादित क्षेत्र से पीछे हटने को राजी हुई. इन सबके पीछे एनएसए अजीत डोभाल ने अहम भूमिका निभाई. अब जानकारी मिली है कि चीन ने डोभाल से बात किए बिना पीछे हटने से इंकार कर दिया था.

दरअसल, गलवान की घटना के बाद दोनों देशों के बीच हालात तनावपूर्ण हो चुके थे. रविवार को चीन और भारत के बीच हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद दोनों देश पीछे हटने को तैयार हुए.

चीन ने रखा था प्रस्ताव

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने अन्य चैनलों के साथ-साथ गलवान घाटी में तनावपूर्ण स्थिति को हल करने के लिए एसआर-स्तरीय वार्ता का प्रस्ताव रखा था. भारतीय पक्ष ने कहा कि राजनीतिक और सैन्य चैनल स्थिति को डी-एस्कलेट करने के लिए ‘उपयुक्त’ थे.

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इसमें भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र शामिल हैं. मगर चीन ने एसआर-स्तरीय वार्ता पर जोर दिया ताकि कोई सार्थक हल निकल कर आए. ऐसा तब था जब चीनी स्टेट काउंसलर और विदेश मंत्री वांग यी और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के बैठक निर्धारत थी.

चीन ने जारी किया बयान

वार्ता के बाद चीनी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि कि दोनों पक्षों ने वर्तमान में सीमा की स्थिति को आसान बनाने और सकारात्मक सामान्य समक्ष पर गहन चर्चा की. बता दें कि सीमा वार्ता के लिए डोभाल और वांग एसआर हैं और दोनों साल 2018 और 2019 में मिल चुके हैं.

एसआर-स्तरीय वार्ता के लिए बीजिंग के आग्रह पर नई दिल्ली ने तर्क में योग्यता देखी कि निचले स्तर पर कोई भी प्रतिबद्धता सीमाएं हो सकती हैं. कोरोना वायरस महामारी के चलते दो सप्ताह तक क्वारंटाइन रहने के बाद पिछले सप्ताह कार्यालय लौटे डोभाल ने वांग के साथ 5 जुलाई की बातचीत निर्धारित की.