Agriculture Bill 2020: मोदी सरकार की दो टूक, वापस नहीं लिए जाएंगे कृषि कानून… 3 बड़े संशोधनों पर तैयार

नई दिल्ली. भारत में कृषि कानूनों (Agriculture Bill 2020) को लेकर किसानों का धरना पिछले 2 हफ्ते से जारी है. मंगलवार को भारत बंद (Kisan Andolan Bharat Bandh) का कई राजनीतिक दलों ने समर्थन भी किया. दूसरी तरफ शाम को किसान नेताओं और गृह मंत्री अमित शाह के बीच बैठक हुई. कई घंटों तक चली बैठक में किसानों की मांग पर बात हुई और सरकार ने साफ कर दिया कि कृषि कानून वापस नहीं होंगे.

हालांकि, इस दौरान मोदी सरकार कृषि कानून (Agriculture Bill 2020) में कुछ संशोधन करने पर राजी होती दिख रही है.

बैठक में क्या-क्या हुआ?

मंगलवार शाम भारत बंद (Kisan Andolan Bharat Bandh) के बाद शाम सात बजे किसान नेताओं और गृहमंत्री अमित शाह के बीच बैठक का वक्त तय था. हालांकि, जगह को लेकर कन्फ्यूजन के कारण मीटिंग देरी से शुरू हुई. देर रात तक चली बैठक के बाद जब किसान नेता बाहर आए तो पूरी तरह से संतुष्ट नहीं दिखे.

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किसान नेताओं का कहना है कि सरकार कृषि कानून (Agriculture Bill 2020) वापस ना लेने पर अड़ी है और संशोधनों के साथ लिखित प्रस्ताव देने की बात कह रही है. बुधवार को ही सरकार प्रस्ताव देगी, जिसपर किसान मंथन करेंगे.

किन संशोधनों पर मान रही है सरकार?

किसानों की ओर से कृषि कानून (Agriculture Bill 2020) में काफी खामियां गिनाई गईं और कहा गया कि सभी कानूनों को वापस लिया जाए. हालांकि, अब सरकार ने जब ये साफ कर दिया है कि वो कानून (Agriculture Bill 2020) वापस नहीं लेगी, ऐसे में किसानों की कुछ मुख्य चिंताओं को दूर करने की कोशिश की है.

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  1. कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के कानून में अभी किसान के पास कोर्ट जाने का अधिकार नहीं है, ऐसे में सरकार इसमें संशोधन कर कोर्ट जाने के अधिकार को शामिल कर सकती है.
  2. प्राइवेट प्लेयर अभी पैन कार्ड की मदद से काम कर सकते हैं, लेकिन किसानों ने पंजीकरण व्यवस्था की बात कही. सरकार इस शर्त को मान सकती है.
  3. इसके अलावा प्राइवेट प्लेयर्स पर कुछ टैक्स की बात भी सरकार मानती दिख रही है.
  4. किसान नेताओं के मुताबिक, अमित शाह ने MSP सिस्टम और मंडी सिस्टम में किसानों की सहूलियत के अनुसार कुछ बदलाव की बात कही है.

कहां अटक रहे पेंच

किसान नेता हनन मुल्ला ने बताया, सरकार ने कहा है कि कृषि कानून (Agriculture Bill 2020) वापस नहीं लिए जाएंगे, लेकिन कुछ संशोधन किए जा सकते हैं. दरअसल, किसान अब कानून वापसी पर अड़ते दिखे हैं. किसान नेताओं का तर्क है कि अगर कानून में संशोधन होता है तो उसकी रूपरेखा बदल जाएगी. वो किसी और स्टेकहोल्डर को गलत तरीके से प्रभावित कर सकता है.

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किसानों ने सरकार के साथ पिछले कई दौर की बातचीत में बिंदुवार खामियां गिनाई हैं, ऐसे में किसानों का कहना है कि जिस कानून में इतनी संशोधन की जरूरत हो, हर कानून में लगभग 8 से 10 गलतियां हों तो उसका औचित्य क्या रह जाता है. किसानों को कानून की शब्दावली से भी दिक्कत है, जो किसानों के लिए मुश्किलें पैदा कर रही है.

एमएसपी को लेकर अपनी मांग पर अड़े किसान

किसानों की ओर से सरकार को पहले भी कहा जा चुका है कि सरकार MSP को कानून का हिस्सा बनाए, हालांकि सरकार इस बात का भरोसा दे रही है कि MSP कभी खत्म नहीं होगी. इसके अलावा किसानों की मांग थी कि मंडी सिस्टम खत्म ना हो, क्योंकि मंडियों में मौजूद आड़तियों के साथ जैसा कामकाज किसानों का होता है, वो किसी कंपनी के साथ नहीं हो सकता है.