Navratri 2022: कैसे हुआ देवी दुर्गा का जन्म और कहां से मिली इतनी शक्तियां, जानें आदिशक्ति से जुड़े ये रहस्य

by सचिन गौतम

शारदीय नवरात्रि (Navratri 2022) 26 सितंबर से आरम्भ हो चुके हैं। नौ दिनों तक माता दुर्गा (Goddess Durga) के भक्त उनकी पूजा-आराधना में लीन रहेंगे। शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) में माता दुर्गा (Maa Durga) के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाएगी।

लेकिन क्या आप जानते है किन विशेष परिस्थितियों में मां दुर्गा (Goddess Durga) को जन्म लेने पड़ा। आइए इस नवरात्रि (Navratri 2022) हम आपको बता रहे हैं मां दुर्गा के जन्म की कथा…

पौराणिक कथा (Goddess Durga Birth Story)

पौराणिक कथाओं के अनुसार माँ दुर्गा का जन्म राक्षसों का नाश करने के लिए हुआ था। दैत्यराज ने वरदान में मिली अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर सभी देवी-देवताओं को परे-शान कर रखा था। तब सभी देवी-देवता इस रा-क्षस से बचने के लिए ब्रह्राा जी के पास पहुंचे।

देवताओं की समस्या को सुनकर तब ब्रह्मा जी ने बताया कि दैत्यराज का अंत किसी कुंवारी कन्या के हाथों से ही संभव है। इसके बाद सभी देवताओं ने मिलकर अपने तेज को एक जगह समाहित किया और इस शक्ति से देवी का जन्म हुआ।

देवगण की शक्ति से बना देवी का सभी अंग

देव गणों की शक्ति से देवी की उत्पत्ति हुई, लेकिन देवी के शरीर का अंग प्रत्येक देव की शक्ति का अंश से हुआ है। जैसे भगवान शिव के तेज से माता का मुख बना, श्रीहरि विष्णु के तेज से भुजाएं, ब्रह्मा जी के तेज से माता के दोनों चरण बनें।

वहीं, यमराज के तेज से मस्तक और केश, चंद्रमा के तेज से स्तन, इंद्र के तेज से कमर, वरुण के तेज से जांघें, पृथ्वी के तेज से नितंब, सूर्य के तेज से चरण और दोनों पौरों की अंगुलियां, प्रजापति के तेज से सारे दांत, अग्नि के तेज से दोनों नेत्र, संध्या के तेज से भौंहें, वायु के तेज से कान तथा अन्य देवताओं के तेज से देवी के भिन्न-भिन्न अंग बने।

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देवी देवताओं ने प्रदान किए अस्त्र

देवी की शरीर संरचना के बाद सभी देवी-देवताओं ने अलग-अलग शक्तियां भी दी। शिवजी ने शक्ति को त्रिशूल दिया वही विष्णु ने चक्र तो लक्ष्मीजी ने कमल का फूल दिया। इसके अलावा अग्नि ने शक्ति व बाणों से भरे तरकश, प्रजापति ने स्फटिक मणियों की माला, वरुण ने दिव्य शंख, हनुमानजी ने गदा, शेषनागजी ने मणियों से सुशोभित नाग, इंद्र ने वज्र, भगवान राम ने धनुष, वरुण देव ने पाश व तीर, ब्रह्माजी ने चारों वेद तथा हिमालय पर्वत ने सवारी के लिए सिंह प्रदान किया। इसके अलावा मां दुर्गा की 18 भुजाओं में विभिन्न देवी देवताओं ने अपने आभूषण भेंट किये।

और ऐसे बना देवी का विराट रूप

अस्त्र-शस्त्र और आंतरिक शक्ति से देवी का विराट रूप बन गया और असुर उन्हें देख कर ही भयभीत होने लगे। देवी के पास सभी देवताओं की शक्तियां हैं। उनके जैसा कोई दूसरा शक्तिशाली नहीं है, उनमें अपार शक्ति है, उन शक्तियों का कोई अंत नहीं है, इसलिए वे आदिशक्ति कहलाती हैं।

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