सास ने कराई विधवा बहू की शादी, बेटी की तरह विदा करते हुए रोए सास-ससुर

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Madhya Pradesh Wedding
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नई दिल्ली. एक औरत के लिए उसके ससुराल को ही उसका असली घर माना गया है. सास-ससुर को माता-पिता के समान दर्जा दिया गया है. कुछ ऐसा ही मध्य प्रदेश के रतलाम में देखने को मिला, जहां सास-ससुर ने अपनी विधवा बहू का कन्यादान कर उसके नए जीवन को संवार दिया.

दरअसल, मध्य प्रदेश के रतलाम में 6 साल पहले काटजू नगर निवासी सरला जैन आष्टा निवासी सोनम को अपने घर में बहू बनाकर लाई थी. कुछ साल पहले बेटे का निधन हो गया, तो अपनी ढलती उम्र देख सास-ससुर ने विधवा बहू की जिंदगी संवारने का फैसला किया.

क्या है पूरा मामला

सरला जैन के बेटे मोहित जैन की 3 साल पहले कैंसर की वजह से मौत हो गई थी. पिछले तीन साल से बहू सोनम अपने सास-ससुर की खूब सेवा करती रही. सास-ससुर भी उसे अपनी बेटी की तरह मानने लगे.

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सोनम के सेवाभाव को देख उसके जीवन की खुशियों की परवाह उनकी सास ने की. सरला ने अपने भाई ललित कांठेड़ और सोनम के परिजनों से सोनम के दोबारा विवाह की बात छेड़ी. उनकी बात से सभी राजी हो गए और नागदा में सौरभ जैन के साथ रिश्ता पक्का हो गया.

लॉकडाउन की वजह से घर में हुई शादी

हालांकि, लॉकडाउन की वजह से कुछ समय के लिए शादी में दिक्कत आने लगी. परिजनों को नागदा जा कर शादी करनी थी. होटल भी बुक हो गया था, लेकिन लॉकडाउन के कारण काम नहीं बना. ऐसे में मोहित के मामा ललित कांठेड़ ने प्रशासन से बात की और अपने घर पर ही बहू सोनम की बेटी की तरह शादी करा दी.

बेटी की तरह किया विदा

शादी समारोह में खास तौर पर सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा गया. सास-ससुर ने ही सोनम का कन्यादान भी किया. बहू को ससुराल विदा करते वक्त सास-ससुर की आंखें भर आई.

सास सरला जैन ने बताया कि बहू की शादी इसलिए कराई कि अब हम दोनों पति-पत्नी ही रह गए थे. हमारी उम्र भी हो चली लेकिन बहू की उम्र तो बाकी है. हमारे चले जाने के बाद उसकी जिंदगी वो अकेले कैसे काटती, इसलिए शादी की. बहू को जब विदा किया तो बेटी के रूप में ही विदा किया. सब कुछ वही दिया जो बेटी को दिया था.