कैप्टन विक्रम बत्रा: जिनकी वीरता के साथ अमर है प्रेम कहानी… 7 जुलाई को दिया था सर्वोच्च बलिदान

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(Image Courtesy: Google)

Capt. Vikram Batra: कारिगल का ‘शेरशाह’ कहलाने वाले कैप्टन विक्रम बत्रा भले ही आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके अदम्य साहस और वीरता की गाथा हर एक भारतीय के रोंगटे खड़े कर देती है. 7 जुलाई को आज ही के दिन कैप्टन विक्रम बत्रा वीरगति प्राप्त करने के बाद तिरंगे के लिपटकर घर लौटे थे. कारगिल के इस शेर ने जो वादा किया उसे पूरी तरह निभाया.

कैप्टन विक्रम बत्रा ने जंग में जाने से पहले जाने से पहले कहा था, ‘या तो तिरंगा फहरा कर आऊंगा, या फिर तिरंगे में लिपटा चला आऊंगा, लेकिन आऊंगा जरूर’. कैप्टन विक्रम बत्रा की बहादुरी के किस्से तो आपने सुने होंगे, लेकिन आज हम आपको उनकी अमर प्रेम कहानी बताने जा रहे हैं.

वीरता के साथ अमर है प्रेम कहानी

कारगिल में प्वांइट 5140 पर कब्जा करने के बाद नेशनल टीवी पर ‘ये दिल मांगे मोर’ कहकर पाकिस्तान को चुनौती देने वाले विक्रम बत्रा की जिंदगी के कई दिलचस्प पहलू भी थे. इन्हीं में से थी उनकी मुहब्बत, जिसे वह अपना ना बना पाए.

बात वर्ष 1995 की है जब विक्रम बत्रा पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे. यहां उनकी एक क्लासमेट थी डिंपल और दोनों अंग्रेजी में MA की पढ़ाई कर रहे थे. धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई. विक्रम बत्रा के आर्मी ज्वाइन करने से पहले दोनों का रिश्ता प्यार में बदल चुका था. दोनों ने जिंदगी भर का साथ निभाने का वादा किया, लेकिन किसे पता था अंजाम कुछ और ही होगा.

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डिंपल और विक्रम शादी के बारे में सोच ही रहे थे कि इसी बीच 1996 में सीडीएस के जरिए उन्हें आर्मी से बुलावा आ गया (Image Courtesy: Google)

डिंपल और विक्रम शादी के बारे में सोच ही रहे थे कि इसी बीच 1996 में सीडीएस के जरिए उन्हें आर्मी से बुलावा आ गया. जुलाई 1996 में उन्होंने भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून में प्रवेश लिया, जहां से कड़ी ट्रेनिंग के बाद 6 दिसम्बर 1997 को विक्रम को सेना की 13 जम्मू-कश्मीर राइफ़ल्स में लेफ़्टिनेंट के पद पर तैनाती मिली. पहले दिन से ही उन्होंने ख़ुद को साबित किया और सबके चहेते बन गए.

प्रेमिका ने इंटरव्यू में खोले थे कई राज

विक्रम अपने सेलेक्शन से काफी खुश थे, लेकिन उनकी डिंपल जानती थी कि विक्रम के दूर चले जाने पर उनके रिश्ते में दूरियां बढ़ सकती हैं. कैप्टन विक्रम ने वादा किया था कि कारगिल यु;द्ध खत्म होने के बाद वह शादी करेंगे.

उस वक्त को याद करते हुए एक इंटरव्यू में उनकी प्रेमिका ने कहा था कि “वो लौटा नहीं और जिंदगी भर के लिए मुझे यादें दे गया”. एक वेबसाइट को इंटरव्यू देते हुए उन्होंने बताया था कि कैसे उनके प्यार ने उनके जीवन को आकार दिया और यह उनके साथ हमेशा-हमेशा तक कैसे रहेगा. उनकी प्रेमिका ने बताया “विक्रम हमेशा मुझसे शादी के लिए कहते थे. साथ ही कहते थे जिसे तुम पसंद करती हो उसका ध्यान रखो”.

जब विक्रम ने भरी थी प्रेमिका की मांग

वह बताती हैं, एक बार मैंने विक्रम से शादी की बात कर ली, क्योंकि उस वक्त मेरा परिवार शादी का दवाब मुझ पर डाल रहा था. तब विक्रम ने बिना सोचे समझे ब्लेड से अपनी उंगली का;टी और मेरी मांग भर दी. जिसके बाद मैंने ‘पूरा फिल्मी’ कहकर विक्रम को खूब चिढ़ाया.

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कैप्टन विक्रम बत्रा जितना अपनी मातृभूमि से प्यार करते थे, उतना ही अपनी प्रेमिका को भी करते थे. (Image Courtesy: Google)

उन्होंने कहा था कि मुझे हमेशा एक बात का पछतावा रहा कि मेरा प्यार उनके साथ अपनी उपलब्धियों और हसीन लम्हों को याद करने के लिए साथ नहीं रहा.

दोस्तों से किया था वादा, लौटकर जरूर आऊंगा

बात कारगिल यु;द्ध से कुछ महीने पहले की है. विक्रम बत्रा अपने घर पालमपुर आए हुए थे. एक दिन वह अपने दोस्तों को पार्टी देने के लिए ‘न्यूगल कैफे’ ले गए. यहां उनके एक दोस्त ने कहा, ‘विकी अब तुम फौज में हो, खुद का ध्यान रखना’.

इस पर विक्रम तपाक से बोल पड़े, ‘चिंता मत करो दोस्त, या तो मैं जीत के बाद तिरंगा लहराकर आऊंगा, या फिर उसी तिरंगे में लिपटा चला आऊंगा, लेकिन आऊंगा जरूर’. कैप्टन बत्रा लौटे जरूर, लेकिन तिरंगे में लिपटकर. जब उनका पार्थिव शरीर घर लौटा तो उनके दोस्त ये शब्द याद कर खूब रोए, लेकिन उन्हें जिंदगी भर विक्रम की बहादरी पर नाज रहेगा.

परमवीर चक्र से हुए सम्मानित

9 सितंबर 1974 को हिमाचल के पालमपुर में जन्मे कैप्टन विक्रम बत्रा को 1999 में उनके अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से नवाजा गया. मात्र 25 साल की उम्र में अपनी जिंदगी भारत मां के नाम करने वाले कैप्टन विक्रम बत्रा 17 हजार फीट की ऊंचाई पर अपने साथी को बचाते हुए वीरगति को प्राप्त हुए.

पाकिस्तान ने दिया था शेरशाह नाम

कैप्टन विक्रम बत्रा की बहादुरी के चर्चे सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि आज भी पड़ोसी देश पाकिस्तान में होते है. भले ही उस वक्त पाकिस्तान एक दुश्मन के रूप में सामने खड़ा था, लेकिन उसी ने कैप्टन विक्रम बत्रा को ‘शेरशाह’ का नाम दिया था.

कैप्टन विक्रम बत्रा की बहादुरी से पाकिस्तानी सेना के अफसर इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने भी विक्रम बत्रा की बहादुरी के सामने सिर झुका लिया. पाकिस्तानी सेना के एक बड़े अफसर ने कैप्टन विक्रम बत्रा को कारगिल का शेरशाह कहा था. उसी दिन से कैप्टन विक्रम बत्रा कारगिल के शेर कहलाते हैं.