भालका तीर्थ: भगवान कृष्ण ने इसी जगह ली थी अंतिम सांस, भील के तीर लगने से हुई थी मृत्यु

नई दिल्ली: भारत देश में ऐसे कई धार्मिक स्थल हैं जो हिंदू धर्म की दृष्टि से बहुत महत्व रखते हैं। ऐसा ही एक स्थान सोमनाथ मंदिर से करीब 5 किलोमीटर दूर गुजरात के वेरावल में स्थित है जिसका नाम भालका तीर्थ (Bhalka Tirth) स्थल है।

मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर (Bhalka Tirth) में श्री कृष्ण (Lord Krishna) नें अपनी का देह त्याग किया था। लोगों का मानना है कि भगवान कृष्ण यहां आने वालों की सभी मुरादें पूरी करते हैं। इस स्थान पर एक पेड़ भी है जो करीब 5 हजार साल पुराना है और अभी तक हरा-भरा है। यहां आने वाले लोग इस पेड़ की भी पूजा करते हैं।

लगा था जरा शिकारी का तीर

लोक कथाओं के अनुसार महाभारत युद्ध खत्म होने के बाद 36 साल बाद तक यादव कुल मद में आ गए और आपस में लड़ने लगे। इसी कलह से परेशान होकर कृष्ण (Lord Krishna) सोमनाथ मंदिर से करीब सात किलोमीटर दूर वैरावल की इस जगह पर विश्राम करने आ गए।

ध्यानमग्र मुद्दा में लेटे हुए थे तभी जरा नाम के भील को कुछ चमकता हुआ नजर आया। उसे लगा कि यह किसी मृग की आंख है और बस उस ओर तीर छोड़ दिया, जो सीधे कृष्ण के बाएं पैर में जा धंसा। जब जरा करीब पहुंचा तो देखकर भगवान से इसकी माफी मांगने लगा। जिसे उसने मृग की आंख समझा था, वह कृष्ण के बाएं पैर का पदम था, जो चमक रहा था।

भील जरा को समझाते हुए कृष्ण ने कहा कि क्यों व्यर्थ ही विलाप कर रहे हो, जो भी हुआ वो नियति है। बाण लगने से घायल भगवान कृष्ण भालका से थोड़ी दूर पर स्थित हिरण नदी के किनारे पहुंचे। कहा जाता है कि उसी जगह पर भगवान पंचतत्व में ही विलीन हो गए।

आज भी मौजूद है भगवान कृष्ण के चरणों के निशान

हिरण नदी सोमनाथ से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है। यहां नदी के किनारे आज भी भगवान के चरणों के निशान मौजूद हैं। इस जगह को आज दुनिया भर में देहोत्सर्ग तीर्थ के नाम से मशहूर है।