सलाम: एक महीने में 100 परिवारों को राशन और 3000 लोगों को मास्क बांट चुका ये दिव्यांग भिखारी

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Begger Raju
एक परिवार को राशन बांटता दिव्यांग राजू (तस्वीर साभार-नवभारत टाइम्स)

नई दिल्ली. अब तक आपने भिखारियों के पास अकूत संपत्ति के किस्से जरूर सुने होंगे. लेकिन, आज आपको एक ऐसे भिखारी के बारे में बताएंगे जिसने कोरोना संकट में पूरे देश में मानवता की मिसाल पेश की है. वैसे तो यह भिखारी दिव्यांग है, लेकिन लॉकडाउन के दौरान अब तक 100 लोगों को एक महीने का राशन बांट चुका है.

इसके साथ ही साथ यह भिखारी अब तक 3000 लोगों को मुफ्त मास्क बांट चुका है. दिव्यांग राजू का कहना है कि मुझे सिर्फ इतना चाहिए कि मेरा गुजारा हो सके. बाकी के पैसों से ही यह कार्य कर रहा हूं.

पैरों से अक्षम राजू ट्राई साइकिल के सहारे चलते हैं और जगह-जगह भीख मांगकर अपना गुजारा करते हैं. राजू के मुताबिक, उनके पास करीब 80 हजार रुपए जमा हो रखे थे. यही पैसा उन्होंने लोगों के लिए राशन और मास्क खरीदने के लिए खर्च किए हैं.

इस वजह से उठाया कदम

पठानकोट के रहने वाले राजू ने एक समाचार वेबसाइट से बातचीत में कहा कि लॉकडाउन की वजह से कई लोगों की नौकरियां चली गई. कई परिवार ऐसे थे, जिनके पास खाने के लिए कुछ नहीं बचा था. बिना मॉस्क के लोग घरों से बाहर निकल रहे थे. इसके बाद उन्होंने राशन और मास्क बांटने का फैसला किया. राजू की इस नेकी की चर्चा पूरे राज्य में हो रही है.

भीख मांग करते हैं लोगों की मदद

अपनी ट्राई साइकिल पर पूरा दिन पठानकोट की सड़कों पर घूमकर राजू जो पैसा इकट्ठा करते हैं, उसे शाम को एक बक्से में रख लेते हैं. अपने खाने-पीने का इंतजाम करने के बाद वह बाकी बचे पैसों से दूसरों की मदद करते हैं. भिखारियों की भीड़ से अलग राजू संभवत: देश के पहले ऐसे भिखारी हैं, जो दूसरों की मदद कर रहे हैं.

करा चुके हैं कई लड़कियों का विवाह

अगर आप सोच रहे हैं कि राजू सिर्फ लॉकडाउन में ही लोगों की मदद कर रहे हैं, तो जरा ठहर जाइये. राजू कई सालों से गरीब परिवारों की मदद करते आ रहे हैं. वह भीख के पैसे से कई बच्चों के स्कूल की फीस भर चुके हैं. इसके अलावा अब तक 22 लड़कियों की शादियां करा चुके हैं.

सरकार का काम भी खुद करते हैं

आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि राजू वह काम भी कर चुके हैं, जिसे स्थानीय प्रशासन और सरकार को करना चाहिए था. दरअसल, कुछ वर्ष पहले पठानकोट के ढांगू मार्ग पर एक छोटा पुल था, जो आपदा की वजह से ढह गया. स्थानीय लोगों परेशान हो गए, लेकिन प्रशासन ने भी कोई सुनवाई नहीं की. ऐसे वक्त में राजू आगे आए और अपनी जमापूंजी से पुल की मरम्मत करवाई.

भिखारी होने की वजह से राजू का कोई भी रिश्तेदार उनसे संबंध नहीं रखता. वह इस दुनिया में अकेले हैं और यही वजह है कि सारी जमा पूंजी भलाई के कामों में खर्च कर देते हैं. राजू करते हैं, अगर मैं लोगों की मदद करता रहूंगा, तो शायद मेरे मरने के बाद अर्थी को कंधा देने के लिए कम से कम चार कंधे तो मिल ही जाएंगे.