‘कांग्रेस का कर्ज’, वैक्सीन, फ्री अनाज के बावजूद मोदी सरकार की चांदी, तेल से सालभर की कमाई सबसे ज्यादा

नई दिल्ली: Tax On Diesel-Petrol: इस साल दिवाली से ठीक पहले मोदी सरकार ने डीजल-पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई थी। इससे पहले कई महीनों से विपक्ष की ओर से केंद्र सरकार पर हमला बोला जा रहा था, क्योंकि डीजल-पेट्रोल की कीमतें काफी ऊंचे स्तर तक जा पहुंची थीं। जब सरकार से इस पर जवाब मांगा गया तो तत्कालीन पेट्रलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अभी डीजल-पेट्रोल की बढ़ी कीमतों की एक बड़ी वजह है कांग्रेस।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 2014 से पहले तेल बॉन्ड जारी किए थे, जिसको लेकर भाजपा पर लाखों करोड़ों रुपये बकाया हैं। प्रधान ने कहा है कि अब भाजपा को कांग्रेस के उस बकाया का मूलधन और उस पर लगने वाला ब्याज चुकना करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे भी डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों की वजह बताया था। साथ ही कहा था कि पेट्रोल-डीजल पर टैक्स लगाने से जो कमाई होती है उससे वैक्सीन लगाने और मुफ्त राशन देने जैसे कल्याणकारी काम भी किए जा रहे हैं।

2020-21 में सरकार ने कमाए 3.71 लाख करोड़ रुपये

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद को जानकारी दी कि केंद्र ने पिछले तीन वित्त वर्षों के दौरान पेट्रोल और डीजल पर करों से लगभग 8.02 लाख करोड़ रुपये की कमाई की है। इसमें से अकेले वित्त वर्ष 2020-21 में सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर करों से 3.71 लाख करोड़ रुपये से अधिक जुटाए हैं। अब सवाल ये है कि आखिर कांग्रेस का कितना बकाया है जिसे चुकाने में सरकार की सारी कमाई खर्च हुई जा रही है?

आखिर कांग्रेस के तेल बॉन्ड का कितना बकाया है?

कांग्रेस सरकार ने करीब 1.31 लाख करोड़ रुपये के ऑयल बॉन्ड्स जारी किए थे, जिनका भुगतान इस साल अक्टूबर से लेकर मार्च 2026 के बीच भारत सरकार को करना होगा। पहले किस्त 5000 करोड़ रुपये की अक्टूबर में ड्यू थी और दूसरी 5000 करोड़ रुपये की किस्त नवंबर में ड्यू थी। यानी 10 हजार करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इसी साल केंद्र को लगभग 20 हजार करोड़ रुपये तो सिर्फ ब्याज चुकाना पड़ सकता है। इसके बाद 2023 में 22 हजार करोड़, 2024 में 40 हजार करोड़ और 2026 में 37 हजार करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।

अमित मालवीय ने कांग्रेस तेल बॉन्ड को तेल की बढ़ती कीमतों के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए ये ट्वीट किया था

वैक्सीन पर खर्च किए 34 हजार करोड़!

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने राज्यसभा में बताया है कि 1 दिसंबर 2021 तक देश के करीब 124.11 करोड़ लोगों को कोविड-19 की खुराक दी गई हैं। इसमें से 78.9 करोड़ लोगों को कम से कम एक डोज मिली है, जबकि 45.2 करोड़ लोगों को टीके की दोनों डोज (यानी करीब 90.4 करोड़ डोज) लग चुकी हैं। इस तरह कुल डोज की संख्या लगभग 170 करोड़ होती है।

शुरुआती दिनों में मोदी सरकार ने 150 रुपये प्रति डोज के हिसाब से कोरोना वैक्सीन ली थी। बाद में इसे बढ़ाकर 215-225 के बीच किया गया। अगर मान लें के सरकार ने सभी वैक्सीन की डोज 200 रुपये के भाव से भी खरीदी हैं तो 170 करोड़ डोज के लिए सरकार को करीब 34000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े होंगे।

कल्याण योजना पर खर्च किए करीब 2.28 लाख करोड़ रुपये

मोदी सरकार ने वित्त वर्ष 2021 में पीएम गरीब कल्याण योजना पर करीब 1.34 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस साल नवंबर 2021 तक करीब 93,869 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसकी मदद से कोरोना काल में लोगों को मदद पहुंचाई गई है। लोगों मुफ्त राशन मुहैया कराया गया। इस तरह पीएम गरीब कल्याण योजना पर सरकार ने कुल मिलाकर करीब 2.28 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। वैसे तो गरीबों को राशन सरकार की तरफ से मुफ्त में मुहैया कराया जाए, लेकिन थोड़ा हिसाब लगाएं तो पता चलेगा कि दरअसल आप पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर गरीबों को राशन देने के पैसों का इंतजाम किया गया।

सारे खर्चे करने के बाद भी बचेंगे पैसे

अब अगर देखा जाए तो मोदी सरकार ने सिर्फ पिछले साल 3.71 लाख करोड़ रुपये कमाए। वहीं अगर पिछले साल खर्च की बात करें तो कांग्रेस के तेल बॉन्ड के पैसे सरकार को इस साल से चुकाने पड़ रहे हैं, पिछले साल तक पैसे नहीं चुकाने पड़े। वहीं वैक्सीन पर खर्च देखें को करीब 34 हजार करोड़ रुपये हुआ है। पीएम गरीब कल्याण योजना पर खर्च लगभग 2.28 लाख करोड़ रुपये रहा है। यानी ये सारे खर्चे होने के बावजूद पिछले साल की कमाई में से कुछ रकम बच ही जाएगी।