क्या आप जानते हैं LPG सिलेन्डर के साथ मिलता है 50 लाख तक का बीमा, जानिए कैसे होगा क्लेम?

नई दिल्ली: नई दिल्ली। आपकी रसोई में मौजूद एलपीजी गैस सिलेंडर (LPG Gas Cylinder Insurance) घर वैसे तो बड़े काम का है, लेकिन कई बार छोटी सी लापरवाही भारी नुकसान करा सकती है।

आपने अक्सर खबरों में गैस सिलेंडर फटने की खबरें पढ़ी होंगी। दरअसल, पेट्रोलियम गैस से भरा यह सिलेंडर छोटी सी गलती की वजह से जान-माल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। एक ग्राहक के तौर पर आपको पता होना चाहिए कि एलपीजी सिलेंडर उपभोक्ता के पास क्या-क्या अधिकार होते हैं?

मिलता है 50 लाख रुपये तक का बीमा

अधिकृत रूप से रसोई गैस (LPG Gas Cylinder Insurance) खरीदने पर पेट्रोलियम कंपनियां ग्राहक को 50 लाख रुपये तक का बीमा उपलब्ध कराती हैं। यह बीमा लीकेज या ब्लास्ट से होने वाले नुकासान की भारपाई के लिए होता है। वर्तमान में हिंदुस्तान पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम के रसोई गैस कनेक्शन पर इंश्योरेंस ICICI लोम्बार्ड के माध्यम से बीमा मिलता है।

सिलेंडर के सेफ्टी के लिए डीलर और कंपनी जिम्मेदार

7 साल पहले हुए एक हादसे पर नेशनल कंज्यूमर फोरम ने एक आदेश दिया था जो अभी भी लागू है। फोरम ने अपने फैसले में कहा था कि मार्केटिंग डि​स्पिलन गाइडलाइंस 2004 फॉर एलपीजी (LPG Gas Cylinder Insurance) डिस्ट्रीब्युशन के तहत तय है कि डीलर ने डिफेक्टिव सिलेंडर सप्लाई की तो वह अपनी जिम्मेदारी ग्राहक पर नहीं डाल सकता। इसी वजह से गाइडलाइंस में साफ लिखा है कि डीलर गैस डिलीवरी से पहले चेक करे कि सिलेंडर बिल्कुल ठीक है या नहीं। रसोई गैस सिलेंडर में किसी भी तरह के लीकेज या ब्लास्ट की जिम्मेदारी डीलर और कंपनी की होती है।

गैस सिलेंडर (LPG Gas Cylinder Insurance) की वजह से हुए किसी भी हादसे में मुआवजे की रकम 50 लाख रुपये और किसी व्यक्ति को नुकसान होने पर 10 लाख रुपये मिलते हैं। हादसे में ग्राहक की प्रॉपटी को नुकसान पहुंचता है तो 2 लाख रुपये का बीमा मिलता है। हादसे में मौ’त होने पर प्रति व्यक्ति 6 लाख रुपये का मुआवजा मिलता है।

क्लेम के लिए भी हैं कुछ शर्तें

Mylpg.in वेबसाइट के मुताबिक, गैस सिलेंडर से हुए किसी हादसे के बाद बीमा कवर पाने के​ लिए ग्राहक को दुर्घटना होने की सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन और एलपीजी (LPG Gas Cylinder Insurance) डिस्ट्रीब्युटर को देनी होगी।

एफआईआर की कॉपी, घायलों के इलाज की स्लिप व मेडिकल बिल तथा मौत होने पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृ’त्यु प्रमाणपत्र संभाल कर रखें। इंश्योरेंस क्लेम करते वक्त इन डॉक्युमेंट्स की जरूरत पड़ती है। डिस्ट्रीबयुटर के जरिए मुआवजा क्लेम किया जाता है। क्लेम की रकम बीमा कंपनी संबंधित ​डिस्ट्रीब्युटर के पास जमा करती है। इसके बाद यह रकम ग्राहक के पास पहुंचती है।