कई कंपनियों के चीन छोड़कर भारत आने से बौखलाया ड्रैगन, कहा-कभी चीन की जगह नहीं ले सकता भारत

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Manufacturing Industry in India
एक के बाद एक कई कंपनियों के चीन से निकलकर भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के ऐलान से ड्रैगन बौखला गया है। (साभार - गूगल)
नई दिल्ली. कोरोना संकट की वजह से दुनिया की नजर में चीन की छवि खराब हो चुकी है. ऐसे में एक के बाद एक कई कंपनियों ने चीन से निकलकर भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने का ऐलान कर दिया है. कंपनियों के अचानक चीन छोड़ने की बात से ड्रैगन बौखला गया है.

चीन में बौखलाहट इस कदर है कि भारत अर्थव्यवस्था प्रभावित होने के बावजूद बड़ा सपना देख रहा है. चीन की सरकार द्वारा नियंत्रित अखबार ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि बड़े सपने देख रहा भारत, कभी भी चीन का विकल्प नहीं बन सकता. हद तो तब हो गई जब लेख में चीन से भारत की तुलना को लेकर वेस्टर्न मीडिया को दलाल तक कह दिया गया।

कई कंपनियों ने चीन छोड़ने का किया ऐलान

यहां बता दें कि जर्मनी की जूता कंपनी ने अपना मैन्युफैक्चरिंग यूनिट चीन से आगरा शिफ्ट करने की बात कही है. वहीं मोबाइल के टॉप ब्रांड्स एप्पल और ओप्पो जैसी मोबाइल कंपनियों ने भी अब भारत शिफ्ट होने की बात कही है.

खबरों के मुताबिक, अमेरिका और चीन के बीच पहले से चल रहा ट्रेड वॉर अब कोरोना की वजह से और बढ़ गया है. इस वजह से कंपनियों की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो चुकी है. यही कारण है कि करीब एक हजार कंपनियां चीन से निकलना चाहती है।

‘भ्रम में है भारत’

ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित लेख में आगे कहा गया, ”मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश ने चीन से मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शिफ्ट करने की सोच रही कंपनियों को आकर्षित करने के लिए एक इकनॉमिक टास्क फोर्स बनाई है। ऐसे प्रयासों के बावजूद भारत की यह उम्मीद करना भ्रम है कि कोरोना के कारण चीन की अर्थव्यवस्था पर जो दबाव है उससे भारत दुनिया के लिए नई फैक्ट्री बन जाएगा।”

भारत को चीन का विकल्प बताना खतरना

भारत को चीन का विकल्प बताने वालों को कट्टरपंथी की संज्ञा देते हुए अखबार ने आगे लिखा कि जो कट्टरपंथी कह रहे हैं कि भारत चीन की जगह लेने जा रहा है, वह राष्ट्रवादी डींग है। चीन ने इस मुद्दे को सीमा विवाद से भी जोड़ दिया और कहा कि यह गुमान आर्थिक मुद्दों से सैन्य स्तर तक पहुंच गया है। जिससे उन्होंने गलती से मान लिया है कि वे अब चीन का मुकाबला सीमा विवादों से कर सकते हैं। यह सोच खतरनाक है।

पश्चिम मीडिया दलाली कर रही है

ग्लोबल टाइम्स ने अपनी खींझ पश्चिमी मीडिया पर भी निकाली और कहा कि पश्चिमी मीडिया चीन से भारत की तुलना करके उत्साह के साथ दलाली कर रही है। इससे कुछ भारतीयों को सही स्थिति को लेकर भ्रम हो गया है। यह सोचना अवास्तविक है कि इस समय भारत चीन की जगह ले सकता है।